Driving Licence Update: उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लागू किया जा रहा है। अब डीएल निर्माण का काम निजी एजेंसियों,सिल्वर टच, फोकाम नेट और रोजमार्टा को सौंपा गया है। नई तकनीक, बेहतर कार्ड क्वालिटी और तेज सेवा के साथ 1 दिसंबर से पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी।
UP Driving Licence: उत्तर प्रदेश में ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) बनवाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। परिवहन विभाग ने अब तक स्मार्ट चिप के जिम्मे रहने वाली डीएल निर्माण प्रणाली को पूरी तरह बदलते हुए इसे निजी एजेंसियों को सौंप दिया है। नई व्यवस्था 1 दिसंबर से पूरे प्रदेश में लागू कर दी जाएगी। इससे डीएल निर्माण की स्पीड, पारदर्शिता और तकनीकी गुणवत्ता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई व्यवस्था के तहत प्रदेश में तीन निजी कंपनियों को काम बांटा गया है। राजधानी लखनऊ में डीएल से जुड़ा संपूर्ण कार्य “सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज़” को सौंपा गया है, जबकि “फोकाम नेट” और “रोजमार्टा” अन्य जिलों में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया देखेंगे। तीनों कंपनियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में हार्डवेयर इंस्टॉलेशन का अधिकांश काम पूरा कर लिया है और टेस्टिंग जारी है।
लंबे समय से स्मार्ट चिप कंपनी डीएल प्रोसेस संभाल रही थी। हालांकि, समय के साथ शिकायतें बढ़ी-
इसके बाद परिवहन विभाग ने पूर्ण टेक्नोलॉजी अपग्रेड पर निर्णय लेते हुए नई एजेंसियों को जिम्मेदारी देने का फैसला लिया।
राजधानी लखनऊ में पूरी लाइसेंस प्रक्रिया सिल्वर टच कंपनी संभालेगी। यह कंपनी देश की कई सरकारी प्रणालियों में डिजिटल समाधान प्रदान कर चुकी है।
लखनऊ में नई व्यवस्था के तहत-
लखनऊ में डीएल के सभी प्रकार लर्निंग, स्थाई, डुप्लिकेट, नवीनीकरण, एड्रेस चेंज, क्लास एडिशन इसी कंपनी द्वारा प्रोसेस किए जाएंगे। अन्य जिलों में फोकाम नेट और रोजमार्टा संभालेंगी जिम्मेदारी
यह कंपनी पश्चिमी और मध्य यूपी के कई जिलों का जिम्मा संभालेगी।
पूर्वांचल व बुंदेलखंड के अधिकांश जिलों में यह कंपनी डीएल निर्माण प्रक्रिया संभालेगी।
दोनों कंपनियों ने जिलों में नए हार्डवेयर और ऑनलाइन सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म स्थापित कर दिए हैं। इसके साथ ही नई एजेंसियों को परिवहन विभाग की ओर से सख्त मानक दिए गए हैं-
लाइंस कम होंगी और काम ऑटोमेशन से तेज होगा।
नया स्मार्ट कार्ड अधिक टिकाऊ और हाई सिक्योरिटी प्रिंटिंग वाला होगा।
मध्यस्थों की भूमिका कम होगी, सब कुछ ऑनलाइन ट्रैक किया जा सकेगा।
नया सर्वर सिस्टम और आधुनिक उपकरणों से डेटा एरर और सर्वर डाउन समस्या कम होगी।
डीएल बनवाने वालों के लिए क्या बदलाव होंगे
परिवहन विभाग का दावा
अधिकारियों का कहना है कि इससे जनता को मिलने वाली सेवा की गुणवत्ता पहले से बेहतर होगी।