
यूपी में 6 पीसीएस अफसरों के तबादले, कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां बदलीं (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
PCS Transfer: उत्तर प्रदेश शासन ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से छह पीसीएस अधिकारियों के तबादले किए हैं। जारी आदेश के अनुसार विभिन्न जिलों में एडीएम न्यायिक, एसडीएम, नगर मजिस्ट्रेट और विकास प्राधिकरण के सचिव स्तर पर नई तैनातियां की गई हैं। इस फेरबदल को प्रशासनिक सक्रियता और कार्यकुशलता बढ़ाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। शासन द्वारा जारी सूची के मुताबिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से नई जिम्मेदारियां संभालने के निर्देश दिए गए हैं।
तबादला सूची के अनुसार,राजेश चंद्र को अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) मैनपुरी बनाया गया है। विकास यादव को उपजिलाधिकारी (एसडीएम) अंबेडकर नगर नियुक्त किया गया है। बृजपाल सिंह को अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) लखीमपुर खीरी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राजेश कुमार मिश्रा को अयोध्या विकास प्राधिकरण का सचिव बनाया गया है। संजीव कुमार उपाध्याय को नगर मजिस्ट्रेट अयोध्या नियुक्त किया गया है। अर्चना अग्निहोत्री को एसडीएम मऊ बनाया गया है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार यह तबादले नियमित प्रक्रिया का हिस्सा हैं। शासन समय-समय पर अधिकारियों के कार्यकाल, अनुभव और क्षेत्रीय आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैनाती में बदलाव करता है। मैनपुरी और लखीमपुर जैसे जिलों में एडीएम न्यायिक की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है, जहां भूमि विवाद, कानून-व्यवस्था से जुड़े प्रशासनिक निर्णय और न्यायिक प्रकृति के मामलों का निस्तारण होता है।
अयोध्या में दो महत्वपूर्ण पदों पर नई तैनाती की गई है। अयोध्या विकास प्राधिकरण के सचिव के रूप में राजेश कुमार मिश्रा की नियुक्ति ऐसे समय पर हुई है जब शहर में बुनियादी ढांचे और विकास परियोजनाओं की रफ्तार तेज है। नगर मजिस्ट्रेट के रूप में संजीव कुमार उपाध्याय की नियुक्ति भी अहम मानी जा रही है। नगर क्षेत्र में शांति व्यवस्था, अतिक्रमण नियंत्रण, राजस्व कार्य और प्रशासनिक समन्वय की जिम्मेदारी नगर मजिस्ट्रेट के पास होती है।
विकास यादव को एसडीएम अंबेडकर नगर बनाया गया है। उपजिलाधिकारी का पद तहसील स्तर पर राजस्व, कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों के समन्वय के लिए महत्वपूर्ण होता है। इसी तरह अर्चना अग्निहोत्री को एसडीएम मऊ नियुक्त किया गया है। महिला अधिकारी की इस तैनाती को प्रशासनिक विविधता और सशक्तिकरण के नजरिए से भी देखा जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में विकास कार्यों की गति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए समय-समय पर इस प्रकार के तबादले आवश्यक होते हैं। तबादलों के जरिए शासन यह सुनिश्चित करता है कि अधिकारियों की कार्यशैली और अनुभव का उपयोग विभिन्न क्षेत्रों में संतुलित रूप से हो सके।
नई तैनातीयों का सीधा असर संबंधित जिलों के प्रशासनिक कामकाज पर पड़ेगा।
इन सभी पहलुओं पर नए अधिकारियों की कार्यशैली का प्रभाव दिखाई देगा। हालांकि शासन की ओर से इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया गया है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस पर चर्चा जारी है। कई बार तबादलों को आगामी योजनाओं, परियोजनाओं या विशेष परिस्थितियों से जोड़कर भी देखा जाता है।
Published on:
17 Feb 2026 11:17 pm
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