
Livestock Officer Recruitment: उत्तर प्रदेश में पशुधन विभाग की भर्ती में कथित गड़बड़ी के मामले में आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने रिटायर्ड IAS अधिकारी योगेश कुमार को गिरफ्तार किया है। उन्हें लखनऊ के गोमती नगर से पकड़ा गया। यह मामला साल 2013-14 में समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों पर हुई भर्ती से जुड़ा है। उस समय योगेश कुमार विभाग में प्रमुख सचिव थे। भर्ती प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी और लिखित परीक्षा व इंटरव्यू में नंबरों को लेकर गड़बड़ी के आरोप लगे थे। EOW के मुताबिक, सबूत मिलने के बाद गिरफ्तारी की गई है।
पशुधन प्रसार अधिकारी के 1198 पदों के लिए 2 फरवरी 2014 को परीक्षा कराई गई थी। भर्ती के बाद 1005 अभ्यर्थियों का चयन हुआ। उन्हें ट्रेनिंग देने के बाद नौकरी पर रखा गया। हालांकि, चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे और 34 अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल कीं। याचिकाओं में लिखित परीक्षा और इंटरव्यू में गड़बड़ी के आरोप लगाए गए थे। लिखित परीक्षा के लिए 80 और इंटरव्यू के लिए 20 अंक तय थे। आरोप था कि इंटरव्यू में दिए गए नंबरों के जरिए कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि OMR शीट की जांच एक ही जगह कराई गई। आरोप है कि इससे अंकों में हेरफेर की गुंजाइश बनी। चयन प्रक्रिया में जिलों और मंडलों की कमेटियों के अधिकार भी खत्म कर दिए गए थे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर 17 दिसंबर 2017 को मामले की जांच विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई। एसआईटी ने 2018 में जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंप दी। रिपोर्ट में कई अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई थी।
इसके बाद साल 2019 में तत्कालीन निदेशक चरण सिंह यादव को निलंबित कर दिया गया। 29 जुलाई 2021 को मामले में 28 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जांच एजेंसियों ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के साथ परीक्षा कराने वाली संस्था की भूमिका की भी जांच की। तत्कालीन पशुधन विकास मंत्री राजकिशोर सिंह की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी।
भर्ती के समय राजकिशोर सिंह पशुपालन मंत्री थे। साल 2016 में उन्हें मंत्री पद से हटा दिया गया था। करीब आठ साल तक सक्रिय राजनीति से दूर रहने के बाद वह साल 2024 में भाजपा में शामिल हो गए। वह बस्ती से छह बार विधानसभा और तीन बार लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई से जुड़ी फाइल सरकार की मंजूरी के इंतजार में है।
EOW के डीजी जेएन सिंह ने बताया, “सबूत मिलने के बाद योगेश कुमार को राजधानी के गोमती नगर से गिरफ्तार किया गया है। आगे कानूनी कार्रवाई की जा रही है।” योगेश कुमार की गिरफ्तारी को उत्तर प्रदेश में किसी वरिष्ठ नौकरशाह के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया जा रहा है। खबर में इसे राज्य में ब्यूरोक्रेट्स की दूसरी सबसे बड़ी गिरफ्तारी भी बताया गया है। इससे पहले साल 2007 में मायावती सरकार के दौरान मुख्य सचिव रह चुके अखंड प्रताप सिंह को आय से अधिक संपत्ति के मामले में सीबीआई ने गिरफ्तार किया था। उनका 2023 में निधन हो गया था।