
राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी BJP में शामिल (X @Arjun5chaudhary)
SP MLA BJP Join: समाजवादी पार्टी से निष्कासित गौरीगंज के विधायक राकेश प्रताप सिंह आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होंगे। उनके साथ गोसाईगंज के विधायक अभय सिंह और कालपी के विधायक विनोद चतुर्वेदी भी भाजपा की सदस्यता लेंगे। सदस्यता ग्रहण कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और कई वरिष्ठ नेताओं के मौजूद रहने की जानकारी है। राकेश प्रताप सिंह पिछले कुछ सालों से सपा नेतृत्व से नाराज चल रहे थे। रामचरितमानस को लेकर उनका विरोध और साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार उनके और सपा के बीच दूरी बढ़ने की प्रमुख वजहों में शामिल रहे।
गौरीगंज विधायक राकेश प्रताप सिंह, गोसाईगंज विधायक अभय सिंह और कालपी विधायक विनोद चतुर्वेदी बुधवार को भाजपा का दामन थामेंगे। कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरपाल मौर्य और मंत्री दारा सिंह चौहान समेत कई नेताओं के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
इसके अलावा अमेठी जिले के सैकड़ों ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों, पूर्व ग्राम प्रधानों और सपा से जुड़े लोगों के भी भाजपा में शामिल होने का दावा किया जा रहा है।
राकेश प्रताप सिंह तीन बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर विधायक चुने गए। पिछले तीन सालों में उनका पार्टी नेतृत्व से मतभेद बढ़ता गया। स्वामी प्रसाद मौर्य की ओर से रामचरितमानस और धार्मिक विषयों पर की गई टिप्पणियों का उन्होंने विरोध किया था। इसके बाद सपा नेतृत्व के साथ उनकी तल्खी बढ़ गई।
राकेश प्रताप सिंह ने गौरीगंज से अयोध्या स्थित राम मंदिर तक पदयात्रा भी निकाली थी। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने सपा के रुख से अलग जाकर भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया। चुनाव से पहले उनके परिवार के कुछ सदस्य भी भाजपा में शामिल हो गए थे। इन घटनाओं के बाद सपा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें निष्कासित कर दिया था।
भाजपा में शामिल होने से पहले राकेश प्रताप सिंह ने कहा है कि वह राष्ट्र और राम के लिए भाजपा का साथ देने जा रहे हैं। इससे पहले उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि जहां भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए जाएं और रामचरितमानस जलाने या फाड़ने की घटनाएं हों, वहां राजनीति करना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि करीब तीन साल पहले उन्होंने गौरीगंज में एक धार्मिक मंच से कहा था कि चाहे वह विधायक रहें या नहीं, टिकट मिले या नहीं और राजनीति रहे या नहीं, लेकिन रामचरितमानस जलाने-फाड़ने, तुलसीदास की लेखनी पर सवाल उठाने तथा सनातन और हिंदू धर्म के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वालों के साथ राजनीति नहीं की जा सकती।
Updated on:
14 Oct 2026 08:52 am
Published on:
14 Oct 2026 08:37 am
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