लखनऊ

यूपी में 26 मई को खत्म हो रहा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल, अब किसके हाथ में होगी गांव की कमान, कैबिनेट में भेजा गया प्रस्ताव

UP Panchayat Election: यूपी में 26 मई को खत्म हो रहा है 57 हजार से ज्यादा ग्राम प्रधानों का कार्यकाल। चुनाव टलने के बीच अब कौन चलाएगा गांव की सरकार? जानिए यूपी सरकार का नया प्लान।
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May 19, 2026
UP Panchayat Election, यूपी पंचायत चुनाव
पंचायत चुनाव- ग्राम प्रधान का कार्यकाल खत्म हो रहा है | फोटो सोर्स- IANS

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश के गांवों की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर आ रही है। यूपी की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल इसी महीने 26 मई को खत्म होने जा रहा है। आमतौर पर कार्यकाल खत्म होने से पहले ही चुनाव करवा लिए जाते हैं, लेकिन इस बार पंचायत चुनाव कब होंगे, इसकी तारीख अभी तय नहीं हो पाई हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि 26 मई के बाद गांवों के विकास कार्य और जरूरी कामकाज की कमान किसके हाथों में होगी। इस समस्या को सुलझाने के लिए पंचायतीराज विभाग ने एक प्रस्ताव तैयार करके कैबिनेट को भेजा है, जिसे अगले कुछ दिनों में मंजूरी मिल सकती है।

प्रधान का कार्यकाल नहीं बढ़ेगा, अब 'प्रशासक' संभालेंगे काम

पंचायतीराज विभाग के निदेशक अमित सिंह ने साफ कर दिया है कि मौजूदा नियमों के मुताबिक ग्राम प्रधानों का कार्यकाल आगे बढ़ाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसी स्थिति में शासन स्तर से गांवों में कामकाज संभालने के लिए 'प्रशासक' (Administrator) नियुक्त किए जाएंगे। नियमों के तहत गांवों में तैनात 'ग्राम पंचायत सहायक' को ही प्रशासक बनाया जाता है। जब तक राज्य में नए पंचायत चुनाव नहीं हो जाते, तब तक ये प्रशासक ही ग्राम पंचायत के सभी जरूरी काम और पैसों का लेन-देन संभालेंगे।

क्या कहती है पंचायतीराज एक्ट की धारा 12 (3A)?

पंचायतीराज एक्ट 1947 एक्ट की धारा 12 (3A) के तहत, चुनाव समय पर न होने की स्थिति में राज्य सरकार या जिलाधिकारी को प्रशासक या प्रशासनिक समिति बनाने का अधिकार है।
प्रशासनिक समिति का फायदा यह है कि इस समिति में निवर्तमान ग्राम प्रधान या सरकार द्वारा तय व्यक्ति अध्यक्ष होता है। साथ ही वार्ड सदस्यों और ग्राम पंचायत सहायक को इसमें मेंबर बनाया जाता है, जिससे स्थानीय जुड़ाव बना रहता है।

अधिकारियों के हाथ में कमान जाने से क्यों डर रहे हैं ग्रामीण?

  • पारदर्शिता का अभाव- संगठन का आरोप है कि साल 2021 में भी प्रशासकों के कार्यकाल के दौरान करीब 4 हजार करोड़ रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन उसका सही हिसाब-किताब सामने नहीं आया। इससे वित्तीय गड़बड़ियों की आशंका बढ़ती है।
  • सामाजिक ताने-बाने की समझ नहीं- ज्यादातर प्रशासक उस गांव का निवासी नहीं होता। ऐसे में उसे गांव की परिस्थितियों और लोगों की जरूरतों का अंदाजा नहीं होता। सुख-दुख या किसी गरीब की बेटी की शादी जैसे सामाजिक मामलों में जो मदद स्थानीय प्रधान कर सकता है, वैसी संवेदनशीलता बाहरी प्रशासक से उम्मीद नहीं की जा सकती।
  • शांति व्यवस्था और मतदान- चुनावों के दौरान स्थानीय प्रधान आपसी तालमेल से शांति बनाए रखने और वोटिंग प्रतिशत बढ़ाने में मदद करते हैं, जो एक सरकारी अधिकारी के लिए मुश्किल होता है।

आखिर क्यों टल रहे हैं यूपी में पंचायत चुनाव? ये हैं 3 मुख्य कारण

  1. वोटर लिस्ट का अधूरा होना

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो रहा है, जबकि पंचायत चुनाव की फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन 10 जून को होना तय हुआ है। लिस्ट से पहले चुनाव मुमकिन नहीं है।

  1. ओबीसी आरक्षण का पेंच

चुनावों में OBC आरक्षण तय करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन के प्रस्ताव को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है। आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में 3 से 6 महीने का समय लग सकता है, जिसके बाद ही सीटों का आरक्षण तय होगा।

  1. विधानसभा चुनाव के बाद कराने की सोच

सरकार अब पंचायत चुनाव को विधानसभा चुनाव के बाद कराने पर विचार कर रही है। हालांकि, राजनीतिक दल इस पर सहमत दिखा रहे हैं, लेकिन फिलहाल यह पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।

हालांकि, कुछ समय पहले पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक इंटरव्यू में दावा किया था कि 12 जुलाई तक पंचायत चुनाव संपन्न करा लिए जाएंगे, लेकिन मौजूदा जमीनी हालातों और कानूनी प्रक्रियाओं को देखते हुए इसमें अभी और वक्त लगना तय माना जा रहा है।

Updated on:
19 May 2026 04:04 pm
Published on:
19 May 2026 04:02 pm