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यूपी चुनाव 2027: एक्टिव मोड में आई कांग्रेस, खास स्ट्रैटिजी पर है फोकस, बिहार में हुई भूल से सीखा है सबक!

Congress Up Election Strategy : यूपी विधानसभा चुनाव 2027 के लिए कांग्रेस एक्टिव मोड में आ गई है। बिहार चुनाव की गलतियों से सबक लेते हुए पार्टी ने सपा के साथ गठबंधन और 3 श्रेणियों में सीटों के बंटवारे की खास रणनीति तैयार की है।

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Rahul Gandhi

यूपी चुनाव 2027 पर फोकस कर रही कांग्रेस, PC- Chatgpt

Congress Up Election Strategy : अगले साल होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने भी कमर कस ली है। बिहार चुनाव में हुईं गलतियों से सबक लेते हुए कांग्रेस ने यूपी चुनाव की तैयारियों को काफी पहले ही शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिवों को उन विधानसभा क्षेत्रों के संभावित उम्मीदवारों की सूची सौंपने का निर्देश दिया गया है, जहां कांग्रेस को बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद है।

दरअसल, कांग्रेस चाहती है कि सहयोगी समाजवादी पार्टी से सीटों के बंटवारे को लेकर कोई पेंच न फंसे। इसलिए वह पहले ही अपनी पसंद की सीटें चिन्हित करके संभावित उम्मीदवारों के नाम की सूची तैयार कर रही है।

बिहार में हुआ था नुकसान

कांग्रेस का मानना है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सीट बंटवारे में देरी और INDIA गठबंधन सहयोगियों के बीच ‘फ्रेंडली फाइट’ की वजह से उसे भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा था। उत्तर प्रदेश में ऐसा न हो, इसके लिए पार्टी ने पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है।

सूत्रों का कहना है कि ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के उत्तर प्रदेश प्रभारी महासचिव अविनाश पांडे ने राज्य में पार्टी के छह सचिवों को दो सूचियां तैयार करने को कहा है। पहली सूची में सभी 403 विधानसभा सीटों के संभावित उम्मीदवारों के नाम होंगे, जबकि दूसरी सूची में करीब 100-120 ऐसी सीटों की पहचान की जाएगी, जहां पार्टी को अच्छे परिणाम की उम्मीद है।

तीन श्रेणियों में बांटी सीटें

पार्टी ने आंतरिक तौर पर उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों को तीन श्रेणियों में बांटा है- अधिक संभावना, मामूली संभावना और कमजोर संभावना। पार्टी सूत्रों के अनुसार, अब तक पहली श्रेणी में 100 से ज्यादा सीटों की पहचान की जा चुकी है, दूसरी में करीब 200 और तीसरी में लगभग 120 सीटें शामिल हैं।

स्थानीय इकाइयों और चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं से फीडबैक लिया जा रहा है। अगले कुछ दिनों में इसकी रिपोर्ट आलाकमान को सौंपी जा सकती है। माना जा रहा है कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में लगभग 80 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है।

नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक वरिष्ठ कांग्रेस लीडर ने कहा कि हम लगभग 100-120 सीटों की पहचान करेंगे, जहां हमें लगता है कि हम मज़बूत स्थिति में हैं और अंततः लगभग 80 सीटों पर सहमति बन सकती है।

सपा से नहीं टूटेगा रिश्ता

पार्टी नेतृत्व इस बात को लेकर भी सतर्क है कि इस प्रक्रिया में राज्य-स्तरीय पदाधिकारियों की ज्यादा दखलंदाजी न हो। बता दें कि 2022 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस ने सभी 403 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे केवल दो सीटों पर ही जीत मिली। इस चुनाव में उसका वोट शेयर गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर यानी 2.33% पर पहुंच गया था। इसलिए आलाकमान 2027 में समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के पक्ष में है। एक अन्य वरिष्ठ नेता ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी के साथ हमारा गठबंधन बहुत अच्छा रहा। इसी के चलते भाजपा राष्ट्रीय स्तर पर 240 सीटों पर सिमट गई। ऐसे में गठबंधन की इस व्यवस्था को बिगाड़ने का कोई मतलब ही नहीं बनता। हालांकि, पार्टी के भीतर ही एक धड़ा ऐसा भी है जो अकेले चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखना चाहता है।

ब्राह्मणों पर भी फोकस

यूपी में कांग्रेस मुसलमान, दलित और ब्राह्मणों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। दरअसल, योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा कथित तौर पर ठाकुर समुदाय को दी जा रही तरजीह के चलते ब्राह्मण समुदाय में कुछ हद तक असंतोष है, कांग्रेस इसे अपने पक्ष में करना चाहती है। वैसे भी हिंदुत्व की राजनीति के चलते भाजपा की ओर मुड़ने से पहले उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय को कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता था।

इसी तरह, दलित वोट भी उतने ही ज़रूरी हैं। यूपी की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी लगभग 20%, ब्राह्मणों की 7-10% और दलितों की हिस्सेदारी लगभग 20% है। कांग्रेस की कोशिश है कि समाजवादी पार्टी के साथ सीटों के बंटवारे पर बातचीत अगस्त या सितंबर तक पूरी हो जाए, ताकि उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार शुरू करने के लिए पर्याप्त समय मिले।

चौंका भी सकती है कांग्रेस

यूपी चुनाव को लेकर क्या राज्य में पार्टी नेतृत्व में कोई फेरबदल संभव है? इस बारे में फिलहाल कुछ कहना मुश्किल है, लेकिन संभव है कि कांग्रेस प्रियंका गांधी वाड्रा को आगे कर सकती है। प्रियंका ने 2022 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के प्रचार अभियान की कमान संभाली थी। हालांकि, ये बात अलग है कि पार्टी का प्रदर्शन काफ़ी निराशाजनक रहा था। लखनऊ और दिल्ली, दोनों जगहों पर यह चर्चा ज़ोरों पर है कि चुनावों से पहले राज्य के नेतृत्व में कुछ बदलाव हो सकते हैं। प्रियंका गांधी वायनाड से सांसद हैं और यूपी कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को उनका करीबी माना जाता है।