UP Panchayat Election 2026: उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव 2026 से पहले OBC आरक्षण तय करने के लिए पांच सदस्यीय राज्य समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। जस्टिस राम अवतार सिंह की अध्यक्षता वाला यह आयोग छह महीने में रिपोर्ट देगा। आयोग की सिफारिशों के आधार पर पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का नया ढांचा तय होगा।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आगामी पंचायत चुनावों से पहले अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण को लेकर बड़ा कदम उठाया है। बुधवार देर रात राज्य सरकार ने पंचायती राज संस्थाओं में ओबीसी आरक्षण की समीक्षा और सिफारिश के लिए पांच सदस्यीय राज्य समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन की अधिसूचना जारी कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। यह आयोग छह महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनावों की तैयारियों के बीच पंचायती राज संस्थाओं में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण तय करने के लिए पांच सदस्यीय “राज्य ग्रामीण स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग” का गठन कर दिया है। पंचायती राज विभाग की ओर से बुधवार देर रात जारी अधिसूचना में आयोग के गठन की जानकारी दी गई। सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। आयोग के अन्य सदस्यों में सेवानिवृत्त अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष कुमार विश्वकर्मा के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एस.पी. सिंह को शामिल किया गया है। अधिसूचना के मुताबिक आयोग का कार्यकाल सदस्यों के पदभार ग्रहण करने की तिथि से छह महीने तक रहेगा।
आयोग पंचायतों में ओबीसी आरक्षण से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन करेगा। और संवैधानिक प्रावधानों व न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अपनी सिफारिश सरकार को देगा। अध्यक्ष और सदस्यों के मानदेय, भत्ते तथा अन्य सुविधाओं से संबंधित आदेश अलग से जारी किए जाएंगे।
दरअसल, हाल ही में मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस आयोग के गठन को मंजूरी दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की ओर से स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया पूरी करना अनिवार्य बताया गया है। इसी प्रक्रिया के तहत सरकार ने यह आयोग गठित किया है। माना जा रहा है कि आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण का नया ढांचा तय किया जाएगा। जिससे चुनावी प्रक्रिया को कानूनी चुनौती से बचाने में मदद मिलेगी।