
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कब होंगे, यह सवाल फिलहाल अनसुलझा है। हाई कोर्ट ने सरकार को तीन महीने के भीतर चुनाव संपन्न कराने को कहा है, लेकिन पंचायती राज विभाग की तैयारी कुछ और ही इशारा कर रही है। विभाग ने प्रशासक के तौर पर काम कर रहे प्रधानों को छह महीने का और विस्तार देने का प्रस्ताव तैयार कर शासन के पास भेज दिया है। मौजूदा प्रशासकों की छह माह की अवधि 24 नवंबर को पूरी हो जाएगी।
मामले को और पेचीदा बना दिया है प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर के बयान ने। पिछड़े वर्गों के आरक्षण को लेकर उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब तक पिछड़ों का आरक्षण सुनिश्चत नहीं हो जाता तब तक वह पंचायत चुनाव नहीं होने देंगे। एक जनसभा के दौरान दिया गया यह बयान सोशल मीडिया पर खूब साझा किया जा रहा है। वीडियो में वह कहते सुनाई दे रहे हैं कि उनके पास पावर है और इस पावर का वह इस्तेमाल कर रहे हैं। जिसे जो करना है, कर सकता है। वीडियो में राजभर विरोध करने वालों पर कुछ अमर्यादित टिप्पणी करते भी सुने जा रहे हैं। हालांकि ‘पत्रिका इस वीडियो की पुष्टि नहीं करता है।
वायरल वीडियो में ओमप्रकाश राजभर भोजपुरी में यह कहते सुनाई पड़ रहे हैं कि कुछ…हैं जिन्हें जानकारी नहीं है। वे सोशल मीडिया पर बोल रहे हैं कि ओमप्रकाश राजभर को प्रधान नहीं बनने देंगे। उनकी औकात नहीं है। उन्हें ज्यादा नहीं बोलना चाहिए। उनके नेता दिशाविहीन हो गए हैं। पहले उन्हें ठीक करें। हम इतना ही कहेंगे कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव का बिगुल बजेगा। पिछड़ा वर्ग आयोग हाई कोर्ट जा रहा है। वो अपना कहेगा कि हम 50 जिले का काम कर चुके अभी 25 जिले का बाकी है। तीन महीने का समय मांगेगा। इसमें ओमप्रकाश राजभर क्या कर पाएंगे। हम तो चाहते हुए भी चुनाव नहीं करा पाएंगे।
यूपी के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने बताया कि उन्होंने ग्राम प्रधानों के प्रशासक के तौर पर कार्यकाल बढ़ाने के लिए फाइनल पर साइन कर प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेज दिया है। उन्होंने कहा कि प्रधान लोग छह महीने और प्रशासक रह सकते हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 24 नवंबर तक ही था। अब इसे छह महीने और बढ़ाने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधान जी लोग अपने का पद का आनंद लें।