लखनऊ

UP Politics: यूपी बीजेपी में 33% महिला आरक्षण से जिला कमेटी गठन में आ रही दिक्कतें

UP BJP: यूपी भाजपा में जिला कमेटियों के गठन में 33% महिला आरक्षण नई चुनौती बन गया है, सात महिलाओं की अनिवार्यता के चलते कई जिलों में संगठनात्मक प्रक्रिया अटक गई है।

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Mar 17, 2026
यूपी बीजेपी में महिला आरक्षण बना नई चुनौती, जिला कमेटियों के गठन में अड़चनें     (फोटो सोर्स : भाषा WhatsApp News Group)

UP BJP Women's Reservation: उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की कवायद के बीच एक नई चुनौती सामने आई है। पार्टी द्वारा जिला स्तर की कमेटियों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले ने जहां एक ओर महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है, वहीं दूसरी ओर इसके क्रियान्वयन में कई व्यावहारिक कठिनाइयां भी उभरकर सामने आई हैं।

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21 सदस्यीय कमेटी में 7 महिलाओं की अनिवार्यता

पार्टी के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, 21 सदस्यीय जिला कार्यकारिणी में कम से कम 7 महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। यह नियम सभी 94 संगठनात्मक जिलों पर लागू किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य संगठन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और उन्हें नेतृत्व के अवसर देना है। लेकिन जमीनी स्तर पर इस नियम का पालन करना कई जिलों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा दिक्कत

खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय और अनुभवी महिला कार्यकर्ताओं की कमी के कारण पार्टी नेताओं और पर्यवेक्षकों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कई जिलों से यह फीडबैक सामने आया है कि वहां सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं की संख्या सीमित है, जिससे निर्धारित संख्या पूरी करना कठिन हो रहा है। ऐसे में संगठनात्मक प्रक्रिया कई जगह धीमी पड़ गई है।

पुरुष नामों की अधिकता बनी बाधा

सूत्रों के अनुसार, कई जिलों में जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नेताओं द्वारा भेजी गई सूची में पुरुषों की संख्या अधिक है, जबकि महिलाओं के नाम अपेक्षाकृत कम हैं। इससे चयन प्रक्रिया में असंतुलन पैदा हो रहा है और पर्यवेक्षकों को बार-बार सूची में बदलाव करना पड़ रहा है। कई स्थानों पर नई महिला कार्यकर्ताओं की तलाश भी की जा रही है।

पहली बार लागू हुआ एक तिहाई आरक्षण

भाजपा ने पहली बार अपने संगठनात्मक ढांचे में एक तिहाई पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए हैं। इसे आधी आबादी को संगठन से जोड़ने और महिला नेतृत्व को बढ़ावा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि इससे आने वाले समय में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ेगी और संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी।

पंकज चौधरी की चेकलिस्ट पर हो रहा काम

पार्टी के वरिष्ठ नेता पंकज चौधरी द्वारा जारी चेक लिस्ट के आधार पर जिला कमेटियों का गठन किया जा रहा है। इस चेक लिस्ट में आयु, सक्रियता, संगठन के प्रति योगदान और सामाजिक संतुलन जैसे मानकों को शामिल किया गया है। इन सभी मानकों को ध्यान में रखते हुए कमेटियों का गठन करना एक जटिल प्रक्रिया बन गई है, खासकर तब जब महिला आरक्षण का अनुपालन भी सुनिश्चित करना हो।

चुनावी माहौल में बढ़ी चुनौती

उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन को मजबूत करना भाजपा की प्राथमिकता है। ऐसे में जिला स्तर पर मजबूत टीम तैयार करना बेहद जरूरी है। लेकिन महिला आरक्षण के नियम के चलते जहां एक ओर सकारात्मक संदेश जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समयबद्ध तरीके से कमेटियों का गठन करना चुनौती बन गया है।

संगठन के सामने संतुलन की चुनौती

भाजपा के सामने इस समय दोहरी चुनौती है,एक ओर महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करना और दूसरी ओर संगठनात्मक मजबूती बनाए रखना। सामाजिक संतुलन, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व जैसे पहलुओं को ध्यान में रखते हुए सही उम्मीदवारों का चयन करना आसान नहीं है।

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