अखिलेश यादव ने नोएडा फैक्ट्री मजदूर हिंसा को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार पर तीखा हमला बोला।
UP Politics: सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नोएडा में फैक्ट्री मजदूरों के हिंसक प्रदर्शन को लेकर योगी सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा कि नोएडा में जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह सरकार की नाकामी की वजह से हुआ। सरकार को पहले से जानकारी थी, लेकिन उन्होंने इसे होने दिया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि इंटेलिजेंस फेल हो गई। अगर यह कोई बड़ी साजिश थी, तो इसके लिए मुख्यमंत्री और भाजपा जिम्मेदार हैं।
अखिलेश यादव ने ट्वीट कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि अगर मुख्यमंत्री नोएडा के मजदूरों के आंदोलन को किसी की साजिश बता रहे हैं, तो एक सवाल जनता पूछ रही है। अखिलेश ने पूछा कि खुफिया पुलिस बंगाल प्रचार करने गई थी या वनस्पति की खोजबीन में लगी थी? उन्होंने कहा कि मजदूरों के आंदोलन को नक्सलवाद का आरोप लगाने से पहले सरकार यह बताए कि पिछले 10 सालों में उसने ऐसा क्या किया कि हालात इतने बुरे हो गए।
अखिलेश ने आगे कहा कि सरकार मजदूरों के जख्मों पर मलहम नहीं लगा सकती तो न लगाए, लेकिन उन जख्मों पर नमक जरूर न छिड़के। उन्होंने भाजपा पर महंगाई और कमीशनखोरी का आरोप लगाया। कहा कि भाजपाई महंगाई के कारण परिवार पहले से ही दुखी हैं। उसके ऊपर मजदूरों पर अवांछित दोषारोपण करना घोर निंदनीय है। इससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
अखिलेश यादव ने साफ कहा कि अगर प्रदेश सरकार से नहीं संभल रहा है, तो मुख्यमंत्री सम्मान के साथ गद्दी से उतर जाएं। नहीं तो जनता उन्हें उतार देगी। उन्होंने 2027 का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा हटने वाली है। हम सब मिलकर बाबा साहब के संविधान के आधार पर समाज की स्थापना करेंगे।
अखिलेश ने भाजपा पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। कहा कि भाजपाई खुद अंतिम दौर के भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं, इसलिए न देश संभल रहा है और न प्रदेश। उन्होंने डबल इंजन सरकार को 'ट्रबल इंजन' बताया। कहा कि जनता इन इंजनों के पहिए खोल देगी और पूरे पुर्जे निकालकर हमेशा के लिए कबाड़खाने में भेज देगी।
अखिलेश यादव के इन तीखे बयानों से नोएडा हिंसा अब पूरी तरह राजनीतिक मुद्दा बन गया है। सपा प्रमुख ने मजदूरों की मांगों का समर्थन किया और सरकार को पूंजीपतियों का पक्ष लेने का आरोप लगाया। वहीं सरकार पहले ही प्रदर्शन को साजिश बताकर नक्सलवाद से जोड़ चुकी है। इस बहस से साफ है कि नोएडा घटना अब सिर्फ मजदूर आंदोलन नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी लड़ाई का हिस्सा बन गई है।