लखनऊ

शंकराचार्य विवाद पर BJP में टकराव! सीएम योगी के खिलाफ हुए केशव-ब्रजेश, बगावत पर सियासत तेज

मौनी अमावस्या के दौरान शंकराचार्य को रोके जाने और शिष्यों की चोटी खींचने के आरोप से यूपी की राजनीति गरमा गई। योगी सरकार की सख्ती के बीच डिप्टी सीएम के बयानों ने अलग संदेश दिया।
2 min read
Feb 18, 2026
क्या Yogi Adityanath सरकार में शुरू हो गई खुली बगावत?
क्या Yogi Adityanath सरकार में शुरू हो गई खुली बगावत?

UP Politics: शंकराचार्य विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान बनकर उभरा है, जो न केवल धार्मिक भावनाओं को छूता है, बल्कि सत्ताधारी भाजपा के भीतर गहरी दरार को भी उजागर कर रहा है। यह विवाद प्रयागराज के माघ मेले के दौरान शुरू हुआ, जब ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके ब्राह्मण शिष्यों के साथ प्रशासन की ओर से कथित तौर पर बदसलूकी हुई। मौनी अमावस्या (18 जनवरी 2026 के आसपास) के दिन संगम स्नान के लिए जा रहे शंकराचार्य को रोका गया, और उनके शिष्यों की चोटी खींचने का आरोप लगा। शंकराचार्य ने इसे अपमान बताया और योगी सरकार पर सनातन धर्म के अपमान का आरोप लगाया, यहां तक कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 'कालनेमि' जैसी शक्तियों से जोड़ा।

यूपी की राजनीति में गरमाया मुद्दा

यह मामला जल्द ही राजनीतिक रंग ले लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बिना नाम लिए शंकराचार्य को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि संविधान सबके ऊपर है, कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं। योगी ने 'कालनेमि' जैसे तत्वों का जिक्र कर सनातन धर्म को कमजोर करने वालों पर हमला बोला, जो अप्रत्यक्ष रूप से शंकराचार्य की ओर इशारा था। योगी की लाइन सख्त प्रशासनिक कार्रवाई और कानून-व्यवस्था की थी, जिसमें उन्होंने जोर दिया कि मेला नियमों के तहत चलेगा और कोई अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन यहीं से योगी सरकार में टकराव की खबरें सामने आईं।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने अलग सुर में बात की, जो योगी की लाइन से एकदम अलग है। केशव मौर्य ने शंकराचार्य को 'पूज्य' और 'भगवान शंकराचार्य' कहा। उन्होंने कहा कि पूज्य शंकराचार्य जी के चरणों में प्रणाम है। उनसे प्रार्थना है कि वह अच्छे से स्नान करें। इस विषय को यहीं खत्म करें। केशव ने अपमान की जांच की मांग की और संतों के सम्मान पर जोर दिया। उनकी यह टिप्पणी शंकराचार्य के समर्थकों में सराही गई, जबकि योगी के कट्टर समर्थकों में इसे नरमी के रूप में देखा गया।

ब्रजेश पाठक का बयान क्या है?

इसी के साथ ही उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का बयान और भी तीखा आया। उन्होंने कहा कि चोटी नहीं खींचनी चाहिए थी। बल प्रयोग करना था तो लाठी उठा लेते। चोटी खींचना महाअपराध है। देखिएगा महापाप लगेगा। ब्रजेश ने इसे धार्मिक अपराध बताया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। उन्होंने जोर दिया कि शिष्यों की चोटी खींचना पाप है, जो कई सालों तक लगेगा। यह बयान योगी की सख्ती से बिल्कुल उलट था, जहां योगी प्रशासन की कार्रवाई का बचाव कर रहे थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह भाजपा के भीतर जातीय और गुटबाजी का संकेत है। केशव मौर्य (पिछड़े वर्ग से) और ब्रजेश पाठक (ब्राह्मण) दोनों ही संतों के सम्मान को लेकर संवेदनशील दिखे, जबकि योगी (ठाकुर पृष्ठभूमि) पर ब्राह्मण असंतोष बढ़ा। कुछ रिपोर्ट्स में ब्रजेश को मुख्यमंत्री पद के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है, खासकर ब्राह्मण नाराजगी के बीच। शंकराचार्य के धरने और विरोध ने हिंदू संगठनों को भी बांट दिया, जहां कुछ योगी का समर्थन कर रहे हैं तो कुछ संतों के सम्मान पर जोर दे रहे हैं।

आखिर क्यों योगी हो गए अकेले?

यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में योगी की अकेलेपन को साफ-साफ दिखा रहा है। जहां योगी कानून-व्यवस्था और मजबूत छवि पर अड़े हैं, वहीं उनके डिप्टी सीएम संतों की भावनाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं। इससे भाजपा में दिल्ली-लखनऊ के बीच तनाव की अफवाहें भी तेज हुईं। वहीं इस सारे मुद्दों को लेकर विपक्ष भी कई जगह सरकार और भाजपी को घेर रही है।

Updated on:
18 Feb 2026 08:00 am
Published on:
18 Feb 2026 08:00 am