
UP Property:उत्तर प्रदेश में संपत्तियों की पहचान, स्वामित्व संबंधी अभिलेखों के सत्यापन और नामांतरण की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में योगी सरकार ने पहल तेज कर दी है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत संपत्ति की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को स्वतः पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके लिए विभिन्न विभागों के डिजिटल डेटाबेस को आपस में जोड़ने, यूनिक प्रॉपर्टी आईडी विकसित करने और अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
इसी सिलसिले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की समीक्षा बैठक हुई। बैठक में संपत्ति पंजीकरण के दौरान स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की जांच, रजिस्ट्री के बाद स्वतः नामांतरण, साइबर तहसील की व्यवस्था और राजस्व संहिता की धारा-34 से जुड़े विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक का प्रमुख उद्देश्य संपत्ति संबंधी सेवाओं में अनावश्यक देरी कम करना और विभिन्न विभागों के अभिलेखों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
प्रदेश में संपत्तियों की पहचान और उनके रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए अलग-अलग विभाग अपने क्षेत्राधिकार के अनुसार यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार कर रहे हैं। कृषि भूमि के लिए खसरा संख्या आधारित विशिष्ट पहचान की व्यवस्था है, जबकि आबादी की भूमि के लिए 13 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी यानी घरौनी तैयार की जा रही है। इसके अलावा आवास और औद्योगिक विकास विभाग भी अपने अधीन आने वाली संपत्तियों की पहचान के लिए अलग-अलग स्तर पर काम कर रहे हैं।
नगर विकास विभाग की ओर से बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, ई-नगरसेवा पोर्टल पर संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, पोर्टल पर 56.57 लाख संपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं। इन संपत्तियों के लिए 17 अंकों की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी तैयार करने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य शहरी संपत्तियों के रिकॉर्ड को एक व्यवस्थित डिजिटल पहचान देना है, जिससे संपत्ति कर निर्धारण, वसूली और संबंधित सेवाओं में सुविधा मिल सके।
शहरी संपत्तियों की पहचान और स्वामित्व के सत्यापन को बेहतर बनाने के लिए नक्शा परियोजना भी समीक्षा का महत्वपूर्ण विषय रही। इस परियोजना के तहत 10 नगर निकायों को पायलट के रूप में चुना गया है। इनमें गोरखपुर नगर निगम, झांसी नगर निगम, नगर पालिका परिषद नवाबगंज (बाराबंकी), हरदोई और चित्रकूट धाम सहित पांच निकायों में ई-नगर सेवा तथा नक्शा परियोजना की यूनिक प्रॉपर्टी आईडी व्यवस्था लागू करने की योजना है।
नक्शा परियोजना का उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति के लिए अर्बन प्रॉपर्टी कार्ड तैयार करना है, जिससे उसके स्वामित्व से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित करने और वैधानिक अधिकारों की पुष्टि करने में मदद मिल सके। वहीं, ई-नगरसेवा पोर्टल पर उपलब्ध 17 अंकों की आईडी का इस्तेमाल मुख्य रूप से संपत्ति कर के निर्धारण और वसूली के लिए किया जाता है। दोनों व्यवस्थाओं के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य स्तर के ई-नगरसेवा डेटाबेस और केंद्र स्तर के नक्शा डेटाबेस को एपीआई के माध्यम से जोड़ने की व्यवस्था की गई है।
इस तकनीकी एकीकरण से संबंधित रिकॉर्ड का वास्तविक समय में सत्यापन करने में सहायता मिलेगी। साथ ही, रजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। बैठक में नक्शा परियोजना के चयनित 10 नगर निकायों में काम पूरा करने का लक्ष्य 31 दिसंबर 2026 निर्धारित किए जाने की जानकारी दी गई।
संपत्ति की खरीद-बिक्री के दौरान स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों की अहम भूमिका को देखते हुए बैठक में मान्य अभिलेखों की पहचान करने पर भी चर्चा हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति बेचने के अधिकार की प्रथम दृष्टया पुष्टि के लिए खतौनी और घरौनी को मान्य अभिलेख के रूप में चिह्नित किया गया है। इससे संपत्ति के स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के लिए एक स्पष्ट आधार तैयार करने में मदद मिल सकती है।
नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन और औद्योगिक विकास विभागों को भी अपने-अपने क्षेत्राधिकार में संपत्तियों के विक्रय अधिकार की पुष्टि के लिए मान्य दस्तावेजों की पहचान करने को कहा गया है। आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अनुसार, भवन मानचित्र की स्वीकृति की प्रक्रिया में स्वामित्व संबंधी पहलुओं की जांच की जाती है। विकास प्राधिकरणों, परिषदों और अन्य संस्थाओं की ओर से आवंटित संपत्तियों के संबंध में आवंटन पत्र, रजिस्ट्री, बैनामा और लीज डीड जैसे दस्तावेज स्वामित्व के साक्ष्य के रूप में उपलब्ध होते हैं।
राजस्व अभिलेखों के ऑनलाइन प्रमाणीकरण, अद्यतन और विभिन्न विभागों के रिकॉर्ड के एकीकरण को व्यवस्थित बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया यानी एसओपी तैयार करने पर भी जोर दिया गया। बैठक में यह आवश्यकता रेखांकित की गई कि यदि किसी संपत्ति के अभिलेखों में विवाद हो या जरूरी दस्तावेज उपलब्ध न हों, तो ऐसी स्थिति में अपनाई जाने वाली प्रक्रिया स्पष्ट होनी चाहिए।
इस संबंध में महानिरीक्षक निबंधन, उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में पांच अक्टूबर 2026 को समिति गठित किए जाने की जानकारी दी गई। समिति में राजस्व परिषद और राजस्व विभाग के सक्षम अधिकारियों को भी शामिल किया जाना है। समिति अपनी रिपोर्ट राजस्व परिषद को सौंपेगी, जिसके बाद राजस्व विभाग आवश्यक एसओपी तैयार करेगा। अन्य विभागों को भी अपने स्तर पर मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जरूरत पड़ने पर स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के अधिकारियों का सहयोग लिया जा सकेगा।
संपत्ति कीरजिस्ट्री के बाद नामांतरण की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए विभिन्न विभागों के अंतर्गत पायलट संस्थाओं का चयन किया जाना है। इसके तहत राजस्व विभाग को कुछ राजस्व गांवों और नगर विकास विभाग को कम से कम एक नगर निकाय का चयन करना है। औद्योगिक विकास विभाग को यमुना औद्योगिक विकास प्राधिकरण अथवा किसी अन्य उपयुक्त औद्योगिक विकास प्राधिकरण को इस व्यवस्था से जोड़ने के लिए चयनित करना होगा। वहीं, आवास एवं शहरी नियोजन विभाग की ओर से लखनऊ विकास प्राधिकरण का चयन किया गया है।
चयनित संस्थाओं को स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग की प्रणाली से एपीआई के जरिए जोड़ा जाएगा। इससे पंजीकृत दस्तावेजों से जुड़ा जरूरी डेटा संबंधित विभागों और संस्थाओं तक स्वतः पहुंच सकेगा। इसके आधार पर नामांतरण की प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और समयबद्ध बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, स्वतः नामांतरण की व्यवस्था का वास्तविक लाभ इसके कार्यान्वयन, रिकॉर्ड की शुद्धता और संबंधित विभागों की प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
बैठक में साइबर तहसील और राजस्व संहिता की धारा-34 से संबंधित विषयों की भी समीक्षा की गई। व्यापक स्तर पर डिजिटल व्यवस्था विकसित करने का उद्देश्य संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड, पंजीकरण और राजस्व संबंधी प्रक्रियाओं में समन्वय बढ़ाना है। ऑनलाइन सत्यापन और विभागीय डेटाबेस के एकीकरण से दस्तावेजों की जांच में लगने वाला समय कम करने तथा रिकॉर्ड में विसंगतियों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।
योगी सरकार की इस पहल से संपत्ति संबंधी सेवाओं को अधिक पारदर्शी और नागरिकों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का लक्ष्य है। यदि प्रस्तावित व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो रजिस्ट्री के बाद नामांतरण, संपत्ति की पहचान और अभिलेखों के सत्यापन की प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हो सकती है। इससे नागरिकों को अलग-अलग कार्यालयों में बार-बार दस्तावेज प्रस्तुत करने की जरूरत कम करने और संपत्ति संबंधी सेवाओं में डिजिटल व्यवस्था का लाभ मिलने की उम्मीद है।