
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर मंत्री आवास के बाहर राम दरबार स्थापित कर सुंदरकांड का पाठ करते आंदोलनकारी अभ्यर्थी (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
Candidate Protest:उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 में आरक्षण विसंगति दूर करने और नियुक्ति की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर प्रदर्शन किया। पिछले 56 दिनों से धरना दे रहे अभ्यर्थी सुबह करीब 11 बजे मंत्री के आवास के बाहर एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर विरोध जताया। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने राम दरबार स्थापित कर सुंदरकांड का पाठ शुरू किया। इसी दौरान पुलिस प्रशासन ने अभ्यर्थियों को वहां से हटाकर बसों में बैठाया और लखनऊ के इको गार्डन भेज दिया। आंदोलनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से संबंधित आयोगों के आदेशों के अनुपालन और भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगति दूर करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।
अभ्यर्थियों ने सोमवार को अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन का रास्ता चुना। सुबह से ही प्रदर्शनकारी वहां जुटने लगे और अपनी मांगों के समर्थन में धरना शुरू कर दिया। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर उन्होंने राम दरबार स्थापित कर सुंदरकांड का पाठ भी किया। आंदोलनकारियों के अनुसार, उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से सरकार का ध्यान अपनी समस्या की ओर आकर्षित करना था। हालांकि, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप किया और अभ्यर्थियों को बसों में बैठाकर इको गार्डन भेज दिया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने की बात कही।
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे तूफान सिंह और आशुतोष वर्मा ने बताया कि अभ्यर्थी पिछले 56 दिनों से लगातार धरना देकर भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगति दूर करने की मांग उठा रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग से जुड़े आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष अपना पक्ष रखा है, लेकिन अब तक उन्हें कोई अंतिम समाधान नहीं मिला। इसी कारण उन्हें दोबारा शिक्षा मंत्री के आवास पर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। आंदोलनकारियों ने सरकार से मामले में स्पष्ट निर्णय लेने और पात्र अभ्यर्थियों को न्याय देने की मांग की है।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के पात्र अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ देते हुए 150 में से 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर परिणाम संशोधित किया जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में सामने आई आरक्षण विसंगति को दूर कर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही अभ्यर्थियों ने विसंगति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब इस मामले में आयोगों के आदेश और आरक्षण से जुड़े सवाल सामने आ चुके हैं, तो सरकार को बिना अनावश्यक देरी के उचित कदम उठाने चाहिए। हालांकि, इन मांगों पर अंतिम निर्णय और संबंधित आदेशों की वर्तमान स्थिति की पुष्टि आधिकारिक दस्तावेजों से होना आवश्यक है।
तूफान सिंह ने बताया कि आंदोलनकारी कई बार बेसिक शिक्षा मंत्री, प्रदेश सरकार के मंत्रियों और विभिन्न जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्याएं रख चुके हैं। इसके बावजूद उनकी मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं होने से अभ्यर्थियों में निराशा है। उनका कहना है कि लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी अब चाहते हैं कि सरकार मामले को प्राथमिकता देते हुए आरक्षण विसंगति दूर करने की प्रक्रिया स्पष्ट करे। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि भर्ती प्रक्रिया में कथित विसंगतियों का समाधान कराना और पात्र अभ्यर्थियों को उनका अधिकार दिलाना है।
धरना प्रभारी नवीन चौधरी ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की घोषणा करते हुए कहा कि अभ्यर्थी अब अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल शुरू करेंगे। उनके मुताबिक, जब तक सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक क्रमिक भूख हड़ताल और अनवरत धरना जारी रहेगा। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने संघर्ष को समाप्त करने से पहले भर्ती से संबंधित मुद्दों का न्यायसंगत समाधान चाहते हैं। भूख हड़ताल के फैसले के जरिए अभ्यर्थी सरकार का ध्यान अपनी मांगों की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। आंदोलन की आगे की रणनीति और भूख हड़ताल में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या के बारे में विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
आंदोलनकारियों ने ‘दस्तक दो अभियान’ चलाने की भी घोषणा की है। इस अभियान के तहत अभ्यर्थी प्रतिदिन किसी न किसी जनप्रतिनिधि के आवास पर पहुंचकर अपनी मांगों को रखेंगे। उनका कहना है कि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाना चाहते हैं। अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि लगातार संवाद और विरोध के माध्यम से भर्ती में आरक्षण विसंगति से जुड़े सवालों का समाधान निकलेगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि मामले को लंबित रखने के बजाय संबंधित पक्षों की बात सुनकर पारदर्शी और न्यायसंगत निर्णय लिया जाए।
आंदोलन में शामिल महिला मोर्चा की प्रतिनिधि रंजना जायसवाल ने कहा कि महिला अभ्यर्थी भी लंबे समय से न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रही हैं। उनके मुताबिक, भर्ती में आरक्षण विसंगति का मुद्दा सामने आने और संबंधित स्तरों पर इस पर चर्चा होने के बाद सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पात्र अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें नियुक्ति प्रक्रिया मेंउचित अवसर दिया जाए। महिला अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय तक निर्णय नहीं होने से उनके भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। उन्होंने सरकार से मामले का शीघ्र और निष्पक्ष समाधान करने की अपील की।
सोमवार को हुए प्रदर्शन और सुंदरकांड पाठ में तूफान सिंह, आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी, रंजना जायसवाल, आर.पी. सिंह, आरती पटेल, विनोद प्रजापति, नसीम फरीदी, सुमन, घनश्याम, उमाशंकर गुप्ता, संजीव गुप्ता और सुभाषिनी वर्मा सहित सैकड़ों अभ्यर्थियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। प्रदर्शनकारियों ने दोहराया कि उनका संघर्ष भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगति दूर कराने, संबंधित आयोगों के आदेशों के अनुपालन और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिलाने के लिए है। अब आंदोलनकारियों की निगाहें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। देखना होगा कि उनकी मांगों पर कब तक कोई ठोस निर्णय लिया जाता है।
Updated on:
26 Oct 2026, 3:32 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 3:32 PM IST
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