
प्रधानमंत्री के स्वर्गीय पिता पर कथित अभद्र टिप्पणी की निंदा, बोले- राजनीतिक विरोध में भी मर्यादा और संस्कारों का पालन जरूरी (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Congress controversy President Congress President Mallikarjun Kharge: उत्तर प्रदेश के नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर की गई अभद्र टिप्पणी की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति से मर्यादा, संयम और शालीनता की अपेक्षा की जाती है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन विरोध के नाम पर व्यक्तिगत टिप्पणी करना और परिवार को निशाना बनाना उचित नहीं है। मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस की भाषा उसकी निराशा, कुंठा और राजनीतिक गिरावट को दर्शाती है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व से अपने वक्तव्यों पर आत्ममंथन करने और राजनीतिक संवाद में गरिमा बनाए रखने की अपील की।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल के अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह अपने वक्तव्यों और आचरण से लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करे। सार्वजनिक मंचों से दिए जाने वाले बयानों का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। ऐसे में राजनीतिक नेतृत्व को अपने शब्दों के चयन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन उनके परिवार और उनके स्वर्गीय पिता को लेकर कथित अभद्र टिप्पणी करना स्वस्थ लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुरूप नहीं है। वैचारिक असहमति को व्यक्तिगत अपमान में बदलना राजनीतिक विमर्श के स्तर को कमजोर करता है।
मंत्री शर्मा ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक विरोध के दौरान उसकी भाषा और आचरण में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। उनके अनुसार, किसी भी राजनीतिक दल की पहचान केवल उसकी नीतियों और कार्यक्रमों से नहीं, बल्कि उसके नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक संवाद से भी होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व प्रधानमंत्री के विरोध में मर्यादाओं का उल्लंघन कर रहा है। शर्मा ने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन आलोचना तथ्यों, नीतियों और जनहित से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित होनी चाहिए। व्यक्तिगत टिप्पणियों से न तो जनता की समस्याओं का समाधान होता है और न ही राजनीतिक संवाद की गुणवत्ता बेहतर होती है।
ए.के. शर्मा ने भारतीय संस्कृति और संस्कारों का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता, बुजुर्गों और पूजनीय व्यक्तियों का सम्मान हमारी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। राजनीतिक मतभेद कितने भी गहरे क्यों न हों, उन्हें सामाजिक और सांस्कृतिक मर्यादाओं से ऊपर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में सम्मानजनक व्यवहार और संयमित भाषा को विशेष महत्व दिया जाता है। सार्वजनिक जीवन में सक्रिय लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने आचरण के माध्यम से इन मूल्यों का उदाहरण प्रस्तुत करें। मंत्री के मुताबिक, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को व्यक्तिगत कटुता में बदलने के बजाय संवाद, विचार और जनसेवा के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
मंत्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल में देश की सेवा, जनकल्याण और विकास को प्राथमिकता देने का संकल्प व्यक्त किया है। उन्होंने दावा किया कि विरोधियों की आलोचनाओं के बावजूद प्रधानमंत्री अपने उद्देश्यों की दिशा में आगे बढ़ते रहे हैं। शर्मा ने कहा कि राजनीतिक विरोध और कटु टिप्पणियां विकास के प्रति प्रतिबद्धता को कमजोर नहीं कर सकतीं। उनके अनुसार, देश की जनता विकास, सुशासन और जनकल्याण से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों का आकलन करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि नकारात्मक बयानबाजी के बजाय सकारात्मक कार्यों और जनहित की योजनाओं पर केंद्रित राजनीति को जनता अधिक महत्व देगी।
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र की मजबूती उसकी विविधता, विचारों की स्वतंत्रता और असहमति को स्वीकार करने की क्षमता में निहित है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष को सरकार से सवाल पूछने, नीतियों की आलोचना करने और वैकल्पिक विचार प्रस्तुत करने का पूरा अधिकार है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन अधिकारों का इस्तेमाल करते समय भाषा की मर्यादा और सार्वजनिक जीवन की गरिमा बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। शर्मा के अनुसार, संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक परंपरा को मजबूत करता है, जबकि व्यक्तिगत अपमान और अभद्र भाषा राजनीतिक बहस को अनावश्यक रूप से विवादास्पद बना देती है।
ए.के. शर्मा ने कांग्रेस नेतृत्व से अपने वक्तव्यों और राजनीतिक रणनीति पर गंभीरता से विचार करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश की जनता राजनीतिक दलों से विकास, सुशासन, रोजगार, जनकल्याण और आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान पर स्पष्ट दृष्टिकोण की अपेक्षा करती है। ऐसे समय में नेताओं को व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर जनहित के मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिए। मंत्री ने कहा कि राजनीतिक दलों की विश्वसनीयता उनके व्यवहार, नीतियों और जनता के प्रति जवाबदेही से बनती है। इसलिए सभी दलों को सार्वजनिक संवाद में संयम और शालीनता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
मंत्री शर्मा ने दोहराया कि राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत कटुता में बदलना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विचारों का संघर्ष होना चाहिए, लेकिन यह संघर्ष नीतियों, कार्यक्रमों और विकास के दृष्टिकोण तक सीमित रहना चाहिए। उनके मुताबिक, भारतीय समाज सम्मान, सद्भाव और मर्यादित संवाद को महत्व देता है। राजनीतिक नेतृत्व की जिम्मेदारी है कि वह इन मूल्यों को बनाए रखे और समाज के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करे। उन्होंने कांग्रेस से अभद्र भाषा के बजाय रचनात्मक राजनीति अपनाने की अपील करते हुए कहा कि देश की प्रगति और जनता का कल्याण ही राजनीतिक गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
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Updated on:
26 Oct 2026, 1:38 PM IST
Published on:
26 Oct 2026, 1:37 PM IST
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