लखनऊ

इस राज्यमंत्री ने किया खुलासा, कहा इसलिए मायावती को दलित चौपाल की याद आ गई है

इसके विपरीत आज जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलितों के घर जा रहे हैं, तो उन्हें पीड़ा हो रही है।

2 min read
May 04, 2018
Mayawati

लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती द्वारा दलित बाहुल्य गांवों में चौपाल लगाए जाने के ऐलान के बाद सियासी गलियारी में हड़कंप मच गया है। आज दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री एवं अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास के चेयरमैन डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने मायावती पर हमला बोला है और बताया है कि आखिर क्यों बसपा सुप्रीमो चौपाल लगाने जा रही है।

इसलिए मायावती को दलित चौपाल की याद आ गई है-

आज वीवीआईपी गेस्ट हाऊस लखनऊ में प्रेसवार्ता करते हुए डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कहा कि दलितों के पक्ष में चल रही केंद्रीय एवं राज्य सरकार की योजनाओं से विचलित होकर बसपा सुप्रीमो मायावती को दलित चौपाल की याद आ गई है। क्योंकि सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के सहारे दलित उद्यम और व्यवसाय से जुड़ने जा रहे हैं।

मायावती का यह कदम सबसे बड़ा दलित विरोधी कदम था-

डा. निर्मल ने कहा कि मायावती देश की राजनीति में सबसे बड़े जातिवादी चेहरे के रूप में स्थापित हैं, जो पहले ही कह चुकी हैं कि उनका उत्तराधिकारी उनकी अपनी ही जाति से होगा। बसपा सुप्रीमो मायावती को छद्म आम्बेडकरवादी बताते हुए डा. निर्मल ने कहा है कि मायावती ने उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जाति, अत्याचार उत्पीड़न निवारण अधिनियम को निष्प्रभावी किया, जो सबसे बड़ा दलित विरोधी कदम था।

उन्होंने आगे कहा कि मायावती ने प्रोन्नति में आरक्षण समाप्त करने की जमीन तैयार की। मायावती ने एम नागराज के केस में वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट में निर्देशित किया था कि प्रोन्नति में आरक्षण और परिणामी ज्येष्ठता के नियम बनाने के पूर्व प्रतिनिधित्व की अपर्याप्तता पिछड़ापन और दक्षता के आंकड़े एकत्र कर राज्य सरकारों को संतुष्ट होना होगा कि इनका प्रतिनिधित्व पूर्ण नहीं है, पिछड़ापन बना हुआ है। तथा दक्षता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है। इस रिपोर्ट के पश्चात ही राज्य सरकारें परिणामी ज्येष्ठता और प्रोन्नति में आरक्षण का नियम बना सकती हैं, किन्तु वर्ष 2007 में त्रितीय संशोधन ज्येष्ठता नियमावली बनाते समय मायावती सरकार ने एम. नागराज केस में दिए गए निर्देशों की अवहेलना की और कोई आंकड़े एकत्र नहीं किए, जिसके कारण उत्तर प्रदेश में प्रोन्नति में आरक्षण और ज्येष्ठता नियमावली का नियम न्यायालय ने समाप्त कर दिया।

मायावती आजतक किसी भी दलित के घर नहीं गईं-

डॉ. निर्मल ने कहा है कि मायावती के पास आज तक कोई दलित एजेंडा नहीं है। न तो उनके पास दलितों के आर्थिक विकास का कोई कार्यक्रम है। आज जब स्टैंडअप इंडिया योजना के तहत दलित उद्यम लगाने में सक्षम हो रहा है और राज्य सरकार की दीनदयाल उपाध्याय रोजगार योजना के तहत दलित व्यवसाई बन रहा है, तो विचलित होकर वे दलित चौपाल की बात कर रही हैं। जबकि हकीकत ये है कि मायावती आजतक किसी भी दलित के घर नहीं गईं। इसके विपरीत आज जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दलितों के घर जा रहे हैं, तो उन्हें पीड़ा हो रही है। डा. निर्मल ने कहा कि वह स्वंय दलितों के बीच जाकर संवाद करेंगे और उन्हें बताएंगे कि मायावती के पास दलितों के विकास के लिए आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए कोई कार्ययोजना नहीं है और मायावती डॉ. आम्बेडकर के मिशन की मुखर विरोधी हैं।

Published on:
04 May 2018 07:55 pm
Also Read
View All