
UP Tourism Business:उत्तर प्रदेश में पर्यटन अब केवल धार्मिक स्थलों पर बढ़ती भीड़ और होटल कारोबार तक सीमित नहीं रह गया है। पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही का असर रेस्टोरेंट, कैफे, होटल, वाहन किराये और पर्यटन से जुड़ी दूसरी सेवाओं पर भी दिखाई देने लगा है। प्रदेश सरकार अब पर्यटन से पैदा होने वाली आर्थिक गतिविधियों का व्यापक आकलन करने की तैयारी में है। इसके लिए वस्तु एवं सेवा कर (GST) के तहत दर्ज 51 सर्विस कैटेगरी के आंकड़ों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन श्रेणियों के जरिए यह समझने की कोशिश की जा रही है कि पर्यटन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था के अलग-अलग क्षेत्रों में कितना कारोबार और आर्थिक गतिविधि पैदा हो रही है।
मंगलवार को पर्यटन भवन में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में पर्यटन के आर्थिक प्रभाव को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी और अपर मुख्य सचिव पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग अमृत अभिजात भी मौजूद रहे। डेलॉयट टीम की ओर से प्रस्तुत विश्लेषण में पर्यटन से जुड़े कारोबार और पर्यटकों की गतिविधियों के बीच संबंधों का अध्ययन किया गया। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि पर्यटन को केवल पर्यटकों की संख्या के आधार पर नहीं, बल्कि उससे पैदा होने वाले कारोबार, निवेश, रोजगार और स्थानीय आर्थिक अवसरों के आधार पर भी देखा जाना चाहिए।
बैठक में बताया गया कि पर्यटन से सीधे और अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी 51 सर्विस अकाउंटिंग कोड कैटेगरी को विश्लेषण का आधार बनाया गया है। इनमें आवास, फूड सर्विस, वाहन किराये समेत कई ऐसी सेवाएं शामिल हैं, जिनका संबंध पर्यटकों की आवाजाही से है। वर्ष 2025-26 के दौरान इन क्षेत्रों में दर्ज कारोबार का अध्ययन किया गया। हालांकि इन आंकड़ों में स्थानीय ग्राहकों से होने वाली बिक्री भी शामिल रहती है, इसलिए इन्हें पर्यटन से होने वाला प्रत्यक्ष कारोबार मानने के बजाय पर्यटन गतिविधियों के व्यापक आर्थिक प्रभाव के संकेतक के रूप में देखा जा रहा है।
इस समीक्षा में रेस्टोरेंट और कैफे सबसे बड़ा कारोबार वर्ग बनकर सामने आया है। पर्यटन स्थलों पर बढ़ती आवाजाही के साथ खानपान से जुड़े कारोबार में भी गतिविधियां बढ़ी हैं। सरकार का मानना है कि पर्यटकों के खर्च का प्रभाव केवल होटल तक सीमित नहीं रहता, बल्कि भोजन, स्थानीय परिवहन, खरीदारी और अन्य सेवाओं तक पहुंचता है। इसी वजह से GST की विभिन्न श्रेणियों को एक साथ जोड़कर पर्यटन अर्थव्यवस्था की तस्वीर तैयार करने की कोशिश की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में पर्यटन की बढ़ती गतिविधियों के बीच होटल और अन्य आवासीय सुविधाओं के विस्तार की रफ्तार भी तेज हुई है। होटल बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के आंकड़े इसकी तस्वीर सामने रखते हैं। वर्ष 2023-24 में जहां 205 होटल बिल्डिंग प्लान स्वीकृत हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 299 और 2025-26 में 421 हो गई। यानी तीन वर्षों में होटल निर्माण से जुड़ी गतिविधियों में लगातार वृद्धि दर्ज हुई है।
वहीं वर्ष 2023 से 7 सितंबर 2026 तक होटल, बजट आवास, रिसॉर्ट और अन्य पर्यटन कारोबार से जुड़े करीब ₹44,240 करोड़ के निवेश प्रस्ताव सामने आए हैं। सरकार की नजर अब इस बात पर भी है कि इन निवेशों का वास्तविक जमीन पर कितना असर पड़ रहा है और नए होटल तथा पर्यटन सुविधाएं बढ़ती पर्यटक संख्या की जरूरतों को किस हद तक पूरा कर पा रही हैं।
बैठक में पर्यटन स्थलों के आकलन को जिला स्तर तक व्यापक बनाने पर भी जोर दिया गया। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने कहा कि किसी जिले की पर्यटन तस्वीर केवल एक प्रमुख धार्मिक स्थल के आंकड़ों से पूरी तरह सामने नहीं आ सकती। इसके लिए धार्मिक, प्राकृतिक और अन्य आकर्षणों को भी आकलन में शामिल करना जरूरी है।
अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि प्रत्येक जिले में अलग-अलग तरह के पर्यटक आकर्षण वाले कम से कम चार स्थलों को आकलन में शामिल किया जाए। कैमरों की कवरेज बढ़ाने और पर्यटकों की आवाजाही का अधिक सटीक डेटा जुटाने पर भी जोर दिया गया। मिर्जापुर के विंध्याचल क्षेत्र में विंढम फॉल्स, नैमिषारण्य क्षेत्र में ललिता देवी मंदिर और दधीचि कुंड जैसे स्थलों को इस व्यापक आकलन में शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इससे धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक और विरासत पर्यटन की वास्तविक स्थिति भी सामने आ सकेगी।
जनवरी से जून 2026 के आंकड़ों की समीक्षा में विदेशी पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से आगरा और लखनऊ प्रमुख गंतव्यों के रूप में सामने आए। बैठक में अधिकारियों से यह अध्ययन करने को कहा गया कि पर्यटकों की आवाजाही के पीछे कौन से प्रमुख कारक हैं और सड़क तथा हाईवे कनेक्टिविटी में सुधार का पर्यटन पर किस तरह असर पड़ रहा है। अवनीश कुमार अवस्थी ने सभी जिलों में सड़क और हाईवे कनेक्टिविटी में हुए सुधार को भी पर्यटन आकलन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि बेहतर परिवहन संपर्क नए पर्यटन स्थलों को पर्यटकों के लिए कितना सुलभ बना रहा है।
बैठक में बाबा नीब करौरी सर्किट और कालिंजर किले को पर्यटन मानचित्र पर और मजबूती से स्थापित करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों का मानना है कि इन स्थलों के प्रचार में केवल स्थान की जानकारी देने के बजाय उनसे जुड़ी स्थानीय कहानियों, इतिहास और सांस्कृतिक महत्व को भी सामने लाना जरूरी है। कालिंजर जैसे ऐतिहासिक स्थल और बाबा नीब करौरी से जुड़े धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल आसपास के लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों से जोड़े जा सकते हैं। इसके लिए स्पष्ट रूट मैप,बेहतर सूचना व्यवस्था और प्रचार सामग्री विकसित करने पर जोर दिया गया। चित्रकूट को लेकर भी पर्यटकों के लिए सुविधाओं में सुधार और धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक स्थलों को जोड़कर व्यापक पर्यटन अनुभव तैयार करने पर चर्चा हुई।
पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों की वास्तविक संख्या और आवाजाही का वैज्ञानिक डेटा जुटाने के लिए AI आधारित विजिटर काउंटिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी है। बैठक में इस सिस्टम में हो रही देरी पर पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को इसे 15 नवंबर तक लागू करने के निर्देश दिए। इसके बाद दिसंबर से पर्यटकों की गिनती शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने विशेष रूप से नाइट विजन कैमरों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए, ताकि दिन के साथ रात में होने वाली पर्यटकों की आवाजाही का भी सटीक आकलन किया जा सके। अधिकारियों ने बैठक में बताया कि यूनिक विजिटर की गिनती के लिए जरूरी मानक तय करने का फ्रेमवर्क और खरीद से संबंधित दस्तावेज तैयार कर लिया गया है।
अयोध्या में पर्यटन की बढ़ती गतिविधियां इस पूरी रणनीति का सबसे प्रमुख हिस्सा हैं। मार्च से जून 2026 के गर्मी की छुट्टियों वाले महीनों में अयोध्या में पर्यटकों की आवाजाही पिछले चार वर्षों की समान अवधि की तुलना में करीब 535 प्रतिशत बढ़ी है। बैठक में इस बढ़ोतरी के आर्थिक प्रभाव को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश कुमार अवस्थी ने अधिकारियों से कहा कि अयोध्या में बढ़ती पर्यटक संख्या का असर स्थानीय कारोबार, रोजगार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर किस रूप में पड़ रहा है, इसका भी अध्ययन किया जाए। पर्यटन के बढ़ते दबाव के साथ शहर में ठहरने, खाने-पीने और अन्य सेवाओं की मांग में होने वाले बदलाव को समझना भी जरूरी है।
दीपोत्सव 2026 को अयोध्या की बढ़ती पर्यटन अर्थव्यवस्था को नए रूप में सामने लाने के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक में नए आकर्षण, बेहतर हॉस्पिटैलिटी और सांस्कृतिक भागीदारी को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। अधिकारियों को ऐसे नए कार्यक्रम और आकर्षण तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिनसे पर्यटकों का अनुभव व्यापक हो और स्थानीय कारोबार को भी लाभ मिले।
दीपोत्सव के दौरान उद्घाटन के लिए तैयार नए होटलों की पहचान कर उन्हें इसी आयोजन के दौरान शुरू कराने पर भी चर्चा हुई। इससे बढ़ती पर्यटक संख्या के अनुरूप शहर में ठहरने की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि दीपोत्सव के आकर्षणों में लाइव एक्रोबैटिक प्रस्तुतियां भी शामिल करने की योजना है।
अयोध्या में उपलब्ध पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों के बेहतर उपयोग पर भी बैठक में सुझाव दिए गए। अवनीश कुमार अवस्थी ने भजन संध्या स्थल का अधिक प्रभावी उपयोग करने के लिए वहां रामलीला के आयोजन का सुझाव दिया। इससे स्थल का नियमित सांस्कृतिक उपयोग बढ़ाने के साथ युवाओं को अयोध्या की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का अवसर मिल सकता है।
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि दीपोत्सव के नए आकर्षण केवल आयोजन तक सीमित न रहें, बल्कि अयोध्या की हॉस्पिटैलिटी, स्थानीय कारोबार और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी स्थायी अवसर पैदा करें। पर्यटन विभाग अब पर्यटकों की संख्या, GST आधारित कारोबार, होटल निवेश, कनेक्टिविटी और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को एक साथ जोड़कर प्रदेश की पर्यटन अर्थव्यवस्था की व्यापक तस्वीर तैयार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।