लखनऊ

Tourism : काशी-सारनाथ की विरासत से रूबरू होंगी महिला उद्यमी, यूपी पर्यटन को मिलेंगे नए बाजार और अवसर

UP Tourism :  उत्तर प्रदेश पर्यटन 7 से 9 अक्टूबर तक महिला उद्यमियों और डिजिटल क्रिएटर्स को काशी-सारनाथ की यात्रा कराएगा। ‘विजिट माई स्टेट’ से पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ा जाएगा।
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Oct 06, 2026
Ganga Aarti, Varanasi (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )
Ganga Aarti, Varanasi (फोटो सोर्स :file photo, Ritesh Singh )

UP Tourism Women Entrepreneurs: उत्तर प्रदेश पर्यटन अब प्रदेश के पर्यटन स्थलों की कहानी को नए अंदाज में दुनिया और देश के सामने पहुंचाने की तैयारी में है। इसी पहल के तहत करीब 50 महिला उद्यमी, निवेशक और डिजिटल क्रिएटर 7 से 9 अक्टूबर तक लखनऊ से वाराणसी और सारनाथ की तीन दिवसीय यात्रा पर निकलेंगी। ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान के तहत आयोजित इस परिचयात्मक यात्रा का उद्देश्य महिलाओं को केवल पर्यटक के रूप में नहीं, बल्कि प्रदेश के पर्यटन स्थलों की नई कहानी गढ़ने वाली ‘डेस्टिनेशन स्टोरीटेलर’ के रूप में जोड़ना है।

पर्यटन को स्थानीय आजीविका से जोड़ने की पहल

उत्तर प्रदेश पर्यटन की ओर से एफआईसीसीआई एफएलओ के समन्वय में आयोजित यह यात्रा प्रदेश की संस्कृति, खान-पान, हस्तशिल्प, आध्यात्मिक विरासत और ऐतिहासिक स्थलों को करीब से समझने का अवसर देगी। यात्रा में फैशन, सतत डिजाइन, हॉस्पिटैलिटी, ट्रैवल, शिक्षा, वेलनेस और डिजिटल कम्युनिकेशन से जुड़ी महिलाएं शामिल होंगी। इस पहल के पीछे पर्यटन को केवल स्मारकों और दर्शनीय स्थलों तक सीमित रखने के बजाय उसे स्थानीय लोगों की आजीविका से जोड़ने की सोच है। प्रतिभागियों को अपने अनुभवों के जरिए नए ट्रैवल नैरेटिव तैयार करने और उन्हें अपने व्यावसायिक नेटवर्क व डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। इससे प्रदेश के पर्यटन स्थलों को नए दर्शक वर्ग तक पहुंचाने के साथ स्थानीय उद्यमों के लिए बाजार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद है।

काशी की गलियों से गंगा की धारा तक

तीन दिवसीय यात्रा की शुरुआत और समापन लखनऊ में होगा। इसके दौरान प्रतिभागी वाराणसी के नदी तट, मंदिरों, खान-पान की परंपराओं और हस्तकरघा समूहों से रूबरू होंगी। यात्रा में काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा आरती, सूर्योदय के समय क्रूज, रामनगर किला और स्थानीय व्यंजनों का अनुभव शामिल रहेगा। वाराणसी को उसकी जीवंत विरासत के साथ समझने पर विशेष जोर दिया जाएगा। यहां आध्यात्मिकता के साथ गंगा, भोजन, संगीत, बुनकरी और सदियों पुरानी परंपराएं मिलकर शहर की पहचान बनाती हैं। पर्यटन विभाग का प्रयास है कि पर्यटक केवल किसी एक स्मारक तक सीमित न रहें, बल्कि शहर के जीवन, परंपराओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था से भी जुड़ें।

बनारसी साड़ी के पीछे की पूरी कहानी

यात्रा का एक प्रमुख आकर्षण बनारसी हैंडलूम और साड़ी उद्योग से जुड़ा संवाद होगा। महिला प्रतिभागियों को बुनकरों, हैंडलूम उद्यमियों और व्यापारियों से मिलने का अवसर मिलेगा। इस दौरान वे यह समझेंगी कि एक बनारसी साड़ी तैयार होने के पीछे डिजाइन, रंगाई, बुनाई, जरी के काम, फिनिशिंग और बिक्री तक कितनी लंबी प्रक्रिया और कितने लोगों की मेहनत शामिल होती है। बनारसी साड़ी को पारंपरिक परिधान से आगे आधुनिक जीवनशैली, कॉरपोरेट और औपचारिक पहनावे में नई जगह दिलाने पर भी चर्चा होगी। फैशन, डिजाइन, सतत विकास और रिटेल से जुड़ी प्रतिभागी ‘साड़ी बैक इन फैशन’ पहल के तहत स्टाइलिंग, लुकबुक, सोर्सिंग कनेक्शन और डिजिटल कंटेंट की संभावनाओं को समझेंगी।

कारीगरों को सीधे मिलेगा बाजार से जुड़ने का अवसर

इस संवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को उन महिलाओं से सीधे जुड़ने का अवसर मिलेगा, जो उपभोक्ता पसंद, डिजाइन और कारोबारी नेटवर्क को प्रभावित करती हैं। इससे बनारसी बुनकरी के लिए नए बाजार और ग्राहकों तक पहुंच बनाने की संभावना बढ़ेगी। पर्यटन विभाग का मानना है कि जब पर्यटक किसी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके पीछे की कहानी, कारीगर की मेहनत और पारंपरिक ज्ञान को समझता है तो उस उत्पाद से उसका जुड़ाव भी मजबूत होता है। यही कारण है कि इस यात्रा में विरासत को देखने के साथ उसे बनाने और संजोने वाले लोगों से संवाद को भी महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

Ganga, Varanasi (file photo)

सारनाथ में दिखेगी बौद्ध विरासत

तीन दिवसीय यात्रा का समापन सारनाथ में होगा। यहां प्रतिभागी धामेक स्तूप, चौखंडी स्तूप, मूलगंध कुटी विहार और पुरातत्व संग्रहालय का भ्रमण करेंगी। सारनाथ बौद्ध इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखता है और उत्तर प्रदेश के व्यापक बौद्ध पर्यटन सर्किट का प्रमुख हिस्सा है। जुलाई 2026 में सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल के रूप में सूचीबद्ध किए जाने के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय पर्यटन संभावनाओं को भी नई पहचान मिली है। यात्रा के दौरान प्रतिभागियों को सारनाथ की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे इसे अपने नेटवर्क और डिजिटल माध्यमों के जरिए नए दर्शकों तक पहुंचा सकें।

पर्यटन मंत्री बोले, स्थानीय लोगों तक पहुंचे पर्यटन का लाभ

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश पर्यटन ऐसी यात्राओं और अनुभवों को विकसित कर रहा है, जो पर्यटकों को हर गंतव्य के पीछे मौजूद लोगों और परंपराओं से जोड़ते हैं। ‘विजिट माई स्टेट’ के जरिए पर्यटन से मिलने वाली दृश्यता को लंबे प्रवास, मजबूत बाजार और बुनकरों, कारीगरों, गाइड, नाविकों, खान-पान से जुड़े कारोबारियों तथा युवा पर्यटन पेशेवरों के लिए अधिक अवसरों में बदलने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि किसी भी पर्यटन स्थल की पहचान केवल उसके स्मारकों से नहीं बनती, बल्कि वहां के लोग, उनकी कला, संस्कृति, खान-पान और जीवनशैली उसे अलग पहचान देते हैं। इसलिए पर्यटन के विकास के साथ स्थानीय आजीविका को मजबूत करना भी जरूरी है।

अनुभव से बनेगी पर्यटन की नई कहानी

पर्यटन, संस्कृति एवं धार्मिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने कहा कि किसी गंतव्य को प्रत्यक्ष अनुभव के जरिए समझना उसके बारे में अधिक विश्वसनीय और प्रभावी तरीके से बताने में मदद करता है। उन्होंने कहा कि खान-पान, हस्तशिल्प, आध्यात्मिक विरासत और बौद्ध पर्यटन को एक ही यात्रा में जोड़ने से पर्यटकों को उत्तर प्रदेश को गहराई से समझने का अवसर मिलेगा।

तीन दिवसीय यह यात्रा 9 अक्टूबर को समाप्त होगी, लेकिन पर्यटन विभाग की योजना इसके परिणामों को आगे भी जारी रखने की है। प्रतिभागी अपने पेशेवर नेटवर्क, उपभोक्ता समुदायों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए उत्तर प्रदेश की पर्यटन कहानियों को आगे बढ़ाएंगी। साथ ही स्थानीय कारीगरों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के साथ नए कारोबारी और रचनात्मक संबंध विकसित करने की दिशा में भी काम होगा। इस तरह ‘विजिट माई स्टेट’ अभियान पर्यटन प्रचार से आगे बढ़कर संस्कृति, उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को एक साथ जोड़ने की कोशिश के रूप में सामने आ रहा है। महिला उद्यमियों और डिजिटल क्रिएटर्स की भागीदारी से काशी और सारनाथ की पहचान नए अंदाज में देश-दुनिया तक पहुंचाने की उम्मीद है।