UP Vidhan Sabha: यूपी विधानसभा में रमजान के दौरान मस्जिदों में लाउडस्पीकर के इस्तेमाल को लेकर जोरदार बहस हुई। भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर और सपा विधायक कमाल अख्तर के बयानों से प्रदेश की राजनीति गरमा गई।
UP Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश विधानसभा में रमजान के महीने में मस्जिदों पर लाउडस्पीकर के उपयोग का मुद्दा गरमा गया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ विधायक कमाल अख्तर ने सदन में कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है, जहां सभी धर्मों के त्योहार पूरे सम्मान के साथ मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के दौरान रोजेदार सेहरी और इफ्तार के समय की जानकारी के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करते हैं, इसलिए सरकार को इस विषय में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को त्योहारों के समय राजनीति नहीं बल्कि व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए, ताकि लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सभी त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हों।
भाजपा विधायक नंद किशोर गुर्जर ने इस मांग पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि देश में कानून और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश सर्वोपरि हैं और सभी को उनका पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक परंपराओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन नियमों को तोड़ने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती। मोहम्मद साहब का हवाला भी दिया और सख्त चेतावनी दी की अगर कोई नियम तोड़ेगा तो, कार्रवाई ऐसी होगी जो पीढ़ियां याद करेंगी। इस प्रकार का नियम तोड़ना भूल जाएंगे।
अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में मस्जिदों, मंदिरों, गुरुद्वारों और अन्य धार्मिक स्थलों पर निर्धारित मानकों के अनुसार ही लाउडस्पीकर लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि किसी विशेष धर्म को रोका जा रहा है। सरकार का उद्देश्य केवल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का पालन कराना है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
मंत्री नरेंद्र कश्यप ने जबाब देत हुए कहा कि मस्जिद, मंदिर या किसी भी धर्मस्थल पर लाउडस्पीकर लगे हुए हैं और उनका उपयोग भी हो रहा है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार उनकी आवाज तय सीमा के अंदर ही रखनी अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि जब पहले से नियम लागू हैं और उसी के अनुसार व्यवस्था चल रही है, तो इस संबंध में नई मांग करने की कोई जरूरत नहीं है।
समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान ने कहा कि देश की ताकत आपसी भाईचारा और सम्मान में है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के लोगों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब अन्य धार्मिक आयोजनों में प्रशासन सहयोग करता है, तो रमजान के दौरान भी सहयोग की भावना होनी चाहिए। उनका कहना था कि समाज में शांति और सद्भाव बनाए रखना सबसे ज्यादा जरूरी है।
इस मुद्दे के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर विपक्ष सरकार से लचीलापन दिखाने की मांग कर रहा है, वहीं सत्तापक्ष कानून और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन जरूरी बता रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धार्मिक और सामाजिक मुद्दों पर होने वाली इस तरह की बहस का असर आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ सकता है।
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