लखनऊ

अभी नहीं मिलेगा यूपी को स्थायी DGP, यूपीएससी ने प्रस्ताव ठुकराया, कहा- दोबारा भेजे

UPSC Rejects UP DGP Proposal : संघ लोक सेवा आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भेजा गया डीजीपी नियुक्ति का प्रस्ताव वापस कर दिया।

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Mar 20, 2026
यूपीएससी ने यूपी सरकार के प्रस्ताव को ठुकराया, PC- Patrika

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्थायी डीजीपी की नियुक्ति प्रक्रिया एक बार फिर अधर में लटक गई है। राज्य सरकार ने हाल ही में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक सूची यूपीएससी को भेजी थी, ताकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक पूर्णकालिक पुलिस प्रमुख की नियुक्ति की जा सके। हालांकि, यूपीएससी ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस कर दिया है।

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UPSC ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

2025 की नई गाइडलाइंस: आयोग ने कहा है कि राज्य सरकार का प्रस्ताव वर्ष 2025 में जारी किए गए नए सर्कुलर और दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं है।

आयोग ने मांगा पूरा ब्योरा : आयोग ने अधिकारियों की डीजी (DG) पद पर हुई प्रोन्नति (Promotion) और उनकी सेवा के अनुभवों का पूरा ब्यौरा फिर से मांगा है।

इन बड़े नामों पर टिकी थी नजर

राज्य सरकार ने जो पैनल भेजा था, उसमें 1990 से 1996 बैच के अधिकारियों के नाम शामिल थे। इनमें प्रमुख नाम थे:

राजीव कृष्ण (1991 बैच): वर्तमान में उत्तर प्रदेश के कार्यवाहक डीजीपी।
रेणुका मिश्रा (1990 बैच): वरिष्ठता सूची में सबसे ऊपर।
आलोक शर्मा (1991 बैच): वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति (SPG चीफ) पर।
पीयूष आनंद (1991 बैच): वर्तमान में NDRF के प्रमुख।

4 साल से 'कार्यवाहक' के भरोसे यूपी पुलिस

मई 2022 में मुकुल गोयल को पद से हटाए जाने के बाद से उत्तर प्रदेश में कोई स्थायी डीजीपी नहीं रहा है। तब से अब तक 5 कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किए जा चुके हैं: इनमें डॉ. डी.एस. चौहान, आर.के. विश्वकर्मा, विजय कुमार, प्रशांत कुमार, राजीव कृष्ण (वर्तमान) शामिल हैं।

जानें क्या कहते हैं नियम

सुप्रीम कोर्ट के 'प्रकाश सिंह' मामले के फैसले के अनुसार, राज्य को स्थायी डीजीपी की नियुक्ति के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का पैनल यूपीएससी को भेजना होता है। आयोग इनमें से तीन सबसे उपयुक्त नामों को छांटकर राज्य को वापस भेजता है, जिनमें से किसी एक को सरकार डीजीपी चुनती है। नियम यह भी है कि चुने गए अधिकारी के पास कम से कम 6 महीने का सेवाकाल बचा होना चाहिए।

जून तक सरकार कर सकती है इंतजार

यूपीएससी द्वारा प्रस्ताव लौटाए जाने के बाद अब गृह विभाग को नए सिरे से डेटा तैयार करना होगा। जानकारों का मानना है कि इस प्रक्रिया में कुछ हफ्तों का समय लग सकता है। संभावना यह भी जताई जा रही है कि सरकार जून 2026 तक का इंतजार कर सकती है, जब कुछ वरिष्ठ अधिकारियों के रिटायरमेंट के बाद मौजूदा कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम वरीयता सूची में और ऊपर आ जाएगा।

Updated on:
20 Mar 2026 09:18 pm
Published on:
20 Mar 2026 09:16 pm
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