वंशावली को डिजिटल उपलब्ध कराने के लिए कुलवृक्ष कंपनी ने वेबसाइट व मोबाइल एप तैयार किया है। बेवसाइट पर वंशावलियों को अपडोल करने का कार्य किया जा रहा है। वेबसाइट बनने के बाद कुछ पुरोहितों ने वंशावली को साइट पर अपलोड भी किया है अन्य वंशावली को अपलोड करने का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा जिसके बाद लोग आसानी से कंपनी की वेबसाइट www.kulvriksh.org पर व कंपनी के मोबाइल एप पर जाकर वंशावली देख सकेंगे।
लखनऊ. पूर्वजों व वंश के बारे में जानकारी लेने के लिए वंशावली पढ़ने के लिए प्रयागराज जाने की जरूरत नहीं है। अब वंशावली ऑनलाइन उपलब्ध होगी, जहां आप अपने पूर्रवजों के बारे में जानकारी जुटा सकेंगे। वंशावाली को डिजिटल करने का कार्य शुरू कर दिया गया है। वंशावली के डिजिटल होने के बाद जहां लोगों को आसानी से लैपटॉप व मोबाइल एप पर वंशावली की जानकारी उपलब्ध होगी वहीं तीर्थ स्थानों के पुरोहितों को मोटी-मोटी पोथियों से छुटकारा मिल जाएगा।
वंशावली को डिजिटल उपलब्ध कराने के लिए कुलवृक्ष कंपनी ने वेबसाइट व मोबाइल एप तैयार किया है। बेवसाइट पर वंशावलियों को अपडोल करने का कार्य किया जा रहा है। वेबसाइट बनने के बाद कुछ पुरोहितों ने वंशावली को साइट पर अपलोड भी किया है अन्य वंशावली को अपलोड करने का कार्य जल्द पूरा किया जाएगा जिसके बाद लोग आसानी से कंपनी की वेबसाइट www.kulvriksh.org पर व कंपनी के मोबाइल एप पर जाकर वंशावली देख सकेंगे।
सामान्यता लोगों को अपनी दो पीढ़ियों से अधिक की जानकारी नहीं होती है। पराम्परिक व्यवस्था के तहत प्रयागराज आने वाले यजमानों की वंशावली पुरोहितों के पास मोजूद रहती है। पोथियों पर पुरोहित यजमान के वंश के बारे में जानकारी लिखकर रखते हैं जो कई पीढ़ियों की होती हैं। अभी तक किसी के वंश के बारे में जानकारी जुटाने के लिए प्रयागराज में पुरोहित को खोजना पड़ता था। अब ऐसा