लखनऊ

उत्तर प्रदेश में कृषि श्रमिकों की मजदूरी बढ़ी, अब मिलेगी ₹6,552 मासिक

योगी सरकार ने कृषि मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी ₹252 प्रतिदिन या ₹6,552 मासिक तय की। यह फैसला लाखों श्रमिकों को आर्थिक मजबूती देगा।

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Jul 24, 2025
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित 'जनता दर्शन' कार्यक्रम में लगभग 200 लोगों की शिकायतें सुनीं। । PC: IANS

योगी सरकार ने कृषि मजदूरों के हित में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए न्यूनतम मजदूरी की दरों में व्यापक संशोधन किया है। अब राज्य के सभी जिलों में कृषि कार्यों से जुड़े वयस्क श्रमिकों को 252 रुपए प्रतिदिन या 6,552 रुपए प्रति माह न्यूनतम मजदूरी प्राप्त होगी। इस निर्णय से लाखों खेतिहर मजदूरों, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन जैसे कृषि आधारित उद्योगों से जुड़े लोगों को वित्तीय सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन का आधार मिलेगा।

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हर प्रकार की खेती पर लागू होंगी यह दरें

प्रमुख सचिव, श्रम एवं सेवायोजन विभाग डॉ. एमके. शनमुगा सुन्दरम ने बताया कि यह दरें राज्य के हर प्रकार की खेती पर लागू होंगी, चाहे वह परंपरागत कृषि हो, मशरूम उत्पादन हो या मंडी तक फसल पहुंचाने का श्रम। इसमें दुग्ध उत्पादन, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, कुक्कुट पालन और इनसे जुड़ी सभी सहायक गतिविधियां भी शामिल हैं।

अब ऐसे होगा मजदूरी का भुगतान

योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मजदूरी का भुगतान अब नकद, आंशिक नकद, कृषि उपज या डिजिटल माध्यमों से किया जा सकता है, लेकिन किसी भी स्थिति में मजदूरी की कुल राशि विहित दर से कम नहीं होनी चाहिए। इस कदम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा मिलेगा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सकेगी।

न्यूनतम मजदूरी की प्रति घंटे दर भी दैनिक मजदूरी के 1/6 भाग से कम नहीं हो सकेगी, जिससे अल्पकालिक श्रमिकों के हितों की भी रक्षा होगी। योगी सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी श्रमिक को पहले से इस दर से अधिक मजदूरी मिल रही है, तो वह जारी रहेगी और इसे ही न्यूनतम मानक माना जाएगा।

लाखों श्रमिकों को मिलेगा सीधा लाभ

योगी सरकार का यह फैसला सिर्फ मजदूरी तय करने का नहीं, बल्कि यह उत्तर प्रदेश की श्रमिक नीति में मूलभूत बदलाव का संकेत है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य कर रहे लाखों श्रमिकों को सीधा लाभ मिलेगा और कृषि कार्यों में श्रम की गुणवत्ता व निरंतरता सुनिश्चित होगी। यह निर्णय योगी सरकार की "सबका साथ, सबका विकास" नीति का एक और उदाहरण है, जिसमें खेतिहर मजदूरों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने की दिशा में ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि श्रमिकों के हितों की रक्षा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इससे पहले भी सरकार ने ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से असंगठित क्षेत्र के करोड़ों मजदूरों का पंजीकरण कर उन्हें सरकारी योजनाओं से जोड़ा था। न्यूनतम मजदूरी की यह नई अधिसूचना उसी श्रृंखला में एक और मजबूत कड़ी है।

Updated on:
24 Jul 2025 07:46 pm
Published on:
24 Jul 2025 07:45 pm
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