
जंगलों में आग रोकने को यूपी सरकार अलर्ट, 116 अग्नि नियंत्रण सेल सक्रिय (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )
UP Forest Fire Control : गर्मी के मौसम में जंगलों में आग लगने की घटनाओं को रोकने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद वन विभाग ने मुख्यालय से लेकर प्रभागीय स्तर तक अग्नि नियंत्रण तंत्र को सक्रिय कर दिया है। जंगलों में आग की घटनाओं पर तुरंत नियंत्रण पाने के लिए लखनऊ मुख्यालय में विशेष अग्नि नियंत्रण सेल बनाया गया है, जो 24 घंटे निगरानी करेगा।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश भर में मुख्यालय, जोन, वृत्त और प्रभागीय स्तर पर कुल 116 अग्नि नियंत्रण सेल स्थापित किए जा चुके हैं। इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से जंगलों में आग लगने की किसी भी घटना पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी और संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी जाएगी।
वन विभाग की ओर से बनाए गए अग्नि नियंत्रण सेल 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को तीन शिफ्टों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी समय आने वाली सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। तीन शिफ्टों का समय इस प्रकार निर्धारित किया गया है-
प्रत्येक शिफ्ट में अधिकारियों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। आग से जुड़ी हर सूचना को नियंत्रण कक्ष में दर्ज किया जाएगा और तुरंत संबंधित रेंज व प्रभागीय अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए जाएंगे। वन विभाग का कहना है कि इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जंगलों में आग लगने की घटनाओं को शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रित करना है ताकि बड़े नुकसान से बचा जा सके।
वन विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जंगलों में आग की छोटी से छोटी घटना को भी नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। प्रत्येक रेंज से आने वाली सूचनाओं को रजिस्टर में दर्ज किया जाएगा और उसके समाधान के लिए तत्काल कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी क्षेत्र में आग लगने की सूचना मिलती है तो स्थानीय वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचेगी और आग बुझाने की कार्रवाई करेगी। इसके साथ ही इसकी जानकारी मुख्यालय को भी भेजी जाएगी। इस व्यवस्था से जंगलों में आग फैलने से पहले ही उसे नियंत्रित करने में मदद मिलेगी।
वन विभाग ने जंगलों में आग लगने की घटनाओं की सूचना देने के लिए आम नागरिकों को भी शामिल किया है। इसके लिए लखनऊ मुख्यालय से हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर कोई भी व्यक्ति आग की सूचना दे सकता है।
जारी किए गए हेल्पलाइन नंबर इस प्रकार हैं-
यदि किसी नागरिक को जंगलों में आग लगने की जानकारी मिलती है तो वह इन नंबरों पर सूचना दे सकता है। संबंधित जिला अधिकारी और वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का काम करेगी। वन विभाग के अनुसार जल्द ही सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर भी हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि सूचना तेजी से पहुंच सके।
जंगलों में आग लगने की संभावित घटनाओं की जानकारी के लिए फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) देहरादून की वेबसाइट का भी उपयोग किया जा रहा है। इस वेबसाइट के माध्यम से वन विभाग को आग से संबंधित अलर्ट सूचना मिलती है। इस सुविधा के लिए प्रदेश के 3792 अधिकारी, कर्मचारी और आम नागरिक वेबसाइट पर पंजीकरण करा चुके हैं। इससे जैसे ही किसी क्षेत्र में आग लगने की संभावना या घटना की जानकारी मिलती है, तुरंत अलर्ट जारी हो जाता है। यह तकनीकी प्रणाली जंगलों में आग की घटनाओं पर निगरानी रखने में काफी मददगार साबित हो रही है।
उत्तर प्रदेश में वन अग्निकाल 15 जून तक माना जाता है। इस दौरान तापमान बढ़ने और सूखी घास तथा पत्तियों के कारण जंगलों में आग लगने की संभावना अधिक रहती है। पिछले वर्षों के अनुभवों के आधार पर वन विभाग ने इस बार पहले से ही तैयारी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि समय रहते निगरानी और नियंत्रण व्यवस्था मजबूत करने से आग की घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
पिछले वर्षों में हुई घटनाओं के आधार पर प्रदेश के कई वन क्षेत्रों को अतिसंवेदनशील और मध्य संवेदनशील श्रेणी में रखा गया है। इन क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रमुख संवेदनशील क्षेत्र इस प्रकार हैं-
इन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है और वन विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं।
वन विभाग ने आग से निपटने की तैयारी को परखने के लिए कई संवेदनशील क्षेत्रों में फॉरेस्ट फायर मॉक ड्रिल भी आयोजित की है। मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने के आधुनिक तरीकों और उपकरणों के उपयोग का प्रशिक्षण दिया गया। इससे वास्तविक स्थिति में तुरंत और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलेगी।
संवेदनशील जिलों में आग से बचाव और नियंत्रण के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों में वन विभाग, पुलिस, राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन के अधिकारी शामिल हैं। इन समितियों का उद्देश्य आग लगने की स्थिति में विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बनाकर तेजी से कार्रवाई करना है।
गर्मी के मौसम में जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों को पानी की समस्या न हो, इसके लिए भी वन विभाग ने विशेष व्यवस्था की है। वन क्षेत्रों में नए वाटर होल (जलाशय) बनाए जा रहे हैं और पुराने वाटर होल की मरम्मत कर उनमें नियमित रूप से पानी भरा जा रहा है। इससे वन्यजीवों को गर्मी के दौरान पीने के लिए पर्याप्त पानी मिल सकेगा।
वॉच टावर से रखी जा रही निगरानी
जंगलों में आग की घटनाओं पर नजर रखने के लिए कई स्थानों पर वॉच टावर बनाए गए हैं। पुराने टावरों की मरम्मत भी कराई जा रही है। इन टावरों से वन कर्मी दूर तक जंगलों की निगरानी कर सकते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि या आग की घटना की तुरंत सूचना दे सकते हैं।
मुख्य वन संरक्षक (प्रचार-प्रसार) अदिति शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार वन अग्नि नियंत्रण के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र में आग लगने की सूचना मिलते ही संबंधित प्रभागीय अधिकारी तुरंत कार्रवाई करेंगे और मुख्यालय को इसकी जानकारी देंगे। आम नागरिकों की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं।
Updated on:
14 Mar 2026 03:51 pm
Published on:
14 Mar 2026 03:50 pm
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