Western Disturbance: आगामी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से 18 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में छिटपुट बारिश के आसार हैं। अगले 2-3 दिनों में न्यूनतम तापमान 2-3 डिग्री सेल्सियस बढ़ सकता है। इस बीच Agra में अधिकतम तापमान 32.2°C तक पहुंच गया, जिससे फरवरी में गर्मी का असर दिखने लगा है।
Western Disturbance to Bring Light Rain in Western UP: उत्तर भारत में मौसम का मिज़ाज इन दिनों बदलते पैटर्न को दिखा रहा है। आगामी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बादलों की आवाजाही बढ़ने का पूर्वानुमान है, जिसके चलते 18 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में छिटपुट या हल्की वर्षा देखने को मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले 2–3 दिनों के दौरान प्रादेशिक न्यूनतम तापमान में 2–3°C की वृद्धि होने की संभावना है, जबकि अधिकतम तापमान में कोई उल्लेखनीय बदलाव नहीं रहेगा।
इसी बीच, आगरा में आज अधिकतम तापमान 32.2°C तक पहुंच गया, जो फरवरी के लिहाज से असामान्य ऊंचाई पर है। फरवरी के इतिहास में यह तापमान कुछ दशकों में दर्ज किए गए रिकॉर्ड से काफी नज़दीक है, हालांकि पुरा सर्वकालिक रिकॉर्ड 25 फरवरी 1897 को दर्ज 35.6°C का है। इस व्यापक मौसम परिदृश्य की तह तक जाने से पहले समझना जरूरी है कि पश्चिमी विक्षोभ क्या है और यह मौसम को कैसे प्रभावित करता है।
पश्चिमी विक्षोभ एक मौसमी वायु प्रवाह प्रणाली है, जो भूमध्य सागर से उत्तर भारत की ओर बढ़ती है। यह प्रणाली बारिश, बादलों की आवाजाही, तापमान में बदलाव और आर्द्रता जैसी मौसमी गतिविधियों को प्रभावित करती है। विशेषकर सर्दियों से वसंत संक्रमण के समय यह सक्रिय रहती है। जब पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता है, तब बादलों की गति बढ़ जाती है,आकाश में ढकी-बुझी बादल दृश्यमान होते हैं, हल्की से मध्यम वर्षा के पखवाड़े बनते हैं, और तापमान के पैटर्न में अस्थिरता आती है। वर्तमान में सक्रिय यह विक्षोभ भी इसी प्रकार का है, लेकिन मौसम विभाग इसे मध्यम प्रभाव वाला मान रहा है।
मौसम विभाग के ताज़ा पूर्वानुमान के मुताबिक 18 फरवरी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों,जैसे मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत, शामली, गाजियाबाद और नोएडा में छिटपुट वर्षा/हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं। हालांकि, यह वर्षा व्यापक या जमकर बारिश नहीं होगी,केवल कुछ चयनित क्षेत्रों में सीमित होगी और यह सामान्य जीवन पर बहुत बड़ा प्रभाव नहीं डालेगी .इसके अतिरिक्त, अधिकतम तापमान में कोई विशेष वृद्धि नहीं होगी। न्यूनतम तापमान 2–3°C तक बढ़ सकता है। इसका मतलब है कि सुबह की ठंड में थोड़ी नरमी आएगी और दिन का तापमान सामान्य से थोड़ा उच्च रहेगा, लेकिन कोई उग्र गर्मी नहीं होगी।
आज आगरा में अधिकतम तापमान 32.2°C तक पहुंच गया जो फरवरी के माह के लिहाज़ से असामान्य रूप से गरम दर्ज किया गया तापमान है। तापमान रिकॉर्ड के लिहाज से यदि देखें तो सर्वकालिक रिकॉर्ड: 35.6°C- 25 फरवरी 1897
आज का रिकॉर्ड: 32.2°C- 18 फरवरी 2026 . यह तापमान पिछले कुछ वर्षों में सबसे ऊँचा है तथा यह इंगित करता है कि मौसम में गर्मी का प्रभाव इस बार थोड़ी देर पहले ही दिखने लगा है। आगरा का यह मिज़ाज अन्य आसपास के जिलों में भी देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार,यह तापमान दिन के उच्च दबाव क्षेत्र और बादलों की कमी के कारण संभव हुआ। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता के साथ जब बादल ढकते हैं, तो दिन में गर्मी तब भी बनी रहती है।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और आगरा-आगला के आसपास रबी फसल,जैसे गेहूँ, सरसों, अलसी आदि खेतों में हैं। तापमान में हल्की वृद्धि और छिटपुट वर्षा का सीधा असर खेतों पर हो सकता है ,हल्की बारिश से मिट्टी में नमी बनी रहेगी, जो इन फसलों के लिए लाभदायक हो सकती है। तापमान में वृद्धि से हवा की नमी और सूखे का प्रभाव थोड़ा कम होगा। हालांकि अधिक बारिश नहीं होने का अनुमान है, इसलिए जलभराव की समस्या नहीं होगी। किसानों को सलाह दी गई है कि वे मौसम अपडेट पर नजर रखें और सोयाबीन/अन्य रबी फसलों की सिंचाई व कृषि गतिविधि इसी अनुसार करें।
शहरी इलाकों,जैसे लखनऊ, आगरा, गाजियाबाद और नोएडा में मौसम सामान्य रहेगा। दिन में हल्की धूप,रात में हल्की ठंडक,बादलों की हल्की आवाजाही,छिटपुट बारिश केवल कुछ जगहों पर यह मौसम commuting और दैनिक गतिविधियों के लिये कोई बड़ा बाधक नहीं है। हां, हल्की बारिश से शहरों में प्रदूषण स्तर कम होने की संभावना बनी रहती है, जिससे हवा थोड़ी स्वच्छ महसूस हो सकती है।
आगरा के इस रिकॉर्ड तापमान ने वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों दोनों का ध्यान खींचा है। यदि पिछले दर्ज आंकड़ों को देखें तो फरवरी माह में तापमान में बढ़ोतरी के उदाहरण मिलते हैं, लेकिन 32°C से ऊपर की गरमी असामान्य है ,पिछले सालों में फरवरी पूरा होने के बाद ही तापमान इतनी ऊँचाई तक पहुंचा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थानीय मौसमी बदलाव और विक्षोभ के प्रभाव का परिणाम है।
मौसम विभाग ने जनता को कुछ आवश्यक सुझाव दिए हैं, छिटपुट वर्षा के लिये तैयार रहें। अचानक तापमान परिवर्तन से बचें। मिट्टी की नमी पर किसानों की निगरानी रखी जाए। outdoor activities हेतु हल्का मौसम सामान्य रहेगा। किसानों से आग्रह है कि वे सिंचाई की अधिकता से बचें, ताकि खेतों में जलभराव ना हो।
18 फरवरी के बाद भी अगले कुछ दिनों तक पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव रहेगा, जिससे बादलों की आवाजाही बनी रहेगी।न्यूनतम तापमान में वृद्धि रहेगी। अधिकतम तापमान सामान्य ही रहेगा। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि मार्च के पहले सप्ताह तक मौसम में हल्का बदलाव जारी रह सकता है, लेकिन कोई भारी तूफान या बारिश की चेतावनी इस समय नहीं है।