
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने सदन में दी जानकारी, 57 मेडिकल कॉलेज जुड़े स्पोक-हब मॉडल से (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)
UP STEMI Program Heart Attack Treatment: उत्तर प्रदेश में हार्ट अटैक के मरीजों की जान बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने नई पहल के तहत ‘स्टेमी प्रोग्राम’ (STEMI Program) को तेजी से लागू किया है। डिप्टी सीएम एवं स्वास्थ्य मंत्री Brajesh Pathak ने विधानसभा में इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम से ग्रामीण क्षेत्रों में भी मरीजों को समय पर विशेषज्ञ उपचार मिल रहा है और सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
डिप्टी सीएम ने बताया कि प्रदेश के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) को स्टेमी प्रोग्राम के तहत मेडिकल कॉलेजों से जोड़ा गया है। इसके लिए ‘स्पोक-हब मॉडल’ अपनाया गया है, जिसमें 57 मेडिकल कॉलेजों को चिन्हित किया गया है। इस मॉडल के तहत सीएचसी ‘स्पोक’ की भूमिका में हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज ‘हब’ के रूप में कार्य कर रहे हैं। जैसे ही कोई मरीज सीने में तेज दर्द या हार्ट अटैक के लक्षणों के साथ सीएचसी पहुंचता है, उसका तुरंत ईसीजी कराया जाता है। ईसीजी रिपोर्ट को विशेषज्ञ डॉक्टरों के व्हाट्सएप ग्रुप पर साझा किया जाता है, जहां हृदय रोग विशेषज्ञ तत्काल राय देते हैं। विशेषज्ञ की सलाह मिलते ही सीएचसी स्तर पर प्राथमिक उपचार शुरू कर दिया जाता है। इससे इलाज में होने वाली देरी कम हुई है और ‘गोल्डन ऑवर’ का बेहतर उपयोग संभव हो पा रहा है।
डिप्टी सीएम ने सदन को बताया कि अब तक प्रदेश में 1685 स्टेमी मरीजों की पहचान की जा चुकी है। इनमें से 958 मरीजों को खून का थक्का घोलने वाला इंजेक्शन दिया गया। यह इंजेक्शन करीब 40 हजार रुपये का होता है, जिसे सरकार की ओर से निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि यह इंजेक्शन मरीज को छह से आठ घंटे तक सुरक्षित रखता है। इसके बाद मरीज को नजदीकी मेडिकल कॉलेज में रेफर किया जाता है, जहां एंजियोग्राफी और आवश्यक होने पर एंजियोप्लास्टी की प्रक्रिया की जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक के मामलों में शुरुआती एक घंटा बेहद महत्वपूर्ण होता है। समय पर थक्का घोलने वाली दवा मिलने से हृदय की मांसपेशियों को स्थायी नुकसान से बचाया जा सकता है। यही कारण है कि यह प्रोग्राम ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘लाइफ सेविंग मॉडल’ साबित हो रहा है।
डिप्टी सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को जमीनी स्तर तक मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। स्टेमी प्रोग्राम का उद्देश्य केवल शहरी नहीं, बल्कि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में भी विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।उन्होंने कहा कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को जिला मुख्यालय या मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने में काफी समय लग जाता था। कई मामलों में रास्ते में ही मरीज की स्थिति गंभीर हो जाती थी। अब सीएचसी स्तर पर ही प्राथमिक जीवन रक्षक उपचार मिलने से मृत्यु दर में कमी आने की उम्मीद है।
विधानसभा में चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम ने आशा वर्करों के मानदेय का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय दोगुना किया है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आशा वर्करों को 750 रुपये मानदेय मिलता था, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर 1500 रुपये कर दिया है। डिप्टी सीएम ने कहा, “आशा हमारे विभाग की रीढ़ हैं। हम उनका सम्मान करते हैं और लगातार उनके संपर्क में रहते हैं। सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।”
चर्चा के दौरान डिप्टी सीएम ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सपा ने कभी आशा वर्करों या स्वास्थ्य व्यवस्था के सुधार के बारे में गंभीरता से नहीं सोचा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा केवल “मुंगेरी लाल के हसीन सपने” देखती है और जनता को भ्रमित करने का प्रयास करती है। उन्होंने दावा किया कि जनता अब विकास और ठोस काम के आधार पर ही निर्णय ले रही है।
हृदय रोग विशेषज्ञों का मानना है कि स्टेमी प्रोग्राम जैसी पहल से हार्ट अटैक से होने वाली मौतों में उल्लेखनीय कमी आ सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और चिकित्सा सुविधा तक पहुंच में देरी अक्सर जानलेवा साबित होती है। अब सीएचसी स्तर पर ईसीजी की सुविधा और विशेषज्ञों से तुरंत संपर्क होने के कारण मरीजों को शुरुआती उपचार में देरी नहीं हो रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में इस प्रोग्राम को और अधिक जिलों में विस्तार दिया जाएगा और टेलीमेडिसिन सुविधाओं को भी मजबूत किया जाएगा।
स्टेमी प्रोग्राम यह भी दर्शाता है कि किस प्रकार डिजिटल माध्यमों और तकनीक का उपयोग कर स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ किया जा सकता है। व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से विशेषज्ञ डॉक्टरों की त्वरित सलाह मिलना, ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य ढांचे के बीच की दूरी को कम कर रहा है। सरकार का दावा है कि आने वाले समय में एम्बुलेंस नेटवर्क, टेली-ईसीजी और इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम को भी और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।
Published on:
17 Feb 2026 03:00 am
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