लखनऊ

यहां बस एक सवाल, लखनऊ में राजनाथ के सामने कौन?

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण लखनऊ सीट वीआईपी हो गई थी।

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Apr 05, 2019
यहां बस एक सवाल, लखनऊ में राजनाथ के सामने कौन?

लखनऊ. 11 अप्रैल को लोकसभा 2019 का पहले चरण का मतदान होगा। लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की भूमिका हर बार की तरह इस बार भी काफी महत्वपूर्ण है। भाजपा, सपा-बसपा गठबंधन, कांग्रेस हर कोई एक दूसरे को मात देने में लगा है। सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस ने लगभग सभी जगहों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा कर दी है। लेकिन लखनऊ में अभी इन्होंने अपने प्रत्याशी की घोषणा नहीं की है। यहां से भाजपा केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को फिर से मैदान में उतारने जा रही है। वे 2014 में यहां से भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गए थे। राजनाथ सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव में लखनऊ से भाजपा के प्रत्याशी हैं। यहां सवाल यह उठ रहा है कि राजनाथ सिंह के सामने कौन?
चिलचिलाती धूप के बीच लखनऊ संसदीय सीट का चुनावी मैदान तैयार है। शुक्रवार को चाय की दुकान, पान की दुकान, चौराहों, सुबह-सुबह पार्कों में टहलने के दौरान लोग यही चर्चा कर रहे थे कि राजनाथ सिंह के सामने कौन? वाकई यह सवाल लाजमी है कि आखिर राजनाथ सिंह के सामने विपक्ष का प्रत्याशी कौन होगा। सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस किसे लखनऊ से मैदान में उतारेंगे।
भाजपा ने यहां से कई दिन पहले राजनाथ सिंह के नाम की घोषण कर दी थी। वहीं कांग्रेस के अलावा सपा-बसपा गठबंधन अभी तक यहां से अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पाया है तो वहीं शिवपाल सिंह यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी भी अपना उम्मीदवार खड़ा करने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस ने पार्क रोड स्थित कांग्रेस के महानगर कार्यालय में शाम को कार्यकर्ताओं की भीड़ नजर आई। इससे पहले कार्यालय पर ताला लटकता मिला। चर्चा में छह नाम हैं। जिसमे लखनऊ के दो पूर्व विधायक भी शामिल हैं। एक पदाधिकारी का कहना था कि कोई नए नाम की चर्चा भी नहीं हो रही है।
वहीं कैसरबाग के सपा महानगर कार्यालय में भी पोलिंग बूथों पर चर्चा हो रही थी। सपा-बसपा गठबंधन में लखनऊ सीट सपा के खाते में हैं, लेकिन कार्यकर्ता भी हर दिन महानगर कार्यालय से आकर लौट जाते हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा कार्यकर्ता विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए प्रचार में जुटे हैं। खुद यहां से सांसद और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह टिकट मिलने के बाद दूसरी बार राजधानी आए हैं।

इस कारण से वीआईपी हो गई थी सीट

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कारण लखनऊ सीट वीआईपी हो गई थी। 1991 में अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ सीट को भाजपा की झोली में डाला था उसके बाद कोई दल यहां टिक नहीं पाया और भाजपा यहां से लगातार जीतती आई। कांग्रेस व सपा ने तो उम्मीदवारों को आयात तक किया था, लेकिन उसका कोई लाभ नहीं हुआ था। फिल्म अभिनेता से लेकर फिल्मकार और कश्मीर के शाही परिवार से भी यहां चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली।

जितिन को लड़ाने की थी चर्चा
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री जितिन प्रसाद को लखनऊ से लड़ाने की पिछलों दिनों चर्चा हो रही थी, लेकिन यह केवल चर्चा ही रह गई और जितिन प्रसाद के धौरहरा से ही चुनाव लडऩे की बात पक्की हो गई। कांग्रेस यहां से किसको अपना प्रत्याशी बनाती है यह अभी तय नहीं है।

Published on:
05 Apr 2019 03:28 pm
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