
लखनऊ. वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने 13594.87 करोड़ का अनुपूरक बजट (Supplementary budget 2019-20) पेश किया है। इस बार का अनुपूरक बजट पिछली बार से बड़ा है। मंगलवार को योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) सरकार के वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल (Rajesh Agarwal) ने विधानसभा में अनुपूरक बजट पश किया। योगी सरकार का यह तीसरा अनुपूरक बजट है। गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए योगी सरकार ने 11 हजार 388 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट पेश किया था। वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए दूसरा अनुपूरक बजट 8 हजार 54 करोड़ रुपये का था। चालू योजनाओं को आगे बढ़ाने और सरकार की अन्य घोषणाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने तीसरा अनुपूरक बजट पेश किया।
अनुपूरक बजट में एक नजर में
- 13594.87 करोड़ का योगी सरकार का तीसरा अनुपूरक बजट
- पर्यटन सूचना एवं प्रसार के लिए 5 करोड़
- अयोध्या में दीपोत्सव के आयोजन के लिए 6 करोड़ रुपए
- प्रदेश में विभिन्न पर्यटन स्थलों के विकास हेतु 100 करोड़ रुपए
- जिला योजना अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न पर्यटन स्थलों के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए
- प्रदेश में इको टूरिज्म की विकास के लिए 5 करोड़ रुपए
- मिर्जापुर में विंध्यवासिनी देवी धाम के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़ रुपए
- उन्नाव में स्थित राजा राव राम बक्श सिंह पार्क में अवस्थापना सुविधाओं की सृजन के लिए 2 करोड़ रुपए
- होमगार्ड्स संगठन के अधिष्ठान मद एवम लोक सभा निर्वाचन ड्यूटी में लगे होमगार्ड्स की मजदूरी मद में 160 करोड़ रुपए
- सचिवालय प्रशासन के लिए 3 करोड़ रुपए का प्रावधान बजट में किया गया
- नई दिल्ली में प्रदेश सरकार का एकीकृत कार्यालय बनाने के लिए 3 करोड़ रुपए
- सचिवालय में सीसीटीवी सर्विलांस कैमरा एवं सही भर्ती उपकरणों की स्थापना के लिए 8 करोड़ रुपए
क्या होता है अनुपूरक बजट
सरकार अनुपूरक बजट उस दशा में पेश करती है। जब सरकार की योजनाओं के लिए आम बजट पर्याप्त नहीं होता है, लेकिन योजनाओं पर सरकार को खर्च के लिए रकम चाहिए होती है। आम बजट के अलावा अतिरिक्त धनराशि बिना विधानसभा की मंजूरी के खर्च नहीं की जा सकती। इसके अलावा अगर किसी खास योजना के लिए सरकार द्वारा मंजूर की गई राशि उस प्रयोजन को पूरा करने में अपर्याप्त होती है या फिर किसी नई सेवा पर जिसकी आम बजट में परिकल्पना न की गई हो। तब अनुपूरक या अतिरिक्त बजट की आवश्यकता पड़ती है। सरकार का अनुपूरक बजट सदन में राज्यपाल की सहमति से वित्त मंत्री द्वारा पेश किया जाता है। विधानसभा सदस्यों की सहमति के अनुपूरक बजट की राशि सरकार के खाते में आ जाती है।