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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर CM Yogi का विपक्ष पर तंज, बोले- इतिहास की गलतियों से सीखना होगा

Yogi Adityanath Marks Partition Horrors Day: लखनऊ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इतिहास से सीख लेने का आह्वान करते हुए विपक्ष, सीएए और राष्ट्रीय एकता पर विस्तार से अपने विचार रखे।
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लखनऊ

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Ritesh Singh

Aug 14, 2026

लखनऊ में बोले सीएम योगी, विभाजन की त्रासदी से सबक लेकर राष्ट्र को रखना होगा एकजुट (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

लखनऊ में बोले सीएम योगी, विभाजन की त्रासदी से सबक लेकर राष्ट्र को रखना होगा एकजुट (फोटो सोर्स : Ritesh Singh )

CM Yogi Speech: राजधानी लखनऊ में आयोजित ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारत विभाजन की त्रासदी को विश्व मानवता के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताते हुए कहा कि यह केवल एक ऐतिहासिक घटना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के दर्द, विस्थापन और असंख्य परिवारों के बिखर जाने की कहानी है। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन के दौरान लाखों निर्दोष लोगों की हत्या हुई, करोड़ों हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन और अन्य समुदायों के लोगों को अपनी मातृभूमि छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा और उस समय उनकी पीड़ा सुनने वाला कोई नहीं था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल अतीत को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह आत्ममंथन करने और इतिहास से सीख लेने का भी दिन है। उन्होंने कहा कि यदि इतिहास की गलतियों से सबक नहीं लिया गया, तो भविष्य में भी ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।

विभाजन को बताया मानवता की सबसे बड़ी त्रासदियों में एक

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 1947 का भारत विभाजन केवल भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, संस्कृति और सामाजिक ताने-बाने का विघटन था। उन्होंने कहा कि लाखों लोग अपने घर-बार छोड़ने को विवश हुए और हजारों महिलाओं, बच्चों तथा बुजुर्गों ने अमानवीय अत्याचार झेले।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उस समय सत्ता प्राप्ति की राजनीति इतनी हावी थी कि राष्ट्रहित को पीछे छोड़ दिया गया और एक सनातन राष्ट्र के टुकड़े कर दिए गए। उन्होंने कहा कि आज भी उस त्रासदी का दर्द कई परिवारों की स्मृतियों में जीवित है।

इतिहास से सीख लेने की जरूरत

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इतिहास केवल परीक्षा की किताबों तक सीमित विषय नहीं है। इतिहास हमें अपने गौरवशाली अतीत पर गर्व करना सिखाता है और साथ ही उन गलतियों से भी सीखने का अवसर देता है जिनके कारण राष्ट्र को भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि यह प्रश्न आज भी प्रासंगिक है कि विभाजन क्यों हुआ, इसके लिए कौन जिम्मेदार था और आखिर कब तक भारत उसके दुष्परिणामों को झेलता रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उद्देश्य भी यही है कि नई पीढ़ी इतिहास की वास्तविकताओं से परिचित हो और भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा न बनने दे।

विपक्ष पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग वर्ष 1947 में मौन थे, उनकी प्राथमिकता सत्ता थी, राष्ट्र नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी कुछ राजनीतिक दल वोट बैंक की राजनीति के कारण संवेदनशील मुद्दों पर चुप्पी साध लेते हैं।

उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए अत्याचारों के मामलों में भी कई राजनीतिक दलों ने खुलकर प्रतिक्रिया नहीं दी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि उनका वोट बैंक प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि राष्ट्रहित से ऊपर वोट बैंक की राजनीति देश के लिए घातक साबित होती है।

सीएए का किया बचाव

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने भाषण में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह कानून उन लोगों को नागरिकता देने के उद्देश्य से बनाया गया है जो पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान जैसे देशों में धार्मिक उत्पीड़न का शिकार होकर भारत आए हैं। उन्होंने कहा कि इन देशों के हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई यदि वर्षों से भारत में शरण लिए हुए हैं, तो उन्हें नागरिकता देना मानवीय और संवैधानिक दायित्व है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कानून में किसी भारतीय नागरिक की नागरिकता छीनने या किसी समुदाय के अधिकारों को प्रभावित करने का कोई प्रावधान नहीं है।

CAA विरोध प्रदर्शन का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। उन्होंने लखनऊ, कानपुर, मेरठ, अलीगढ़, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, संभल और सहारनपुर सहित कई शहरों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुछ स्थानों पर हिंसा और आगजनी की घटनाएं भी हुई थीं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में उस समय कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार ने सख्ती से कार्रवाई की। मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि मजबूत प्रशासनिक व्यवस्था नहीं होती, तो स्थिति और गंभीर हो सकती थी।

स्वतंत्रता सेनानियों को किया याद

योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, राजगुरु, रानी लक्ष्मीबाई और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन महान विभूतियों ने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस देश में "स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है" का उद्घोष हुआ, उसी देश को विभाजन जैसी त्रासदी झेलनी पड़ी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रत्येक भारतीय का दायित्व है कि वह स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और बलिदान को याद रखे।

राष्ट्रीय एकता पर दिया जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत अतीत में दो प्रमुख कारणों से कमजोर हुआ-आंतरिक मतभेद और समाज को जाति, क्षेत्र तथा अन्य आधारों पर विभाजित करने की राजनीति। उन्होंने कहा कि जब समाज आपस में बंट जाता है, तब बाहरी शक्तियों को देश को कमजोर करने का अवसर मिल जाता है।

उन्होंने सभी नागरिकों से राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और संविधान के प्रति आस्था बनाए रखने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की शक्ति उसकी एकता में है और सभी को मिलकर राष्ट्र निर्माण के कार्य में योगदान देना चाहिए।
आतंकवाद और उग्रवाद का भी किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन के दुष्परिणाम आज भी विभिन्न रूपों में सामने आते हैं। उन्होंने आतंकवाद, नक्सलवाद, माओवाद और उग्रवाद जैसी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश ने दशकों तक इन समस्याओं का सामना किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने के लिए सभी नागरिकों को जागरूक रहना होगा।

इतिहास को याद रखने का आह्वान

अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल श्रद्धांजलि देने का अवसर नहीं, बल्कि इतिहास से सीख लेकर भविष्य को सुरक्षित बनाने का संकल्प लेने का दिन है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को विभाजन की वास्तविकता और उसके दुष्परिणामों से अवगत कराना आवश्यक है, ताकि राष्ट्र की एकता और अखंडता हमेशा मजबूत बनी रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, छात्र-छात्राएं और विभिन्न क्षेत्रों के नागरिक उपस्थित रहे। विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखने का संदेश दिया गया।