लखनऊ

UP Cabinet Expansion: योगी मंत्रिमंडल विस्तार, कई मंत्रियों की छुट्टी और नए चेहरों को मौका

UP Cabinet: उत्तर प्रदेश में Yogi Adityanath सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। क्षेत्रीय और जातीय संतुलन के साथ नए चेहरों को मौका देने तथा तीसरे डिप्टी सीएम पर भी मंथन जारी है।

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Mar 07, 2026
2027 विधानसभा चुनाव से पहले हो सकता है बड़ा फेरबदल, क्षेत्रीय और जातीय संतुलन साधने की तैयारी (फोटो सोर्स : cm X)

UP Cabinet Expansion Buzz: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि Yogi Adityanath के नेतृत्व वाली सरकार में जल्द ही बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। पिछले लगभग छह महीनों से समय-समय पर मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें सामने आती रही हैं, लेकिन अब सूत्रों का कहना है कि इंतजार की घड़ियां जल्द खत्म हो सकती हैं और सरकार बड़े बदलाव के साथ अपने मंत्रिमंडल का पुनर्गठन कर सकती है।

सूत्रों के अनुसार यह विस्तार केवल औपचारिक बदलाव नहीं होगा, बल्कि इसमें कई पुराने मंत्रियों की विदाई और नए चेहरों की एंट्री देखने को मिल सकती है। माना जा रहा है कि सरकार इस फेरबदल के जरिए आगामी राजनीतिक चुनौतियों और चुनावी समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी। विशेष रूप से 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए यह विस्तार काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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संगठन और सरकार के बीच हो सकता है समायोजन

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि इस विस्तार में कुछ वरिष्ठ मंत्रियों को संगठन में भेजा जा सकता है, जबकि संगठन में सक्रिय कुछ नेताओं को सरकार में जिम्मेदारी दी जा सकती है। इस तरह सरकार और संगठन के बीच संतुलन बनाने की रणनीति पर काम चल रहा है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि इससे प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई ऊर्जा आएगी।

हाल ही में Pankaj Chaudhary को Bharatiya Janata Party की उत्तर प्रदेश इकाई का नया प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने के बाद से ही मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई थीं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि संगठन में इस बदलाव के बाद सरकार में भी बड़े स्तर पर परिवर्तन की संभावना स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

प्रदर्शन के आधार पर हो सकता है बदलाव

भाजपा के अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में शामिल कुछ मंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा की गई है। इसी के आधार पर करीब 10 से 12 मंत्रियों को बदले जाने की चर्चा है। जिन मंत्रियों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं माना गया है, उन्हें हटाकर नए और सक्रिय चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

पार्टी का मानना है कि शासन-प्रशासन में गति बनाए रखने और जनता के बीच सकारात्मक संदेश देने के लिए समय-समय पर ऐसे बदलाव जरूरी होते हैं। इसलिए यह विस्तार केवल राजनीतिक संतुलन के लिए ही नहीं बल्कि प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से भी किया जा सकता है।

गुजरात मॉडल जैसा बड़ा फेरबदल संभव

राजनीतिक विश्लेषक यह भी मान रहे हैं कि यह विस्तार किसी छोटे बदलाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि Gujarat में लागू किए गए मॉडल की तरह बड़ा फेरबदल भी देखने को मिल सकता है। वहां एक समय में बड़ी संख्या में मंत्रियों को बदलकर नए चेहरों को जिम्मेदारी दी गई थी। इसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी व्यापक स्तर पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है, जिसमें कई नए और युवा विधायकों को मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है।

क्षेत्रीय संतुलन पर रहेगा खास ध्यान

राजनीतिक समीकरणों की दृष्टि से इस मंत्रिमंडल विस्तार में क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। चूंकि मुख्यमंत्री Yogi Adityanath पूर्वांचल क्षेत्र से आते हैं और हाल ही में प्रदेश संगठन की कमान भी उसी क्षेत्र के नेता को मिली है, इसलिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्र को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा आने वाले चुनावों को देखते हुए हर क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। इसी कारण क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को संतुलित करने की रणनीति बनाई जा रही है।

जातीय समीकरण साधने की तैयारी

उत्तर प्रदेश की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस विस्तार में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार छह नए मंत्रियों को शामिल किए जाने की चर्चा है, जिनमें एक ब्राह्मण, एक राजपूत, एक दलित और एक ओबीसी समुदाय से नेता को स्थान दिया जा सकता है। इसके अलावा अन्य पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के प्रतिनिधित्व को भी बढ़ाने की संभावना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद सामाजिक समीकरणों को और मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रही है। पार्टी चाहती है कि हर वर्ग और क्षेत्र को सरकार में प्रतिनिधित्व मिले ताकि चुनावों में व्यापक समर्थन सुनिश्चित किया जा सके।

तीसरे उपमुख्यमंत्री की चर्चा

इस संभावित विस्तार में सबसे ज्यादा चर्चा तीसरे उपमुख्यमंत्री पद को लेकर हो रही है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री हैं, लेकिन राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज है कि सरकार तीसरे डिप्टी सीएम का पद भी बना सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऐसा होता है तो यह पद किसी ओबीसी या दलित चेहरे को दिया जा सकता है। इससे भाजपा विपक्ष के उस राजनीतिक नैरेटिव को चुनौती देना चाहती है जिसमें सामाजिक न्याय और पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की बात की जाती रही है।

मंत्रियों की संख्या बढ़कर 60 तक पहुंच सकती है

वर्तमान में उत्तर प्रदेश सरकार में कुल 54 मंत्री हैं। संविधान के अनुसार राज्य में मंत्रियों की संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों के 15 प्रतिशत तक हो सकती है। इसी आधार पर मंत्रियों की संख्या बढ़ाकर लगभग 60 तक किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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