
लखनऊ के अस्पतालों में घायलों की भीड़,आंखों की चोट के कई मामले (फोटो सोर्स : AI)
Holi Celebration Accident: रंगों और उमंग के त्योहार होली के दौरान लखनऊ में कई जगहों पर हुड़दंग और लापरवाही लोगों के लिए भारी पड़ गई। शहर के प्रमुख अस्पतालों में बड़ी संख्या में घायल और बीमार लोग इलाज के लिए पहुंचे। खासतौर पर आंखों में रंग और धूल जाने से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी देखी गई। डॉक्टरों के अनुसार बीते 24 घंटे में शहर के प्रमुख चिकित्सा संस्थान King George’s Medical University (केजीएमयू) के ट्रॉमा सेंटर में कुल 248 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जिनमें से लगभग 70 लोग आंखों की समस्या से पीड़ित थे।
डॉक्टरों के मुताबिक होली खेलने के दौरान कई लोगों की आंखों में रंग, धूल और अन्य कण चले गए, जिससे उन्हें तेज जलन, संक्रमण और देखने में परेशानी की शिकायत हुई। कुछ मरीजों की हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत इलाज और निगरानी में रखना पड़ा।
विशेषज्ञों ने बताया कि कई मामलों में रंगों में मिले रासायनिक तत्वों की वजह से आंखों पर प्रतिकूल असर पड़ा है। यही कारण है कि डॉक्टरों ने लोगों को सावधानी बरतने और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनने जैसी सलाह पहले ही दी थी।
डॉक्टरों ने बताया कि ट्रॉमा सेंटर में आए मरीजों में से पांच लोगों की आंखों के कॉर्निया पर सीधा असर पड़ा है। कॉर्निया आंख का बेहद संवेदनशील हिस्सा होता है और इस पर चोट लगने से दृष्टि प्रभावित हो सकती है। इन मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से कुछ को सर्जरी की जरूरत भी पड़ सकती है।
एक मरीज के मामले में डॉक्टरों को आंख के अंदर केमिकल युक्त रंग के कण मिले हैं, जिससे आंख में सूजन और संक्रमण बढ़ गया। ऐसे मामलों में इलाज थोड़ा जटिल हो जाता है और मरीज को कुछ दिनों तक विशेष निगरानी में रखना पड़ता है।
होली के दिन शहर के कई बड़े सरकारी अस्पतालों की इमरजेंसी में मरीजों की लंबी कतार देखने को मिली। King George’s Medical University ट्रॉमा सेंटर के अलावा Balrampur Hospital, Dr. Ram Manohar Lohia Institute of Medical Sciences, Lok Bandhu Hospital और Civil Hospital Lucknow की इमरजेंसी में भी बड़ी संख्या में घायल पहुंचे। डॉक्टरों के अनुसार, अधिकतर लोग बाइक या स्कूटर से गिरने, आपसी झगड़ों और पटाखों के कारण घायल हुए थे। कुछ लोग नशे की हालत में सड़क हादसों का शिकार भी हुए।
होली के दौरान शराब और अन्य नशे के सेवन के कारण कई जगहों पर सड़क हादसों की घटनाएं भी सामने आईं। तेज रफ्तार बाइक और कारों के कारण कई लोग घायल हो गए। कुछ मरीजों के सिर और हाथ-पैर में चोटें आई हैं, जिनका इलाज ट्रॉमा सेंटर में किया गया। डॉक्टरों का कहना है कि त्योहारों के दौरान अक्सर इस तरह के मामले बढ़ जाते हैं। ऐसे समय में लोग सुरक्षा नियमों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है।
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि होली जैसे त्योहारों के दौरान सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। आंखों में रंग जाने पर तुरंत साफ पानी से धोना चाहिए और अगर जलन या दर्द बना रहे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टरों ने यह भी सलाह दी कि केमिकल युक्त रंगों के इस्तेमाल से बचना चाहिए। प्राकृतिक या हर्बल रंगों का प्रयोग करना सुरक्षित माना जाता है।
अस्पतालों में घायलों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन भी सतर्क हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान इमरजेंसी सेवाओं को पूरी तरह सक्रिय रखा गया था ताकि किसी भी मरीज को इलाज के लिए परेशानी न हो। डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई थी, जिससे बड़ी संख्या में आए मरीजों का समय पर इलाज किया जा सके।
विशेषज्ञों का कहना है कि होली खुशियों और भाईचारे का त्योहार है, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही गंभीर समस्या का कारण बन सकती है। खासकर आंखों की सुरक्षा बेहद जरूरी है क्योंकि एक छोटी सी चोट भी स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि त्योहार मनाते समय संयम और सावधानी बरतें ताकि किसी को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
Published on:
06 Mar 2026 02:30 pm
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