यूपी सरकार की तरफ से बताया गया है कि यूपी में 74 हजार से ज्यादा निगरानी समितियां गांव-गांव जाकर संक्रमितों की पहचान कर रही हैं।
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के बाद से ही यूपी के गांवों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैला है। 'गांवों की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे है', हाइकोर्ट की यह तल्ख टिप्पणी भी इसी ओर इशारा करती है गांवों में स्थिति भयावह है। लेकिन, योगी सरकार का दावा है कि सूबे के 64 फीसदी गांव में कोरोना संक्रमण से मुक्त हैं। बताया कि प्रदेश के 90 हजार गांव में से 62 हजार गांवों में कोरोना संक्रमण नहीं मिला है। इसकी वजह सरकार की ट्रिपल टी (टेस्टिंग, ट्रेसिंग, ट्रीटमेंट) रणनीति और ग्राम निगरानी समितियों की सक्रियता है।
सरकार की तरफ से बताया गया है कि यूपी में 74 हजार से ज्यादा निगरानी समितियां गांव-गांव जाकर संक्रमितों की पहचान कर रही हैं। इन समितियों में आशा, आंगनबाड़ी और एनएनएम कर्मचारियों को शामिल किया जाता है। यह लोग संदिग्ध मामलों को पहचानने, जांच को बढ़ाने और इलाज उपलब्ध करवाने का काम करते हैं। इन कमेटियों को ऑक्सीमीटर, थर्मामीटर भी दिए गए हैं।
गांवों-कस्बों पर विशेष फोकस : नवनीत सहगल
यूपी के अतिरिक्त मुख्य सचिव (सूचना) नवनीत सहगल ने बताया कि शहरों और कस्बों में ज्यादा से ज्यादा आरटी-पीसीआर टेस्ट कराए जा रहे हैं, इसके अलावा विशेष सैनिटाइजेशन अभियान भी चलाया जा रहा है और लोगों को कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग और सफाई रखने जैसी बातें बताई जाती हैं।