लखनऊ

Yogi Govt Action: चंदौली भूमि नोटिस मामला: योगी सरकार सख्त, तीन पीसीएस अफसर निलंबित, प्रशासनिक हलकों में मचा हड़कंप

Yogi Govt: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक सख्ती दिखाते हुए तीन पीसीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। चंदौली के पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर में सरकारी भूमि से जुड़े 20 आरसी नोटिस वापस लेने के मामले में जांच के बाद यह कार्रवाई हुई। शासन ने इसे नियमों के उल्लंघन और लापरवाही का गंभीर मामला माना है।

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Feb 06, 2026
योगी सरकार का कड़ा प्रशासनिक एक्शन: चंदौली भूमि नोटिस विवाद में जांच तेज (फोटो सोर्स : WhatsApp News Group)

Yogi Govt Cracks Down: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कप्तानी में शासन-प्रशासन ने एक बार फिर अपने तंत्र में कड़ा एक्शन लिया है। प्रदेश सरकार ने प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के तीन वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है, जो चंदौली के पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर में भूमि के संबंध में 20 आरसी प्रपत्र नोटिस के विवादित हटाए जाने के आरोपों को लेकर आया है।

यह कार्रवाई राजस्व संहिता 2006 के उल्लंघन और प्रशासनिक जिम्मेदारी के ठीक से पालन न किए जाने के आरोपों के मद्देनजर की गई है। अधिकारियों के साथ खुद सरकार ने साफ संकेत दिया है कि अब किसी भी सरकारी जमीन, नियमों के उल्लंघन या जनता के हित के खिलाफ निर्णयों के मामले में प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

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क्या था विवाद: 20 आरसी प्रपत्र और भूमि विवाद

चंदौली जिले के पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर में तहसील स्तर पर एक विवादित मामला सामने आया जिसका मूल विषय था “20 आरसी प्रपत्र” के रूप में जारी किए गए नोटिस। ये नोटिस सरकारी भूमि (जैसे खलिहान, चकमार्ग, कब्रिस्तान, नवीन परती, बंजर आदि) पर अतिक्रमण की पहचान और उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए जारी किए जाते हैं।

जांच में पाया गया कि इस तरह के आरसी नोटिस जारी होने के बावजूद उन नोटिसों को वापस लिया गया, जिससे सार्वजनिक भूमि के संरक्षण का लक्ष्य प्रभावित हुआ। ऐसी भूमि पर ब्याज लेने वाले लोग कई बार अतिक्रमण कर लेते हैं और अगर नियमों के अनुसार नोटिस लागू न हों तो सरकारी हितों को बड़ा नुकसान हो सकता है। इसी गंभीर स्थिति को लेकर जिलाधिकारी, पं. दीन दयाल उपाध्याय नगर ने मामले की विस्तृत जांच शुरू की।

सरकार ने शुरू में एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया, जिसमें एडीएम (न्यायिक), एसडीएम चकिया और अतिरिक्त एसडीएम चंदौली शामिल थे। इस जांच में यह पाया गया कि तत्कालीन तहसीलदारों और संबंधित पीसीएस अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का ठीक से पालन नहीं किया गया, और उसके कारण अवैध कब्जे का पक्ष लेने जैसे आदेश पारित हुए। अधिकारियों के ऐसे कृत्यों को प्रशासन के मानकों के खिलाफ माना गया।

किसके खिलाफ कार्रवाई – नाम, पद और वर्तमान तैनातिया

सरकार ने उन अधिकारियों को निलंबित किया जिन्होंने विवाद के समय तहसील स्तर पर कार्य किया था:

  • विराग पांडेय- पूर्व तहसीलदार, वर्तमान में एसडीएम गाजियाबाद
  • ललिता प्रसाद-पूर्व पीठासीन अधिकारी, वर्तमान में एसडीएम बुलंदशहर
  • सतीश कुमार-पूर्व पीठासीन अधिकारी, वर्तमान में एसडीएम एटा

इन तीनों PCS अधिकारियों ने उस समय तहसील स्तर पर निर्णय लिए या उस विवाद में भूमिका निभाई जब 20 आरसी नोटिस जारी किए गए और बाद में वापस लिए गए। जांच के परिणामों को देखते हुए, प्रमुख सचिव (नियुक्ति), श्री एम. देवराज की ओर से गुरुवार को निलंबन आदेश जारी हुआ। इस आदेश के तहत तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया। निलंबन के दौरान ये अधिकारी राजस्व परिषद कार्यालय, लखनऊ से संबद्ध रहेंगे और उनकी सेवाएँ वहीं पर रखी जाएँगी जबकि विस्तृत जांच जारी रहेगी।

सरकार का रुख: नियम पालन और जवाबदेही

योगी सरकार का यही संदेश है कि सरकारी नौकरशाही में किसी भी प्रकार की लापरवाही, नियमों का उल्लंघन, भूमि से जुड़ी अनियमितता या अतिक्रमण समर्थक निर्णय बर्दाश्त नहीं किये जायेंगे। प्रदेश सरकार की नीति पारदर्शिता और गतिविधियों की जवाबदेही पर आधारित है। पिछले कुछ समय में प्रशासनिक स्तर पर कई मामलों में अफसरों के खिलाफ सख्त कदम भी उठाए गए हैं, जिसमें भ्रष्टाचार, नियमों का उल्लंघन और सार्वजनिक संपत्ति से जुड़े मामलों पर कार्रवाई शामिल रही है।

पहले भी ऐसे कई मामलों में सरकार ने अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और कार्यालयापन्न निलंबन (attachment) जैसे कदम उठाये हैं ,जिसमें भ्रष्टाचार और भूमि घोटाले की गंभीर अनुशासनहीनता के आरोप शामिल रहे हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी तंत्र में नियमों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है और किसी भी स्तर पर अपवाद नहीं बर्दाश्त किया जायेगा।

जांच आगे 

निलंबन के बाद अब इस मामले की आगे विस्तृत जांच वाराणसी मंडलायुक्त के अधीन जारी रहेगी। इसके अलावा तहसील के जिलाधिकारी को भी जांच के लिए आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि आरोप की पुष्टि और समयबद्ध निष्कर्ष तक पहुँचने में सहायता मिल सके। निलंबन के तहत इस दौरान सभी दोषियों की सेवाएँ राजस्व परिषद से संबद्ध रहेगी और जांच के परिणामों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

सरकार के इस फैसले से न केवल प्रशासनिक स्तर पर एक सख्त संदेश गया है, बल्कि यह भूमि के संरक्षण, नियम-व्यवस्था एवं शासन-प्रशासन के अनुशासन के महत्व को भी रेखांकित करता है। उन अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई जैसे अधिक सख्त क़दम, विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय करना, दंडात्मक कार्रवाइयाँ, भी संभव हैं।

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