लुधियाना

10 लाख प्रवासी मजदूरों का पलायन, पंजाब के उद्योग जगत में हाहाकार

- राज्य के विभिन्न उद्योगों में 12 लाख श्रमिक करते हैं काम - एक लाख पहले ही जा चुके, 10 लाख ने कराया पंजीकरण -उद्यमी बोले, राज्य के उद्योगों का तो बेड़ा गर्क हो जाएगा

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migrant laborers
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डॉ. भानु प्रताप सिंह/धीरज शर्मा

लुधियाना। पंजाब सरकार की नाकामी और कोरोना वायरस महामारी के चलते पंजाब की इंडस्ट्री उजड़ने जा रही है। पंजाब सरकार ने पंजाब में रह रहे 11 लाख के करीब श्रमिकों को रोटी मुहैया करवाने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। इससे नाराज होकर करीब 10 लाख श्रमिक पंजाब छोड़कर जा रहे हैं। यह पंजाब की इंडस्ट्री के लिए बहुत बड़ा झटका होगा। माना जा रहा है कि पंजाब की सारी की सारी इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। पंजाब में लगभग ढाई लाख इंडस्ट्रीज हैं, जिसमें आधिकारिक रूप से करीब 12 लाख लोग काम करते हैं। जो गैर पंजीकृत हैं वह अलग है।

क्या होगा उद्योगों का

जिस दिन से पंजाब में लॉकडाउन हुआ है तब से लेकर अब तक पंजाब से एक लाख के करीब प्रवासी मजदूर पलायन कर चुके हैं। 10 लाख पलायन करने को तैयार बैठे हैं। इन्हें उनके घर भेजने की कवायद शुरू हो चुकी है। सबसे ज्यादा मजदूर उत्तर प्रदेश, फिर बिहार, फिर मध्य प्रदेश, फिर उत्तरांचल और उड़ीसा के हैं। सभी यहां पर ठेकेदारों के पास काम करते हैं या फिर फैक्ट्रियों में पक्के तौर पर। इन आंकड़ों से सरकार जागी है या नहीं पर औद्योगिक जगत की नींद उड़ चुकी है। इंडस्ट्री बंद होने के बाद मजूदरों की ओर ध्यान इंडस्ट्री वालों ने भी नहीं दिया। पंजाब में चलने वाली मुक्ता इंडस्ट्री, साइकिल के पुर्जे, मशीनरी टूल, नट बोल्ट, खराद, सिलाई मशीनें वह इनके कल पुर्जे मुख्य तौर पर बनाए जाते है। विभिन्न अन्य किस्म के उत्पादों में हौजरी का सामान है। सामान तैयार होकर असम, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल, भूटान के लिए रेल और सड़क मार्ग के जरिए भेजा जाता है।

धान की बिजाई पर संकट

यही नहीं पंजाब में खेती में भी बाहरी मजदूर ही ज्यादा काम करते हैं। गेहूं की फसल कट रही है और धान की बिजाई शुरू होनी है, पर मजदूर पलायन कर रहा है। जून में होने वाली धान की बिजाई परसवालिया निशान खड़े हो गए हैं। इससे उलट आंकड़े कुछ और बता रहे हैं। पंजाब में गैर-बासमती धान का रकबा 57.27 लाख एकड़ है। 2018 में यह रकबा 64.80 लाख एकड़ था। पिछले साल पंजाब के किसानों को धान की रोपाई के लिए लेबर के जबरदस्त संकट का सामना करना पड़ा था। रेलवे स्टेशनों पर किसान बिहार से आने वाले श्रमिकों को अपने वाहनों में ले जाने के लिए इंतजार करते दिखाई देते थे। पिछले साल तो प्रति एकड़ रोपाई की मजदूरी बढ़कर 3000-3200 रुपये तक कर दी गई जो पहले 1500 रुपये प्रति एकड़ के आसपास होती थी। इसके अलावा मजदूरों को रहना, खाना पीना फ्री होता था।

किसानों की चिन्ता बढ़ी

इस बार लॉकडाऊन और ट्रेनों की आवाजाही बंद होने का जबरदस्त असर देखने को मिलेगा। अभी पंजाब का किसान इस बात तो लेकर आश्वस्त था कि पंजाब में लेबर काफी फ्री बैठी है क्योंकि उद्योग चल नहीं रहे हैं। बिहार के श्रमिक उनको आसानी से इस बार मिल जाएंगे लेकिन बिहार के लोगों ने वापसी के लिए रजिस्ट्रेशन करवाकर किसानों की चिंता बढ़ा दी है।

श्रमिकों के वापस आने में संशयः गुरशरण सिंह

हैंड टूल निर्यातक एसोसिएशन के प्रधान गुरशरण सिंह का कहना है कि पंजाब इंडस्ट्री का तो वैसे ही बुरा हाल है। ऊपर से कोरोना महामारी के चलते यह दिन देखना पड़ रहा है। यहां से वापस जाने वाले श्रमिक वापस आएंगे, इसमें संशय है। पंजाब में इंडस्ट्री है, यहां के लोग मददगार हैं। जाने वाले श्रमिक परिवार से मिलना चाहते थे। अगर जा रहे हैं तो वापस आने का आश्वासन भी देकर जा रहे हैं। इंडस्ट्री का तो वैसे ही बुरा हाल है और झटके लगातार लग रहे थे। केंद्र सरकार को इंडस्ट्री को राहत पैकेज तो देना चाहिए।

इडस्ट्री को नए रूप में आना होगाः दिनेश सरना

आयकर विभाग के प्रसिद्ध वकील व इंडस्ट्री फाइनेंस के एक्सपर्ट दिनेश सरना का कहना है कि इंडस्ट्री आने वाले दिनों में नए रूप में दिखेगी तभी बचेगी। लॉकडाउन कितना समय चलेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता। अभी देश में कोरोना का ग्राफ बढ़ रहा है, कम नहीं हो रहा है। ऐसे में अगर श्रमिक जल्दी वापस नहीं आते तो इंडस्ट्री को चलाने के लिए नई मशीनरी लेनी पड़ेगी, ताकि आटोमैटिक काम हो।

इंडस्ट्री तबाह हो जाएगीः अजय ऋषि

बटाला चैम्बर ऑफ कॉमर्स के महासचिव अजय ऋषि ने कहा कि मजदूर चले गए तो पंजाब की इंडस्ट्री तबाह हो जाएगी। काम के लिए मजदूर नहीं मिलेंगे तो प्रोडक्शन कहां से करेंगे। दुनिया का बुरा हाल हो चुका है पंजाब का भी होने वाला है अब तो राम भरोसे।

बेड़ा गर्क हो जाएगाः रणधीर सिंह

न्यू हीरो इंडस्ट्री लुधियाना के मालिक रणधीर सिंह बताते हैं कि पंजाब में जितनी भी भटियां चलती हैं उनमें प्रवासी मजदूर ही काम करते हैं। अगर यह चले गए तो इंडस्ट्री का बेड़ा गर्क हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब में इंडस्ट्री का सारा दारोमदार बाहर से आने वाली 65 प्रतिशत लेबर पर टिका हुआ था। जब यह लेबर ही चली जाएगी तो बचेगा क्या, इंडस्ट्री तो बर्बाद है।

मुख्यमंत्री ने दी थी जानकारी

बता दें कि प्रवासी मजदूरों के पलायन के बारे में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिन्दर सिंह ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दी थी। उन्होंने अवगत कराया था कि अपने राज्यों में जाने के लिए 10 लाख मजदूरों ने पंजीकरण कराया है।

Updated on:
07 May 2020 11:37 am
Published on:
07 May 2020 11:21 am