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Scientist Resignation: गगनयान और चंद्रयान पर खतरा: ISRO के वैज्ञानिकों के इस्तीफे से क्या पड़ेगा असर?

Scientist Resignation ISRO: यह भारत के महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष कार्यक्रम का एक अहम दौर है। एक ओर इसरो (ISRO) गगनयान, चंद्रयान के अगले चरण और अन्य उन्नत अंतरिक्ष मिशनों की तैयारियों में जुटा है, वहीं दूसरी ओर संगठन से वैज्ञानिकों के बढ़ते इस्तीफे नई चिंता पैदा कर रहे हैं। पिछले एक दशक में सैकड़ों वैज्ञानिक इसरो छोड़ चुके हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में ही 100 से अधिक इस्तीफे हो चुके हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि क्या वैज्ञानिकों का संगठन छोड़ना भारत के भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की रफ्तार को प्रभावित कर सकता है?
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Jul 16, 2026
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इसरो के वैज्ञानिकों के लगातार इस्तीफे हो रहे हैं। (Photo: AI)

Scientist Resignation ISRO: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है। हाल के वर्षों में, गगनयान और चंद्रयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिक बड़े पैमाने पर हर साल संगठन छोड़ रहे हैं। यह स्थिति न केवल ISRO की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है, बल्कि भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों की सफलता पर भी सवाल उठाती है। ऐसे में यह जानना आवश्यक है कि इस्तीफों की असली वजह क्या है और क्या ISRO इन महत्वपूर्ण मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञता जुटा पा रहा है।

इस्तीफों की बढ़ती संख्या

ISRO के वैज्ञानिकों के इस्तीफे की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। एक साल में 100 से अधिक वैज्ञानिकों का इस्तीफा देना एक गंभीर संकेत है। यह स्थिति तब और चिंताजनक हो जाती है जब हम देखते हैं कि सरकार ने इस समस्या को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। अब वैज्ञानिकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा और न ही उन्हें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) की अनुमति दी जाएगी। यह कदम ब्रेन ड्रेन को रोकने के लिए उठाया गया है, लेकिन क्या यह पर्याप्त होगा?

10 वर्षों में 670 वैज्ञानिकों ने इसरो से दिया इस्तीफा

पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वैज्ञानिकों का इसरो छोड़ना कोई नई बात नहीं है। 2012 से 2017 के बीच 289 वैज्ञानिकों ने इस्तीफा दिया, जबकि 2018 से 2022 के बीच यह संख्या बढ़कर 381 हो गई। 2023 से मई 2024 तक भी 38 वैज्ञानिक संस्थान छोड़ चुके थे।

इसरो में 2500 से ज्यादा पद खाली

हालिया मीडिया रिपोर्टों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में 100 से अधिक वैज्ञानिकों के इस्तीफों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है, जिसके बाद अंतरिक्ष विभाग ने गगनयान और अन्य रणनीतिक परियोजनाओं से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफों की मंजूरी के नियम सख्त कर दिए हैं। दूसरी ओर, संसद में सरकार ने बताया कि इसरो में कुल 18,142 स्वीकृत पदों में से 15,529 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 2,613 पद अभी भी रिक्त हैं। इनमें वैज्ञानिक एवं तकनीकी श्रेणी के 1,636 पद खाली हैं। ऐसे में अनुभवी वैज्ञानिकों का संस्थान छोड़ना भविष्य की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं के लिए मानव संसाधन की चुनौती को और बढ़ा सकता है।

वैज्ञानिकों की कार्यक्षमता होगी प्रभावित

सरकार ने ISRO में इस्तीफों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कड़े नियम लागू किए हैं। वैज्ञानिकों के इस्तीफे को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है, लेकिन क्या यह समस्या का समाधान करेगा? ISRO के अधिकारियों का मानना है कि इस तरह के कदम से संगठन में स्थिरता आएगी। हालांकि, यह भी सच है कि जब वैज्ञानिकों को अपनी इच्छाओं के खिलाफ काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो इससे उनकी कार्यक्षमता और मनोबल पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इस्तीफे से मिशनों की सफलता पर पड़ेगा प्रभाव

गगनयान और चंद्रयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों के लिए विशेषज्ञता और संसाधनों की आवश्यकता होती है। यदि वैज्ञानिकों की संख्या में कमी आती है, तो इन अभियानों की सफलता पर खतरा मंडरा सकता है। ISRO को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसके पास पर्याप्त संख्या में अनुभवी वैज्ञानिक हों, जो इन मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा कर सकें। यदि इस्तीफों की यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो यह भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए एक बड़ा संकट बन सकता है।

क्या है इस्तीफे की असली वजह?

इस स्थिति के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ वैज्ञानिक बेहतर अवसरों की तलाश में हैं, जबकि अन्य संगठन के भीतर कार्य संस्कृति और संसाधनों की कमी से असंतुष्ट हैं। ISRO में काम करने वाले वैज्ञानिकों का मानना है कि उन्हें अपने काम के लिए उचित मान्यता और संसाधन नहीं मिल रहे हैं। यह असंतोष उन्हें अन्य क्षेत्रों में जाने के लिए प्रेरित कर रहा है।

इसरो की बढ़ेगी चुनौतियां

ISRO को भविष्य में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। गगनयान और चंद्रयान जैसे मिशनों की सफलता के लिए आवश्यक है कि संगठन में अनुभवी वैज्ञानिकों की संख्या बनी रहे। यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो ISRO को अपने मिशनों की योजना और कार्यान्वयन में गंभीर बदलाव करने पड़ सकते हैं।

इस स्थिति को देखते हुए, यह स्पष्ट है कि ISRO को अपने वैज्ञानिकों की संतुष्टि और उनकी कार्य संस्कृति को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। केवल इस तरह से ही संगठन अपने मिशनों की सफलता को सुनिश्चित कर सकता है और अंतरिक्ष अनुसंधान में अपनी स्थिति को मजबूत कर सकता है।