
India Groundwater Crisis: जीवन के लिए पानी अभिन्न घटक है। इंसान हो या जानवर पानी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक की दिनचर्या में इंसानों को पानी की जरूरत होती है। भारतीय मानक ब्यूरो और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक व्यक्ति को रोजाना 200 लीटर पानी की औसतन जरूरत होती है। इसमें पानी पीना, नहाना-धोना, साफ-सफाई, खाना पकाना आदि शामिल है। केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB), नीति आयोग और संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिपोर्ट्स बताती हैं कि भारत बड़े जल संकट की ओर बढ़ रहा है। भूजल हमारी जीवन रेखा है, लेकिन अत्यधिक दोहन, गलत कृषि नीतियों और शहरीकरण के कारण यह तेजी से खत्म हो रहा है।
केंद्रीय भूमि जल बोर्ड (CGWB) के 2025 के आकलन के मुताबिक, देश में कुल सालाना भूजल रिचार्ज 448.52 बिलियन क्यूबिक मीटर (BCM) है, जबकि निकासी योग्य संसाधन 407.75 BCM हैं। सालाना भूजल निकासी 247.22 BCM है, जो निकासी योग्य संसाधनों का 60.63% है। आकड़ों के मुताबिक, भारत दुनिया में सबसे ज्यादा भूजल निकालने वाला देश है। भारत में हर साल लगभग 250 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी निकाला जाता है, जो वैश्विक कुल निकासी का करीब 25% है। चीन, अमेरिका, पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब भी पानी का अधिक दोहन करने वाले देशों में शामिल हैं।
पानी नॉन-रिन्यूएबल संसाधन है। इसलिए इसका अत्यधिक दोहन जलवायु परिवर्तन और खेती की बढ़ती जरूरतों के साथ मिलकर संकट को और गहरा रहा है। भूजल निकासी में चीन भारत के ठीक पीछे है। चीन के उत्तरी इलाकों में इंडस्ट्री और खेती की जरूरतों के लिए बहुत ज्यादा पानी निकाला जाता है। इसके बाद जल निकासी की कड़ी में अमेरिका का नंबर आता है। अमेरिका के कैलिफोर्निया और टेक्सास में फसलों के लिए काफी मात्रा में पानी निकालता है। वहीं, पाकिस्तान के सिंधु बेसिन में ट्यूबवेल से कपास की खेती होती है और ईरान के सूखे इलाकों में गहरे एक्विफर (जमीन के नीचे पानी के भंडार) का इस्तेमाल होता है।
पंजाब: देश में सबसे ज्यादा भूजल संकट वाले राज्यों में पंजाब शामिल है। पंजाब में भूजल दोहन की दर 156.36% पहुंच गई है। इस राज्य का सालाना रिचार्ज 18.60 BCM है, लेकिन निकासी 26.27 BCM है। 153 ब्लॉकों में से 111 (72.55%) ओवर-एक्सप्लॉयटेड श्रेणी में हैं।
हरियाणा और राजस्थान: हरियाणा में पानी के दोहन दर 136% से अधिक है। पिछले दशक में कई जिलों में जलस्तर 5-7 मीटर नीचे चला गया है। राजस्थान में 302 ब्लॉकों में से 214 अति-दोहित हैं और दोहन दर 147.11% है।
दक्षिण भारत में जल संकट: बेंगलुरु जैसे शहरों में हर साल गर्मियों में जल संकट दिखता है। यहां हार्ड रॉक एक्विफर होने के कारण पानी रिचार्ज होने में सैकड़ों साल लगते हैं।
पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्य: बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और ओडिशा में दोहन 50% से कम है और जल स्तर अपेक्षाकृत बेहतर है, लेकिन आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रदूषण से पानी की गुणवत्ता खराब हो गई है।
भूजल संकट का सबसे बड़ा कारण दोषपूर्ण फसल चक्र है। कम वर्षा वाले क्षेत्रों जैसे- पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में गन्ना और धान जैसी पानी खपत वाली फसलों की खेती बड़े पैमाने पर हो रही है। इसके अलावा कई राज्यों में किसानों को मुफ्त या अत्यधिक सब्सिडी वाली बिजली उपलब्ध कराई जाती है, जिससे ट्यूबवेल बिना रुके चलते रहते हैं।
शहरी क्षेत्रों में तालाबों-झीलों को पाटकर निर्माण कार्य और कंक्रीट बिछाने से वर्षा जल रिचार्ज नहीं हो पाता। सरकारी प्रयास और सकारात्मक बदलावकेंद्र सरकार ‘जल शक्ति अभियान’ (JSA) के तहत भूजल संरक्षण और कृत्रिम रिचार्ज पर जोर दे रही है। 2019 से चल रहे इस मिशन के तहत पिछले चार वर्षों में 1.21 करोड़ जल संरक्षण कार्य पूरे किए गए हैं। सरकारी प्रयासों से सकारात्मक परिणाम भी दिख रहे हैं।
CGWB के अनुसार, 2017 से 2025 के बीच कुल वार्षिक भूजल पुनर्भरण 432 BCM से बढ़कर 448.52 BCM हो गया है। सुरक्षित इकाइयों का प्रतिशत 62.6% से बढ़कर 73.14% हो गया है, जबकि अत्यधिक दोहन वाली इकाइयों का प्रतिशत 17.2% से घटकर 10.8% रह गया है। आकड़े बताते हैं कि भारत में भूजल संकट गंभीर है, लेकिन पूरी तरह अपरिवर्तनीय नहीं। केंद्र सरकार अपनी विभिन्न योजनाओं के जरिए भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए काम कर रही है। भूजल बढ़ाने के लिए राज्यों को केंद्र सरकार तकनीकी और वित्तीय सहायता दे रही है।
देश में भूजल संसाधनों को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार मुख्य रूप से 'जल शक्ति अभियान' (JSA) चला रही है। यह अभियान जल शक्ति मंत्रालय द्वारा साल 2019 से चलाया जा रहा है। इसके अलावा फसल चक्र में सुधार, मुफ्त बिजली सब्सिडी की समीक्षा, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा और जागरूकता अभियान से स्थिति को सुधारा जा सकता है। अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो जल दिवालियापन का खतरा वास्तविकता बन सकता है, जो खाद्य सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आम जीवन को बुरी तरह प्रभावित करेगा।
जमीन की सतह के नीचे सेचुरेटेड जोन में मौजूद पानी को 'भूजल' कहा जाता है। इसकी ऊपरी सतह को वाटर टेबल कहते हैं। भूजल जमीन के नीचे रेत, बजरी और अन्य चट्टानों के नीचे की दरारों को भरता है। अगर भूजल चट्टानी सामग्रियों से प्राकृतिक रूप से बाहर बहता है या इसे पंपिंग के जरिए निकाला जाता है, तो उन चट्टानी सामग्रियों को 'एक्विफर' (Aquifers) कहा जाता है।
भूजल धीरे-धीरे चलता है, आमतौर पर एक्विफर में इसकी गति 7-60 सेंटीमीटर (3-25 इंच) प्रति दिन होती है। इसके परिणामस्वरूप पानी एक्विफर में सैकड़ों या हजारों सालों तक रह सकता है। संयुक्त राज्य अमेरिका में सार्वजनिक आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 40 प्रतिशत और खेती के लिए इस्तेमाल होने वाले पानी का लगभग 39 प्रतिशत हिस्सा भूजल से आता है।