महासमुंद

CG News: विवादित प्रश्न में राम नाम शामिल करने पर महासमुंद डीईओ निलंबित, बड़ी वित्तीय गड़बड़ी भी आई सामने

CG News: विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए विरोध-प्रदर्शन किया था और डीईओ के निलंबन की मांग की थी।

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Apr 29, 2026

CG News: महासमुंद जिले में स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए महासमुंद के जिला शिक्षा अधिकारी विजय कुमार लहरे को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान एक आपत्तिजनक प्रश्न पत्र तैयार करने और विभागीय लेखा-जोखा में गंभीर वित्तीय अनियमितता बरतने के आरोप हैं। मामला जनवरी माह में आयोजित अर्धवार्षिक परीक्षा से जुड़ा है। कक्षा चौथी के अंग्रेजी विषय के प्रश्न पत्र में एक सवाल पूछा गया था। इस प्रश्न के विकल्प के रूप में ए में बाला, बी में नो वन मेंशन, सी में शेरू और डी में राम लिखा गया था।

हिंदू धर्म के आराध्य देव के नाम का उपयोग कुत्ते के नाम के विकल्प के रूप में किए जाने पर भारी बवाल हुआ था। विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए विरोध-प्रदर्शन किया था और डीईओ के निलंबन की मांग की थी।

जांच में खुली लापरवाही की पोल

शासन द्वारा कराई गई जांच में पाया गया कि जिले की प्राथमिक शालाओं के लिए प्रश्न पत्रों का निर्धारण, मुद्रण और वितरण की पूरी जिम्मेदारी जिला शिक्षा अधिकारी की थी। इसके बावजूद विजय कुमार लहरे ने प्रश्न पत्र तैयार करने की प्रक्रिया के लिए कोई कार्य योजना नहीं बनाई। निलंबन आदेश के अनुसार, लहरे ने अपने कर्तव्यों के प्रति सजगता नहीं दिखाई और स्वेच्छाचारिता से कार्य किया। इस लापरवाही के कारण शिक्षा विभाग और शासन की छवि धूमिल हुई। साथ ही, अंकेक्षण रिपोर्ट में उनके कार्यकाल के दौरान विभागीय खातों में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताएं पाई गई हैं।

शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया

विजय कुमार लहरे का यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 के विपरीत पाया गया। निलंबन की अवधि में उनका मुख्यालय कार्यालय संभागीय संयुक्त संचालक, रायपुर नियत किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। इस कार्रवाई के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।

प्रश्नपत्र से लेकर ऑडिट तक कई अनियमितताएं सामने आईं

इनमें परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करने में लापरवाही, आपत्तिजनक प्रश्न से धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना, हाईकोर्ट से जुड़े मामलों में समय पर कार्रवाई न करना, विभागीय आदेशों की अवहेलना और लेखा परीक्षण (ऑडिट) में वित्तीय अनियमितताएं शामिल हैं।

आचरण नियमों के उल्लंघन पर निलंबन की कार्रवाई

शासन ने इस पूरे मामले को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 का उल्लंघन माना है। इसके तहत छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1966 के प्रावधानों के तहत निलंबन की कार्रवाई की गई है।

Updated on:
29 Apr 2026 04:01 pm
Published on:
29 Apr 2026 04:00 pm
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