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Weather Update: महासमुंद में धीमे मानसून ने बढ़ाई किसानों की चिंता, 2025 में फिर भी सामान्य से अधिक बारिश दर्ज, फसलों पर असर की आशंका

Monsoon Rain: आसमान में बादलों की आवाजाही के बावजूद मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों की तैयारी पूरी होने के बाद भी पर्याप्त बारिश न होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है।

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Monsoon

Monsoon: किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Monsoon 2026: आसमान में बादलों की आवाजाही है, कभी कुछ बूंदें भी गिर जाती हैं, लेकिन राहत अब भी दूर है। उमसभरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। दिनभर तेज धूप और गर्म हवाओं के बाद रात में भी चिपचिपी गर्मी पीछा नहीं छोड़ रही। हालात ऐसे हैं कि पंखे-कूलर भी राहत देने में नाकाम साबित हो रहे हैं। हल्की बारिश लोगों की उम्मीदें तो जगाती है, लेकिन उसके थमते ही उमस ज्यादा भारी हो जाती है।

अच्छी बारिश का इंतजार

मानसून की धीमी रफ्तार किसानों की चिंता बढ़ा रही है। जिले में अधिकांश किसानों ने खेतों की तैयारी पूरी कर ली है। धान समेत खरीफ फसलों की बुआई के लिए बीज और खाद का इंतजाम भी कर लिया गया है, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से किसान इंतजार परेशान हैं। एक-दो दिन की हल्की बारिश से खेतों में नमी नहीं बनती। अच्छी और लगातार बारिश के बाद ही बुआई शुरू हो सकती है। इस कारण अभी किसानों को अच्छी बारिश का ही इंतजार है।

आसमान में ललचाते बादल आगे बढ़ रहे

पिछले एक सप्ताह में जिले के कई हिस्सों में हल्की बारिश हुई, लेकिन इससे मौसम में ठंडक आने के बजाय वातावरण में नमी बढ़ गई। सोमवार रात भी कुछ मिनटों की बारिश हुई। लोगों को उम्मीद थी कि मौसम सुहाना होगा, लेकिन बारिश थमते ही उमस का असर फिर बढ़ गया। पूरी रात लोगों को बेचैनी, पसीने और गर्मी से जूझना पड़ा। गर्मी और उमस के बीच बिजली की अनियमित आपूर्ति ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रात के समय बिजली गुल होने पर घरों में रहना मुश्किल हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, जहां लोग देर रात तक बिजली बहाल होने का इंतजार करते रहते हैं। उधर, मानसून में हो रही देरी का असर खेती-किसानी पर भी साफ दिखाई देने लगा है। मानसून की दस्तक के साथ अच्छी बारिश होने से ही खेती-किसानी का काम शुरू होगा।

बारिश हुई, राहत नहीं मिली

महासमुंद जिले में पिछले एक सप्ताह के दौरान कई बार हल्की बारिश हुई, लेकिन यह बारिश लोगों को राहत देने के बजाय परेशानी बढ़ा रही है। बारिश के बाद वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे उमस पहले से ज्यादा महसूस होने लगती है। दिनभर पसीने से तरबतर लोग रात में भी चैन की नींद नहीं ले पा रहे हैं। कई इलाकों में लोग देर रात तक घरों के बाहर टहलते नजर आ रहे हैं, क्योंकि घरों के भीतर उमस अधिक महसूस हो रही है।

जलस्तर गिरने से बढ़ी पेयजल संकट की चिंता

भीषण गर्मी और लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण जिले में भूजल स्तर लगातार नीचे चला गया है। इसका असर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। कई इलाकों में लोगों के घरों में लगे नलकूप मार्च माह से ही सूख गए हैं, जिससे उन्हें पानी की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ रही है।

जानकारी के अनुसार पर्याप्त वर्षा होने पर ही भूजल स्तर में सुधार होगा और सूख चुके नलकूपों में फिर से पानी आने की संभावना बढ़ेगी। इधर, मौसम विभाग ने भी आगामी दिनों में वर्षा गतिविधियों में बढ़ोतरी के संकेत दिए हैं, जिससे पेयजल संकट से राहत मिलने की लोगों में उम्मीद जगी है।

मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जगाई

किसान खरीफ सीजन की तैयारियां पूरी कर चुके हैं। खेतों की जुताई और अन्य काम लगभग समाप्त हो चुके हैं, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से बुआई शुरू नहीं हो पा रही है। यदि जल्दबाजी में बीज डाल दिया गया और बारिश नहीं हुई तो दोबारा बोआई करनी पड़ सकती है, जिससे लागत बढ़ जाएगी। हालांकि मौसम विभाग ने राहत की उम्मीद जगाई है।

विभाग के अनुसार अगले चार से पांच दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। प्रदेश में वर्षा गतिविधियां बढ़ने के संकेत हैं और छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है। यदि बारिश होती है तो लोगों को उमस से राहत मिल जाएगी। मंगलवार को भी शाम को मौसम बदला पर बारिश नहीं हुई।

2025 में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज

इसी बीच साल 2025 के बारिश के आंकड़े राहत देने वाली तस्वीर पेश कर रहे हैं। इस वर्ष छत्तीसगढ़ में मानसून ने लगभग 15 दिन पहले दस्तक दी थी और 28 मई को राज्य में प्रवेश किया था। मानसून 16 अक्टूबर 2025 तक सक्रिय रहा। इस दौरान प्रदेश में कुल 1191.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जो सामान्य से लगभग 4% अधिक है।

डैमों में बढ़ा जलस्तर, 14% का बड़ा अंतर

प्रदेश के 11 प्रमुख डैमों में भी इस बार पानी की स्थिति पिछले वर्ष की तुलना में बेहतर रही। औसतन करीब 39 प्रतिशत जलभराव दर्ज किया गया। वहीं 2024 में इसी अवधि तक इन डैमों में केवल 23.80 प्रतिशत पानी ही भरा था। यानी इस बार लगभग 14 प्रतिशत का सुधार देखने को मिला है। सबसे ज्यादा लाभ रविशंकर सागर डैम को हुआ है, जहां 2024 में 9 जुलाई तक मात्र 4.91 प्रतिशत पानी था, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 48.48 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

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