
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में होगी झमाझम बारिश (photo Patrika)
CG Monsoon: कभी काले बादलों का डेरा, कभी रिमझिम फुहारें और फिर कुछ ही देर में लौट आती उमसभरी गर्मी। महासमुंद में इन दिनों मौसम का यही बदलता मिजाज लोगों को रोज नए अनुभव दे रहा है। बारिश हो रही है, लेकिन उसका असर हर जगह एक जैसा नहीं है। कहीं अच्छी बरसात दर्ज हो रही है तो कहीं केवल हल्की बूंदाबांदी से ही संतोष करना पड़ रहा है। हालांकि, मौसम विभाग का कहना है कि यह स्थिति अब बदलने वाली है। प्रदेश के ऊपर एक साथ सक्रिय कई मौसम प्रणालियों के कारण मानसून को लगातार मजबूती मिल रही है।
इसके प्रभाव से अगले सप्ताह महासमुंद सहित आसपास के इलाकों में बारिश का दायरा बढऩे और कई स्थानों पर तेज से भारी वर्षा होने की संभावना है। पिछले कुछ दिनों से जिले में मौसम बार-बार करवट बदल रहा है। सुबह धूप निकलने के बाद दोपहर तक बादल घिर आते हैं और कई क्षेत्रों में बारिश भी होती है। वर्षा थमते ही वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जिससे उमसभरी गर्मी लोगों की परेशानी बढ़ा देती है। यही वजह है कि थोड़ी देर की बारिश भी लंबे समय तक राहत नहीं दे पा रही है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल प्रदेश के ऊपर ऐसी परिस्थितियां बन रही हैं, जो व्यापक वर्षा के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। अलग-अलग स्थानों पर सक्रिय मौसमी तंत्र लगातार अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमी खींच रहे हैं।
यही नमी बादलों को मजबूती दे रही है और वर्षा की गतिविधियों को बढ़ा रही है। यदि इन प्रणालियों का असर बना रहा तो आने वाले दिनों में बारिश की तीव्रता और क्षेत्र दोनों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि अगले सप्ताह कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पडऩे की भी संभावना है। लगातार बादल छाए रहने और वर्षा की आवृत्ति बढऩे से तापमान में गिरावट आएगी।
प्रदेश में मानसून की सक्रियता इस समय कई मौसम प्रणालियों के एक साथ प्रभावी होने से बनी हुई है। समुद्र तल पर मानसून द्रोणिका श्रीगंगानगर, रोहतक, हरदोई, वाराणसी, रांची और सागर द्वीप से होते हुए उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। इसके साथ ही उत्तरी झारखंड और उससे लगे बिहार के ऊपर ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है, जिससे त्रिपुरा तक एक द्रोणिका विकसित हो गई है। पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी और उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश के ऊपर भी चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। इसके अलावा उत्तरी बिहार से उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी तक झारखंड और गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल से होकर एक अन्य द्रोणिका भी बनी हुई है। दक्षिणी ओडिशा के ऊपर मौजूद चक्रवाती परिसंचरण अब उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश और दक्षिणी छत्तीसगढ़ तक पहुंच चुका है। आने वाले दिनों में वर्षा की गतिविधियां तेज रहने, कई स्थानों पर मध्यम से भारी बारिश होने और कहीं-कहीं तेज बौछारें पड़ सकती है।
महासमुंद जिले में इन दिनों खंड वर्षा की स्थिति बनी हुई है। इसका मतलब यह है कि पूरे जिले में एक साथ बारिश नहीं हो रही, बल्कि अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग समय पर वर्षा दर्ज की जा रही है। कहीं तेज बारिश होती है तो कुछ किलोमीटर दूर केवल हल्की फुहारें पड़ती हैं या मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहता है। इस वजह से वातावरण में नमी लगातार बनी रहती है, लेकिन धरातल की गर्मी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाती। बारिश रुकने के बाद यही नमी उमसभरी गर्मी का एहसास बढ़ा देती है। मौसम के बदलते स्वरूप के कारण लोगों को एक ही दिन में धूप, बादल, फुहार और उमस—चारों तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
अब तक 424.4 मिमी औसत वर्षा
चालू मानसून के दौरान 1 जून से अब तक 424.4 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है। भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार जिले में सर्वाधिक औसत वर्षा पिथौरा तहसील में 565.9 मिमी, सरायपाली में 511.1 मिमी, महासमुंद में 413.4 मिमी, बागबाहरा में 364.6 मिमी, बसना में 356.5 मिमी और सबसे कम वर्षा 335.4 मिमी कोमाखान तहसील में दर्ज की गई। 20 जुलाई को 13 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई। जिले के तहसीलवार वर्षा में महासमुंद तहसील में 29.7 मिमी, कोमाखान में 20 मिमी, पिथौरा में 15.6 मिमी, बागबाहरा में 12 मिमी एवं सरायपाली तहसील में 0.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
Updated on:
21 Jul 2026 12:04 pm
Published on:
21 Jul 2026 12:02 pm
