महासमुंद

Paddy procurement: समर्थन मूल्य पर धान बेचने किसानों ने बढ़ाया रुझान, महासमुंद में अब तक 3 हजार नए किसानों का पंजीयन

Paddy Procurement: समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए अब तक 3 हजार नए किसानों का पंजीयन हुआ है। 1.59 लाख पुराने किसानों का डाटा कैरीफॉरवर्ड किया गया है।
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Oct 06, 2026
Paddy procurement
जिला सहकारी केंद्रीय बैंक (photo Patrika)

Paddy procurement: महासमुंद में समर्थन मूल्य पर धान बेचने की तैयारी के साथ महासमुंद जिले में किसानों का पंजीयन तेजी से बढ़ रहा है। अगस्त से शुरू हुए नए किसान पंजीयन में अब तक करीब 3 हजार किसान जुड़ चुके हैं। पंजीयन की प्रक्रिया नवंबर तक जारी रहेगी, ऐसे में नए किसानों की संख्या अभी और बढ़ने की संभावना है। पिछले साल जिले में 5,354 नए किसानों ने पंजीयन कराया था। इस बार भी बड़ी संख्या में किसानों के नए पंजीयन कराने से आगामी धान खरीदी सीजन में समितियों और खरीदी केंद्रों पर किसानों की संख्या और धान की आवक बढ़ने की संभावना है।

किसानों का रिकॉर्ड भी अपडेट

धान खरीदी के लिए जिले में पहले से पंजीकृत किसानों का रिकॉर्ड भी अपडेट कर लिया गया है। पिछले वर्ष के करीब 1 लाख 59 हजार किसानों का डाटा कैरीफॉरवर्ड किया गया है। यानी इस खरीदी सीजन में पुराने किसानों के साथ नए पंजीकृत किसान भी शामिल होंगे। किसानों की संख्या बढ़ने के साथ खरीदी केंद्रों पर धान की आवक, बारदाने, तौल और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर अतिरिक्त तैयारी की जरूरत पड़ सकती है।

नवंबर तक जारी रहेगा नए किसानों का पंजीयन

समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए किसानों का पंजीयन अनिवार्य है। इसी के तहत जिले में अगस्त से नए किसानों के नाम दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अब तक लगभग 3 हजार किसान पंजीयन की प्रक्रिया पूरी कर चुके हैं। अधिकारियों के मुताबिक यह अंतिम आंकड़ा नहीं है, क्योंकि नवंबर तक पंजीयन की प्रक्रिया जारी रहेगी। ऐसे किसान, जो किसी कारण से अब तक पंजीयन नहीं करा पाए हैं, उन्हें भी नवंबर तक प्रक्रिया पूरी करने का अवसर मिलेगा। पिछले साल 5,354 नए किसानों ने पंजीयन कराया था।

नए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी

इस वर्ष शुरुआती दौर में करीब 3 हजार नए किसानों के जुड़ने से माना जा रहा है कि अंतिम आंकड़ा भी काफी बढ़ सकता है। जिला सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि नए किसानों के पंजीयन की प्रक्रिया जारी है और नवंबर तक चलेगी। उन्होंने बताया कि किसानों को खेती-किसानी के लिए ऋण उपलब्ध कराने का काम भी जारी है और इस बार ऋण वितरण निर्धारित लक्ष्य से आगे निकल चुका है।

500 करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले 506 करोड़ का ऋण वितरण

खरीफ सीजन में किसानों को खाद, बीज, दवा सहित अन्य कृषि जरूरतों के लिए अल्पकालीन ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में महासमुंद जिले के लिए 500 करोड़ रुपए ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके मुकाबले अब तक 84 हजार 989 किसानों को 506 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया जा चुका है।

किसानों ने अब तक करीब 109 करोड़ रुपए का ऋण लिया

इसमें पिथौरा क्षेत्र के किसान सबसे आगे रहे हैं। यहां के किसानों ने अब तक करीब 109 करोड़ रुपए का ऋण लिया है। किसानों को निर्धारित व्यवस्था के तहत शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पकालीन कृषि ऋण उपलब्ध कराया जाता है। ऋण की राशि में करीब 30 प्रतिशत खाद-बीज और 70 प्रतिशत नकद के रूप में दी जाती है। अब तक किसानों ने करीब 418 करोड़ रुपए नकद ऋण लिया है। इससे कृषि कार्यों के लिए किसानों की ऋण मांग का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पिछले वर्षों की तुलना में इस बार ऋण वितरण आगे

आंकड़ों के अनुसार पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में 434 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले 414 करोड़ रुपए का ऋण वितरण हुआ था। वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में 500 करोड़ रुपए के लक्ष्य के विरुद्ध 424 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया गया था। इस बार 500 करोड़ रुपए के लक्ष्य के मुकाबले अब तक 506 करोड़ रुपए का ऋण वितरण हो चुका है।

धान खरीदी की तैयारी भी तेज

धान खरीदी का नया सीजन नजदीक आने के साथ ही प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। अगले महीने से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने की तैयारी है। इसे देखते हुए जिले की समितियों में आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की प्रक्रिया चल रही है। खरीदी केंद्रों पर किसानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बारदाने, तौल व्यवस्था और धान के सुरक्षित भंडारण सहित अन्य व्यवस्थाओं को समय रहते दुरुस्त किया जा रहा है। पीडीएस से प्राप्त बारदाने संबंधित समितियों को उपलब्ध कराए जाएंगे।

किसानों का रिकॉर्ड कैरीफॉरवर्ड

पुराने किसानों का रिकॉर्ड कैरीफॉरवर्ड होने और नए किसानों के पंजीयन का आंकड़ा बढ़ने के बाद इस बार खरीदी केंद्रों पर पिछले सीजन की तुलना में अधिक गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में धान खरीदी शुरू होने से पहले समितियों के सामने किसानों की संख्या और संभावित धान आवक के अनुरूप व्यवस्थाएं तैयार रखने की चुनौती रहेगी।

Updated on:
06 Oct 2026 09:46 am
Published on:
06 Oct 2026 09:46 am