
Paddy Procurement 2026: धान खरीदी की तारीख नजदीक है, लेकिन जिले के सैकड़ों किसान अब भी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। किसी का एग्रीस्टैक पंजीयन अटका है तो किसी के खसरा संबंधी रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण फार्मर आईडी नहीं बन पाई है। किसान पंजीयन की निर्धारित समय-सीमा 31 अक्टूबर को समाप्त हो चुकी है। इसके बावजूद 363 किसानों की फार्मर आईडी अधूरी है।
15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होनी है। प्रशासन ने 202 खरीदी केंद्रों में व्यवस्था बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रों में साफ-सफाई और अन्य आवश्यक इंतजाम किए जा रहे हैं। खरीफ सीजन में कुल 1 लाख 61 हजार 874 किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीयन कराया है। इनमें 3974 नए किसान हैं। पटवारियों की हड़ताल ने पंजीयन संबंधी कामकाज को प्रभावित किया है। किसानों के भूमि संबंधी दस्तावेजों के सत्यापन और खसरा रिकॉर्ड में सुधार नहीं हो पाने से एग्रीस्टैक की प्रक्रिया पूरी नहीं हो रही है।
कई किसान निर्धारित समय के भीतर आवेदन और जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए प्रयासरत रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। धान खरीदी के समय इस तरह की दिक्कतें हर साल सामने आती हैं। सहकारी समितियों के कर्मचारी आंदोलन पर चले जाते हैं तो कभी राजस्व अमले की हड़ताल से किसानों के काम प्रभावित होते हैं।
व्यवस्था से जुड़ी इन अड़चनों का सीधा असर उन किसानों पर पड़ता है, जिनकी पूरी साल की मेहनत खरीफ फसल पर निर्भर रहती है। किसान नेताओं का कहना है कि पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाई जानी चाहिए, छूटे हुए किसानों को भी प्रक्रिया पूरी करने का मौका मिल सके। पिछले खरीफ सीजन में जिले में करीब 110 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी। इस बार भी खरीदी को लेकर तैयारियां जारी हैं।
फार्मर आईडी से जुड़ी समस्याओं का समाधान समय रहते नहीं हुआ तो खरीदी शुरू होने के दौरान केंद्रों में भी परेशानी खड़ी हो सकती है। नोडल अधिकारी अविनाश शर्मा ने बताया कि नए किसान पंजीयन और एग्रीस्टैक पंजीयन की समय-सीमा बढ़ाने को लेकर अभी कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है। जिले में अब तक 3974 नए किसानों ने पंजीयन कराया है।
खरीफ सीजन में सहकारी समितियों के माध्यम से जिले के 85 हजार 779 किसानों को 517 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया गया है। इस वर्ष ऋण वितरण के लिए 500 करोड़ रुपए का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन समितियों ने इससे अधिक राशि किसानों तक पहुंचाई। खेती-किसानी के लिए खाद, बीज और आवश्यकताओं की पूर्ति में सहकारी ऋण से मदद मिलती है।
महासमुंद जिले में 363 किसान ऐसे हैं, जिनका एग्रीस्टैक पंजीयन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इनके मामलों में मुख्य रूप से खसरा संबंधी समस्याएं सामने आई हैं। भूमि रिकॉर्ड में आवश्यक जानकारी का मिलान और सुधार नहीं होने से फार्मर आईडी बनाने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। धान खरीदी में शामिल होने के लिए किसान पंजीयन के साथ फार्मर आईडी भी जरूरी है। किसानों को उपज बेचने में दिक्कत आ सकती है।