महोबा

Mahoba Crime: पत्नी और दो मासूम बेटियों के हत्यारे पिता को मिली फांसी, महिला जज ने कहा- मरने तक फंदे पर लटकाया जाए

Mahoba News: महोबा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पत्नी और दो मासूम बेटियों की हत्या के दोषी पिता देवेंद्र विश्वकर्मा को फांसी की सजा सुनाई है। वर्ष 2023 में शराब के नशे में आरोपी ने सिलबट्टे से पत्नी और दोनों बेटियों की निर्मम हत्या कर दी थी।

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Jun 03, 2026
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पत्नी और दो मासूम बेटियों के हत्यारे पिता को फांसी की सजा (इमेज- पत्रिका)

Father Gets Death Sentence: उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में पत्नी और दो मासूम बेटियों की निर्मम हत्या करने वाले पिता को आखिरकार उसके अपराध की सख्त सजा मिल गई। महोबा की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आरोपी देवेंद्र विश्वकर्मा को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी का अपराध अत्यंत जघन्य और समाज को झकझोर देने वाला है। महिला न्यायाधीश अपर्णा त्रिपाठी ने आदेश देते हुए कहा कि दोषी को फांसी के फंदे पर तब तक लटकाया जाए, जब तक उसकी मृत्यु न हो जाए। अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

शराब की लत ने परिवार को तबाह कर दिया

यह सनसनीखेज मामला 17 जुलाई 2023 का है। महोबा शहर कोतवाली क्षेत्र के समदनगर मोहल्ले में रहने वाला देवेंद्र विश्वकर्मा शराब का आदी था। शराब की वजह से उसका अपनी पत्नी राजकुमारी के साथ अक्सर विवाद होता रहता था। घर का माहौल लगातार तनावपूर्ण बना रहता था और आरोपी अपनी दोनों बेटियों के साथ भी अच्छा व्यवहार नहीं करता था। पड़ोसियों के अनुसार परिवार में आए दिन झगड़े होते थे, जिससे घर का वातावरण अशांत रहता था।

एक रात में उजड़ गया पूरा परिवार

घटना वाली रात देवेंद्र शराब के नशे में घर पहुंचा था। किसी बात को लेकर उसकी पत्नी राजकुमारी से कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते गंभीर विवाद में बदल गई। गुस्से में बेकाबू हुए देवेंद्र ने घर में रखा सिलबट्टा उठाया और पत्नी पर जानलेवा हमला कर दिया। हमले में राजकुमारी गंभीर रूप से घायल हो गई और मौके पर ही दम तोड़ दिया।

सोती हुई बेटियों पर भी नहीं आया रहम

पत्नी की हत्या करने के बाद भी आरोपी का गुस्सा शांत नहीं हुआ। घर के अंदर कमरे में उसकी दो मासूम बेटियां, 9 वर्षीय आरुषि और 6 वर्षीय सोनाक्षी सो रही थीं। आरोपी ने दोनों बच्चियों पर भी सिलबट्टे से ताबड़तोड़ वार कर दिए। सिर पर किए गए लगातार हमलों से दोनों बच्चियों की मौके पर ही मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया था।

हत्या के बाद फरार हो गया आरोपी

तीनों हत्याएं करने के बाद देवेंद्र घर से फरार हो गया। घटना की जानकारी मिलने पर आसपास के लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने घर के अंदर पत्नी और दोनों बेटियों के शव बरामद किए। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और आरोपी की तलाश शुरू कर दी।

24 घंटे के भीतर पुलिस ने किया गिरफ्तार

महोबा पुलिस ने घटना के अगले ही दिन आरोपी देवेंद्र विश्वकर्मा को गिरफ्तार कर लिया था। पूछताछ और जांच के दौरान पुलिस को कई महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले, जिन्होंने आरोपी के खिलाफ मामला मजबूत किया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया था।

फॉरेंसिक साक्ष्य बने सबसे मजबूत कड़ी

मामले की जांच के दौरान पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। हालांकि घटना के समय कोई प्रत्यक्षदर्शी मौजूद नहीं था, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्य, घटनास्थल से मिले सबूत और जांच रिपोर्ट पूरी तरह आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि कर रहे थे। यही कारण रहा कि अभियोजन पक्ष अदालत में आरोपी के खिलाफ मजबूत मामला पेश करने में सफल रहा।

9 गवाहों की गवाही से मजबूत हुआ केस

सुनवाई के दौरान अदालत में कुल 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। इनमें पांच पुलिसकर्मी, एक डॉक्टर तथा मृतक महिला के परिजन शामिल थे। सभी गवाहों की गवाही, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट ने अभियोजन पक्ष के दावों को मजबूती प्रदान की। जिला शासकीय अधिवक्ता दिनेश सिंह और सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता सुरेंद्र प्रताप राजपूत ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा।

कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई

सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का गहन परीक्षण करने के बाद अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी ने अत्यंत क्रूर और अमानवीय तरीके से अपनी पत्नी और दो मासूम बेटियों की हत्या की थी। अदालत ने इसे दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए फांसी की सजा सुनाई। न्यायालय ने कहा कि ऐसे अपराध समाज के लिए गंभीर खतरा हैं और इनके लिए कठोरतम दंड आवश्यक है।

फैसले से पीड़ित परिवार को मिला न्याय

करीब तीन साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को पीड़ित पक्ष और स्थानीय लोगों ने न्याय की जीत बताया है। अदालत के इस निर्णय को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले जघन्य अपराधों के विरुद्ध एक सख्त संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। महोबा का यह मामला प्रदेश के चर्चित हत्याकांडों में शामिल रहा और अब अदालत के फैसले के बाद इसे न्यायिक रूप से निर्णायक मुकाम मिल गया है।