मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा कई योजनाएं आरंभ की गई हैं।
शायद आप नहीं जानते होंगे परन्तु यह सच है कि मानव संसाधन मंत्रालय के आंकड़ों के हिसाब से भारत में 1.2 करोड़ दिव्यांग बच्चों में से केवल 1 फीसदी स्कूल जाते हैं। रोजगार के मामले में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में 60.21 फीसदी रोजगार की तुलना में लगभग 63.66 प्रतिशत दिव्यांग आबादी बेरोजगार है। यह आंकड़े जितना हैरान करते हैं, उतने ही चिंताजनक भी हैं।
हाशिए पर आ गई दिव्यांग आबादी के प्रति समाज के दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के लिए शिक्षा की कहानी को नए सिरे से लिखे जाना ही समाधान है। भारत सरकार ने दिव्यांग छात्रों को सशक्त बनाने के लिए कई नई पहल शुरू की हैं। इनमें मानव संसाधन मंत्रालय द्वारा कई योजनाएं आरंभ की गई हैं। उदाहरण के लिए-
1. सरकार किसी दिव्यांग छात्र की पुस्तकों, पोशाक और परिवहन पर किए गए सभी खर्चों की प्रतिपूर्ति करेगी।
2. प्रत्येक बालिका को 200 रुपए प्रति माह दिए जाएंगे
3. सभी शैक्षणिक निकायों के दाखिलों में 5 फीसदी दिव्यांग छात्रों के लिए आरक्षित होंगे
इसके अतिरिक्त भी ऐसे छात्रों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विभिन्न प्रकार की कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं के लिए अप्लाई कर दिव्यांग छात्र भी साधारण छात्रों की ही तरह पढ़-लिख कर आगे बढ़ सकते हैं। इन स्कीम्स की अधिक जानकारी आप मानव संसाधन मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://mhrd.gov.in/schemes अथवा http://samagra.mhrd.gov.in/ से प्राप्त कर सकते हैं।