Success Mantra: सालों की मेहनत के बाद ही स्टार्टअप फाउंडर उस स्थिति में आते हैं, जब वे अपने कंपनी की हर जरूरत को पूरा कर पाते हैं और आखिरकार मेंटोर बन जाते हैं।
Success Mantra: एंटरप्रेन्योरशिप एक ऐसा शब्द है, जो आज की जेनरेशन जेड की जुबान पर है। प्लानिंग और स्ट्रेटेजी से लेकर क्लाइंट, यहां कि अकाउंट्स देखना जैसी कई चीजें किसी भी एंटरप्रेन्योर के लिए मायने रखती है। हालांकि इस एंटरप्रेन्योरियल यात्रा रोमांचक लगती है लेकिन कुछ गलतियां इसे पटरी से उतार सकती हैं और आपका सपना पूरा होने से पहले ही टूटकर बिखर सकता है।
एक दिन में नहीं बना रोम
सालों की मेहनत के बाद ही स्टार्टअप फाउंडर उस स्थिति में आते हैं, जब वे अपने कंपनी की हर जरूरत को पूरा कर पाते हैं और आखिरकार मेंटोर बन जाते हैं। आपको भी लगता है कि आप ऐसी मेहनत कर लेंगे लेकिन कई बार छोटी गलतियां या कुछ बड़े नुकसान धक्का देते हैं। ऐसे में आपको स्टार्टअप की शुरुआत में ही सारे प्लान बनाकर इस रोलर कोस्टर राइड पर सवार होना पड़ेगा, जो आपको कभी ऊपर ले जाएगी और कभी नीचे।
नो पेन नो गेन
स्टीव जॉब्स ने भी एक बार कहा था कि कई बार ऐसा भी होता है कि लोग यह जान ही नहीं पाते कि उन्हें क्या चाहिए, जब तक कि उन्हें दिखाया या बताया न जाए। इसलिए मार्केट रिसर्च भी उतनी ही जरूरी है जितने कस्टमर्स। आपको नॉलेज के लिए पेन उठाने ही होंगे। बहुत सारे सर्वे करवाएं। याद रखें, एक बार कस्टमर्स और उनकी जरूरत की समझ आपको हो गई तो बिजनेस वल्र्ड में सफल होने से आपको कोई नहीं रोक सकता।
एंप्लॉई संपत्ति हैं
एंप्लॉइज को मैनेज करना भी एक स्किल है, जो धीरे-धीरे आती है। एंप्लॉइज को जब कंपनी के सीईओ होने के नाते आप अच्छी तरह प्रेरित करते हैं तो वे भी कंपनी के लिए बहुत कुछ कर गुजरते हैं। हमेशा याद रखें कि ये एंप्लॉइज आपकी असली संपत्ति हैं। उन्हें ट्रेन्ड करें, कोच करें, उन्हें मेंटोर करें और उन्हें अपनी ग्रोथ का हिस्सा बनाकर उन्हें समय-समय पर यह जताएं कि आप उनकी कीमत समझते हैं। वे हमेशा खुश होकर काम करेंगे और कंपनी को ग्रोथ देंगे।