दत्तात्रेय महाराज के बाद दीनदयाल पावले दे रहे सेवा
मंडला. जिला मुख्यालय से महज 10 किमी दूर स्थित गाजीपुर रोड से लगे जिलहरी घाट एक ऐतिहासिक स्थल माना जाता है। जहां दूर दराज के लोग यहां घूमने व पिकनिक मनाने आते है यहां का नजारा वाटर फॉल के कारण आकर्षण का केंद्र बन गया है। यहां विगत कई सालों से सेवाएं दे रहे दीनदयाल पावले ने बताया कि यहां सतयुग के जमाने में दत्तात्रेय महाराज एवं देवताओं ने चित्रकूट से लेकर उड़ीसा तक के दैत्यों को मार कर जिलहरी घाट में डाले थे। यहां पर जो बीच में कापू बना है। जिसके कारण यहां का नाम जिलहरी घाट पड़ा है। यहां रोजाना दर्जनों की संख्या में लोग आते है। मंदिर परिसर के पास दत्तात्रेय महाराज की प्रतिमा भी बनाई गई है। यहां एक तरफ शंकर जी का शिवलिंग है तो दूसरी तरफ, आकर्षण का केन्द्र बना नर्मदा जी का अथक जल है।
नर्मदा जयंती पर होता है भव्य कार्यक्रम
धार्मिक स्थल के रूप से पहचान रखने वाले जिलहरी घाट में समय-समय पर हवन पूजन भंडारा का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि व नर्मदा जयंती का पर्व भव्यता के साथ मनाया जाता है। संतो के समागम में भी दूर-दूर से साधु संत यहां पहुंचते हैं। नर्मदा परिक्रमा करने वाले परिक्रमा वासियों के रुकने की व्यवस्था भी यहां की जाती है।
धार्मिक स्थल के रूप से पहचान रखने वाले जिलहरी घाट में समय-समय पर हवन पूजन भंडारा का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि व नर्मदा जयंती का पर्व भव्यता के साथ मनाया जाता है। संतो के समागम में भी दूर-दूर से साधु संत यहां पहुंचते हैं। नर्मदा परिक्रमा करने वाले परिक्रमा वासियों के रुकने की व्यवस्था भी यहां की जाती है।