
हाईवे मार्ग पर बंदरों के झुंड, ग्रामीण परेशान
मंडला। मंडला से जबलपुर नेशनल हाईवे 30 मार्ग में ग्राम उदयपुर व उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों से ग्रामीण परेशान है। बंदरों के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल बना रहता है। इस समस्या से निजात के लिए कई बार ग्रामीणों ने बंदरों का रेस्क्यू करने की मांग की जा चुकी है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। यहां वन विभाग के द्वारा हाइवे के किनारे सिर्फ बोर्ड लगाया दिया गया है।
वन विभाग द्वारा लगाए गए बोर्ड में लिखा है कि बंदरो को किसी भी प्रकार की खाद्य साम्रगी नहीं दे। रेस्क्यू नहीं किए जाने को लेकर ग्रामीणो में रोष देखा जा रहा है। बताया गया है कि बदरों के आंतक से परेशान ग्रामीणो की वन विभाग के अफसरो ने नहीं सुनी है। इसके बाद ग्रामीणों के द्वारा सीएम हेल्पलाइन 181 में भी शिकायत दर्ज कराई गई, इसके बाद भी इस ओर किसी का ध्यान नहीं है।
ग्रामीणो ने बताया है कि उदयपुर में बंदरो का आतंक इतना है की लोग अपने घरो तक में सुरक्षित नहीं है। हाइवे के किनारे घर एवं दुकानों में बंदर कभी भी हमला कर देते है और खाने पीने का सामान इनके द्वारा उठा कर ले जाते है। स्कूली बच्चों पर हमला कर उनका टिफिन तक उड़ा लेते है। आय दिन बंदरों का हमलो बढ़ते जा रहे है।
बंदर हमला झुण्ड बनाकर करते है और ठिकाना कारखानों में रहता है। इनकी बढ़ती जनसंख्या को देखकर लोगो में भय का माहोल है। छोटे बच्चों को घरो में ही रखना पड़ता है। इन सब समस्याओं को देखते हुये वन विभाग के द्वारा बस बोर्ड लगाये गए है। अभी तक इनको पकडऩे का रेस्क्यू नहीं किया जा रहा है। वन विभाग के अफसरों का कहना है कि विभाग के पास बंदर पकडऩे के संसाधन और फंड नहीं है।
रोज करते है नुकसान:
उदयपुर के होटल संचालकों का कहना है कि क्षेत्र में सैकड़ों की तदाद में बंदरों की संख्या है। जिसके कारण यहां घर और मार्ग किनारे स्थित होटलों में इनका आंतक फैला हुआ है। अचानक दुकानों में आकर कोई भी खाने पीने का सामान उठाकर भाग जाते है। किसानों की फसलों को भी नुकसान पहुंचा रहे है। इनके कारण पूरे क्षेत्र में आर्थिक नुकसान के साथ शरीरिक क्षति भी पहुंच रही है। जल्द ही इनकी व्यवस्था प्रशासन को करनी चाहिए।
वन विभाग के पास नहीं है फंड :
ग्रामीणों ने बताया गया कि बंदरों की समस्या के लिए कई बार विभाग समेत सीएम हेल्पलाईन में शिकायत की गई है, लेकिन इनका निराकरण नहीं हो पाया है। विभाग से इन बंदरो को पकडऩे के लिए बात की जाती है कि तो विभाग का कहना होता है कि हमारे पास इन बंदरों को पकडऩे के लिए कोई फंड नहीं है। बंदरों को पकडऩे के लिए जिला पंचायत में फंड आता है। बताया गया कि इन बंदरों को पकडऩे के लिए यहां कोई प्रशिक्षित नहीं है, इनको पकडऩे के लिए मथुरा से टीम को बुलाना पड़ेगा। लेकिन बंदरों को पकडऩे का भुगतान भी इन्हें करना पड़ता है, जो वन विभाग के पास नहीं है। इस कारण विभाग यहां सिर्फ सूचना बोर्ड लगाकर अपनी इतिश्री कर रही है।