
मंदसौर.
शहर में रामकथा का वाचन कर रहे संत चिन्मयानंदजी ने शनिवार को दोपहर में माहेश्वरी धर्मशाला में पत्रकारवार्ता की। उन्होंने कहा कि संत समाज, जागरूक लोगों का कर्तव्य है हमारी सनातनी धर्म और संस्कृति को बचाना। संस्कृति को खत्म करने का एक सुनियोजित तरीके से षड्यंत्र रचा जा रहा है। सनातनी परंपराएं और संस्कृति इतनी मजबूत है कि मुगल और अंग्रेज भी इसे खत्म नहीं कर पाए लेकिन अंग्रेज जाते-जाते हमारी मानसिकता में जो अंग्रेजी का और पश्चिमी सभ्यता का बीजारोपण कर गए उसक कारण हमारी संस्कृति को खतरा उत्पन्न होने लगा है। आज हम स्वयं ही हमारी संस्कृति के सबसे बड़े दुश्मन हो गए है। पश्चिमी सभ्यता हमारे उपर हावी है।
संत ने बताया कि मंदसौर में उनकी यह 6 टीं रामकथा है वे जब भी यहां आते है। भगवान पशुपतिनाथ की नगरी में उन्हें अच्छा और सुखद अनुभव होता है। उन्होंने बताया कि संपूर्ण मालवाचंल में मंदसौर के लोग सर्वाधिक संस्कारवान है और धर्म को समझते है। उन्होंने बताया कि मेरा एक मात्र उद्येश्य है। सनातन धर्म और संस्कृति की रक्षा करते हुए उसका व्यापक प्रचार प्रचार करना। उन्होंने कहा कि मैंने कथा के दौराना भी कहा था यहां भी कह रहा हूं कि हम स्वयं ही ब्राह्मणों आचार्यो का काम करने लगें है जो घातक है आजकल कई आर्टिफिशियल ब्राह्मण पैदा हो गए है लेकिन गुलाब को कितना भी निखारा जाए वह कमल नहीं बन सकता और ब्राह्मणों के बारे में भी कहा कि ब्राह्मणों आचार्यो को भी अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए।
अपने धर्म के प्रति कट्टर रहें
संत ने कहा कि हमें भी अपने धर्म के प्रति कट्टर रहना चाहिए। फिल्मी मीडिया के माध्यम से कई बार हिन्दू संस्कृति, साधु, संतों को गलत बताकर उनकी गलत छवि पेश कि जाती है। ऐसे में हमें अपने सनातनी धर्म को बचाने के लिए अपने धर्म के प्रति कट्टर होना चाहिए। उन्होंने कहा कि संत को स्वतंत्र होना चाहिए तभी तो वह संत है यदि संत किसी राजनीतिक पार्टी या राजनेता के प्रचार प्रसार करें तो वह गलत है।
कथाओं के कारण ही हमारी संस्कृति आज तक जीवित
उन्होंने कहा कि इंटरनेट के कारण अश्लील सामग्रियों की बाढ़ सी आ गई है। जिससे हमारी मानसिकता दूषित हो रही है और कुछ षडयंत्रकारी लोग यही चाह रहे है कि हमारी मानसिकता दूषित हो और हम और हमारी संस्कृति पिछड जाए। लेकिन कथाओं के कारण ही हमारी सनातनी संस्कृति आज तक जीवित है इसलिए जहां भी कथा हो श्रवण अवश्य करना चाहिए। चिन्मयानंद ने कहा कि विरोधी होना चाहिए। विरोधी इस बात के परिचायक हैं कि आप सफल हो रहे है। नई पीढ़ी में अच्छे संस्कार डालने और भारत की गौरवशाली परंपरा से वाकिफ करवाने के लिए शिक्षा पद्धति में बदलाव की आवश्यकता है।