खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए लागू किए फरमान पर अब तक नहीं हुआ अमल
मंदसौर.
खाद की दुकानों पर पीओएस मशीन लगाने के केंद्र सरकार के प्रोजेक्ट पर जिले में ग्रहण लग गया है। लंबे समय बाद भी अब तक यह मशीनें दुकानों पर नहीं लग पाई है और बिना मशीनों में एंट्री के ही किसानों को इन दुकानों से खाद लेना पड़ रहा है। खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए जारी फरमान का ही पालन नहीं हुआ तो फिर कालाबाजारी रुकना कैसे संभव है। बावजूद कब तक यह मशीनें इन खाद की दुकानों पर लग पाएगी और कब तक इनमें पूरी एंट्री हो पाएगी, यह सवाल बन गया है। जिले में 50 प्रतिशत दुकानों पर यह मशीन लग पाई है। जिस कंपनी को यह मशीने लगाने का काम सौंपा गया है, उस पर विभाग का अंकुश नहीं है। सीधे केंद्र से ही जवाबदारी कंपनी को मिलने के कारण विभाग इस पर दबाव भी नहीं बना पा रहा है और सिर्फ इतना ही कह रहा कि मशीनें उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण यह पीओएस मशीन सभी दुकानों पर नहीं लग पाई है।
केंद्र से मिलता है अनुदान
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार फर्टिलाईजर (उर्वरक) का उत्पादन करने वाली कंपनियों को केंद्र की ओर से अनुदान मिलता है। ऐसे में केंद्र ने सभी फर्टिलाईजर की दुकानों पर यह पीओएस की मशीन लगवाने का निर्णय लिया था। इससे दुकान पर खाद पहुंचने से लेकर खाद की बिक्री की पूरी जानकारी इसी मशीन में रहेगी। जब मशीन में पूरी जानकारी रहेगी तो खाद की कालाबाजारी नहीं हो पाएगी। मुख्य रुप से खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए यह प्रोजेक्ट लागू किया था, लेकिन यह अब तक पूरा नहीं हो पाया है। अभी जिले में आधी ही दुकानों पर यह लग पाया है। ५० प्रतिशत काम बाकी है और यह कब पूरा होगा। इस पर विभाग अनजान बना बैठा है। जिले में पीओएस मशीन लगाने का जिम्मा केंद्र से ही नेशनल फर्टिलाइजर कंपनी को मिला है, लेकिन पीओएस मशीन लगाने के काम को लेकर इस कंपनी पर विभाग किसी प्रकार का दबाव नहीं बना पा रहा है।
204 जगहों पर लगी है मशीन
पीओएस की मशीन लगाने का प्रोजेक्ट केंद्र का था। जिले की 410 दुकानों में से वर्तमान में 204 दुकानों पर यह लग चुकी है। यह मशीन लगाने का जिम्मा नेशनल फर्टिलाइजर कंपनी को दिया गया था। मशीनें उपलब्ध नहीं हो पाने के कारण यह काम अधुरा है। जहां मशीन लगी है। वहां इसका उपयोग हो रहा है। वर्तमान में जिले में खाद की किल्लत नहीं है। यह कब तक पूरा होगा। यह तो नहीं पता, लेकिन जल्द से जल्द लगने के साथ काम शुरु हो यह कोशिश है।
- डॉ. अजीतसिंह राठौर, उपसंचालक, कृषि विभाग