प्रति हेक्टेयर साढ़े 45 क्विटंल हुआ गेहूं, 11 लाख 81 हजार मैट्रिक टन हुआ। सिंचाई परियोजनाओं से लेकर मौसम की अनुकूलता व किसानों की मेहनत से हुआ बंपर उत्पादन, इसी कारण मंडियों में इन दिनों गेहूं की बंपर आवक हो रही है।
मंदसौर.बाढ़ के बाद वर्ष 2020 में जिले में 8 लाख मैट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था। जो सबसे अधिक था लेकिन अब सिंचाई परियोजनाओं से खेतों तक पहुंचने पानी और मौसम की अनुकूलता के कारण जिले की माटी ने बंपर गेहूं उगला। अब तक का सबसे अधिक 11 लाख 81 हजार मैट्रिक टन गेहूं इस बार जिले में हुआ है। प्रति हेक्टेयर साढ़े 45 क्विटंल गेहूं का उत्पादन जिले में हुआ है। मौसम की मेहरबानी और किसानों की मेहनत की जुगलबंदी से इस बार रबी की मुख्य फसल गेहूं का जिले में बंपर उत्पादन किया। इसी कारण मंडियों में इन दिनों गेहूं की बंपर आवक हो रही है।
इस साल के उत्पादन ने पिछले सालों का रेकार्ड तोड़ दिया हैं। रबी सीजन में जिले में 3 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बोवनी हुई थी। इसमें सबसे ज्यादा रकबा 2.59 लाख हेक्टेयर गेहूं का था। ऐसे में मालवा का मंदसौर जिले का गेहूं अब सालभर अन्य जिलों के लोगों का पेट भी भरने का काम करेगा। मंडी से लेकर सरकारी खरीदी में आने वाले गेहूं का अन्य जगह परिवहन किया जा रहा है।
मंडी में डेढ़ माह से हो रही नए गेहूं की आवक
मंडी में नए गेहूं की आवक करीब डेढ़ माह से ही शुरू हो गई थी। नए गेहूं की आवक होते ही मंडी में गेहूं के दामों में गिरावट शुरू हुई। डेढ़ माह पहले 3200 रुपए प्रति क्विटंल तक किसानों को गेहूं के दाम मंडी में मिल रहे थे। अब दाम गिरकर 2300 से 2700 रुपए पर पहुंच गए हैं। मंडी में प्रतिदिन 15 से 17 हजार बोरी गेहूं की आवक हो रही हैं। इसके साथ ही समर्थन मूल्य पर भी गेहूं विक्रय में उत्साह हैं। समर्थन मूल्य के केंद्रों पर भी बड़ी मात्रा में गेहूं पहुंच रहा है। इस बार समर्थन मूल्य पर भी बोनस सहित अच्छे दाम मिल रहे है।
प्रति हेक्टेयर 45 क्विटंल से अधिक गेहूं का उत्पादन
पहले पर्याप्त वर्षा हुई, पूरी क्षमता से जल स्त्रोत भर गए। भूमि में पर्याप्त नमी के साथ ही ठंड के मौसम में भी तापमान 6 डिग्री से नीचे नहीं जाने का असर यह हुआ है कि रबी की फसल गेहूं के साथ ही चना, सरसो, मसूर सभी का उत्पादन अच्छा हुआ हैं। कृषि विभाग के अनुसार इस वर्ष जिले में 3 लाख हेक्टेयर भूमि पर रबी फसलों की बोवनी हुई। जिसमें से अकेले गेहूं का रकबा 2.59 लाख हेक्टेयर था और अब उत्पादन भी रेकॉर्ड तोड़ रहा है। प्रति हेक्टेयर 45 क्विटंल गेहूं का उत्पादन हुआ है।
ऐसे समझे जिले में गेहूं के उत्पादन को
वर्ष 2019 में आई बाढ़ के बाद वर्ष 2020 में जिले में गेहूं का रेकॉर्ड उत्पादन 8 लाख मैट्रिक टन हुआ था। इसका आंकड़ा गत वर्ष 11 लाख 15 हजार मैट्रिक टन उत्पादन के साथ टूटा। यह रेकॉर्ड इस साल फिर टूटा और इस बार रेकॉर्ड तोड़ 11 लाख 81 हजार 448 मैट्रिक टन हुआ है। जो जिले में अब तक का सबसे अधिक गेहूं उत्पादन है। इसके पीछे बड़ा कारण सिंचाई परियोजना से खेतों तक पानी पहुंचने और मौसम की अनुकूलता है। गरोठ, भानपुरा से लेकर सुवासरा, सीतामऊ बेल्ट में जहां सिंचाई के पर्याप्त इंतजाम व बड़ी योजनाओं का पानी पहुंचा है। वहां सबसे अधिक गेहूं का उत्पादन हुआ है। साथ ही सिंचाई के लिए पानी के पर्याप्त इंतजाम होने से गेहूं की बोवनी का प्रतिशत व सिंचित जमीन का प्रतिशत भी साल दर साल बढ़ता जा रहा है।
गेहूं का बंपर उत्पादन
इस साल गेहूं का बंपर उत्पादन हो रहा हैं। जिले में कुल 2.59 लाख हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की बोवनी हुई थी। मौसम का भरपूर साथ रबी की फसलों को मिला। प्रति हेक्टेयर 45 क्विटंल गेहूं का उत्पादन हुआ है। जिले में इस बार 11 लाख 81 हजार 448 मैट्रिक टन उत्पादन हुआ है। जो गत वर्ष से अधिक है और एक रेकॉर्ड है।-रवींद्र मोदी़, उपसंचालक, कृषि विभाग