पक कर तैयार था गन्ना लॉक डाउन लगा तो खेत पर ही बना दी गुड़ की फैक्ट्री
मंदसौर
लॉक डाउन के दौर में चुनौती को अवसर में बदलने का संदेश प्रधानमंत्री ने दिया। इसी से प्रेरित होकर जिले के एक किसान ने अपने खेत पर गुड़ की फैक्ट्री तैयार कर दी जहां 1 दर्जन से अधिक गांव के ही लोगों को रोजगार मिल रहा है तो प्रतिदिन 5 से 6 क्विंटल ताजा गुड बनाने का काम किया जा रहा है जो गांव सहित आसपास के गांव और यहां तक कि मंदसौर के लोग भी इसे खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं।
लॉक डाउन के दौर में परिवहन आवाजाही व बाजार बंद होने के कारण किसान ने इस अवसर को भुनाया और नया काम शुरू किया जो सफल रहा। दरअसलए किसान गन्ने की खेती करता है और गन्ना पककर तैयार था लेकिन लॉक डाउन के कारण बाहर नहीं भेज पा रहा था काफी सोच.विचार के बाद किसान ने अपने ही खेत पर गन्ने से गुड़ बनाने के काम की शुरुआत की तो इसमें उसे सफलता मिली और अब यह काम अनवरत जारी है अब किसान को घर बैठे ही फायदा मिल रहा है तो गांव के अन्य लोगों को रोजगार भी मिल रहा है वही इस चुनौती के समय में किसान ने इसे नया अवसर के रूप में बदलने में सफलता पाई है
वैसे तो क्षेत्र में गन्ने की खेती पहले की अपेक्षा अब बहुत कम जिले मैं हो गई है लेकिन जो किसान कर रहे हैं वह भी इस बार कोरोना के कारण लगे लॉक डाउन के चलते परेशान हैं और गन्ना बाहर नहीं भेज पा रहे कोरेना महामारी के कारण जहां सब कुछ थम सा गया और सब कामकाज ठप हो गया तो किसान भी अपना गन्ना बाहर नहीं भेज पा रहे थे इसलिए जिले के एक किसान ने गन्ने का गुङ बनाना शुरू कर दिया है ग्राम बहादरी के किसान प्रमोद नहाल ने अपने ही खेत पर गन्ने का रस निकाल कर गुङ बनाना शुरू कर दिया किसान का कहना है कि पुरी तरह से लाकडाउन हैं ओर गन्ने कि फसल पुरी तरह से पक कर तेयार हो चुकी है वह गन्ना बाहर नही भेज पा रहा था तब ईसलीए सोचा ओर खेत पर ही गन्ने का रस निकाल कर गुङ बनाना शुरू कर दिया एक दिन में लगभग पांच से छ क्विंटल गुङ बनता है गांव में ही शुद्ध ओर ताजा गुङ बनने के कारण ग्रामीणों को यह स्वादिष्ट भी लग रहा है। इसलिए अब गु? की लोकल स्तर पर ही बिक्री खूब हो रही है। पिछले साल कि बात कि जाय तो गन्ने सातसो रूपये क्विंटल तक बिका लेकिन ईस बार तो कोरेना महामारी कि वजह से एक भी गन्ना बाजार में नहीं बीका इसलिए खेत पर ही गन्ने का रस निकाल कर गुङ बनाना शुरू कर दिया गुङ बनाने से लगभग दस से बारह मजदुर को रोजगार भी मिला।
गुड नहीं बनाता तो फसल पूरी खराब हो जाती
किसान प्रमोद नहाल का कहना है कि अगर गुङ नहीं बनाते तो गन्ने कि फसल पुरी तरह से खराब हो जाती गुङ बनाने में मेहनत तो बहुत लगती हैं पर क्या करे लाकडाउन कि वजह से बाजार में गन्ने के रस की दूकाने बंद हे तो गन्ने बिके कहा ईसलीए सोचा कि गुङ बनाना शुरू कर दे तो थोड़ा बहुत फायदा तो होगा यह प्रयोग सफल रहा।
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