
नर्इ दिल्ली। आर्थिक मामलों के जानकार अौर वित्तीय एजेंसियां भले ही ये दावा कर रहें हों की देश अब जीएसटी आैर नोटबंदी की मार से उबर रहा हाे लेकिन हकीकत इससे कुछ इतर ही नजर अा रहा है। अभी भी छोटे कारोबारियों के साथ-साथ होटल इंडस्ट्री आैर रेस्त्रां कारोबारियों को काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों के कारोबारियों को पिछला एक साल काफी मुश्किलों भरा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि इनकी हालत एक बार फिर 2015 के स्तर पर पहुंच गर्इ है जबकि कर्इ होटल व रेस्त्रां तो बंद भी करने पड़े हैं।
पिछले एक साल में देश के करीब 50 नामी डाइनिंग रेस्त्रां आैर हैंबर्गर के यूनिट्स बंद हो चुके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह होटल एवं रेस्त्रां पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का वापस लिया जाना है। वहीं लगातार बढ़ती महंगार्इ आैर प्रतिस्पर्धात्मक माहौल भी इन रेस्त्रां चेन के लिए चुनौती बना हुआ है। मौजूदा समय में हाइपर लोकल स्तर पर फूड डिलिवरी स्टोर्स खुलने से भी इन रेस्त्रां को बड़ा झटका लगा है। जुबिलेंट फूडवर्क्स, जो की भारत में डाॅमिनोज पिज्जा आैर डंकिन डाॅनट्स के रेस्त्रा चेन को आॅपरेट करती हैं
इन कंपनियों ने बंद किए स्टोर्स
भारत में डाॅमिनोज पिज्जा आैर डंकिन डाॅन्ट्स के रेस्त्रां चेन को आॅपरेट करने वाली जुबिलेंट फूडवर्क्स ने घाटे में चल रहे अपने 40 फीसदी डंकिन डाॅन्ट्स स्टोर्स को बदं कर दिया है। वहीं डीजीआर्इ फ्राइडे ने भी बीते माह अपने तीन यूनिट्स को बंद कर दिया है। घाटे के चलते अपने रेस्त्रा बंद करने वाले इस लिस्ट में यूएस रेस्त्रां चेन 'वेंडी' आैर जेएसएम हाॅस्पिटेलिटी भी है। वेंडीज ने 2015 में भारत में अपने कारोबार की शुरूआत की थी। इस कंपनी की योजना थी कि 2019 तक 40 से 50 आैर खोला जाए। दुनियाभर में इसके 6000 से भी अधिक रेस्त्रां हैं। जेएसएम हाॅस्पिटेलिटी ने अपने कैलिफोर्निया पिज्जा किचन आैर 'कैफे आउट आॅफ द बाॅक्स' पर ताला लगा दिय है।
क्यों इतने तेजी से बंद हो रहे रेस्त्रां
पिछले एक साल में देश इतने बड़ी संख्या में रेस्त्रा बंद होने के पीछे कर्इ कारण हैं। इनमें से सबसे पहला कारण ये है कि अब जीएसटी के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट वापस ले लिया गया है। वहीं इन्हें महंगार्इ का मार भी झेलना पड़ रहा है। 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया नोटबंदी आैर पिछले साल जुलार्इ में किए गए नोटबंदी से भी इन रेस्त्रां को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।