
नई दिल्ली। तेल एवं गैस क्षेत्र की अग्रणी सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के मुताबिक भुगतान संबंधी समस्या की वजह से ईरान से आयातित तेल की आपूर्ति में अगस्त के बाद से बाधा आ सकती है। इंडियन ऑयल के वित्तीय प्रमुख एके शर्मा ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने तेल शोधक संयंत्रों को यह सूचना दी है कि उसके जरिए नवंबर के बाद से ईरान के तेल आयात का भुगतान बंद हो जाएगा। शर्मा ने कहा कि एसबीआई की इस घोषणा के कारण अगस्त के बाद से ही ईरान से तेल की ढुलाई प्रभावित होने लगेगी और जब तक भुगतान का नया माध्यम स्थापित नहीं किया जाएगा, आपूर्ति बाधा बनी रहेगी।
भारत का तीसरा बड़ा तेल सप्लायर है ईरान
भारत ने गैस फील्ड को लेकर जारी विवाद के कारण वर्ष 2017-18 के दौरान ईरान से अपना तेल आयात कम किया है, लेकिन फिर भी ईरान इसके लिए तेल का तीसरा बड़ा आपूर्तिकर्ता है। ईरान ने 31 मार्च 2018 को समाप्त वित्त वर्ष के दौरान में भारत में रोजाना औसतन 4,58,000 बैरल कच्चे तेल की आपूर्ति की है। भारत के तेल शोधक कारखाने ईरान से आयातित तेल का भुगतान यूरो में करने के लिए फिलहाल एसबीआई और जर्मनी के यूरोपेश ईरानीश हैंडल्सबैंक एजी का इस्तेमाल करते हैं।
अमरीका कर चुका है ईरान पर प्रतिबंध की घोषणा
एसबीआई ने ऐसे समय में यह फैसला लिया है जब अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले ईरान पर छह माह के भीतर सख्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। दरअसल ईरान की ओर से परमाणु गतिविधियों पर रोक लगाने के वायदे पर अमरीका सहित अन्य देशों ने वर्ष 2015 में उससे समझौता किया था। अमरीका की घोषणा के वक्त इंडियन ऑयल ने कहा था कि अमरीकी प्रतिबंधों के मद्देनजर वह ईरान से आयात में किसी भी कटौती की पूर्ति के लिए खाड़ी देशों के आपूर्तिकर्ताओं से तेल खरीदेगी। रिलायंस इंडस्ट्रीज की योजना भी ईरान से तेल आपूर्ति रोकने की है, जबकि नयारा एनर्जी ने इस माह से ईरान से तेल आपूर्ति में कमी शुरू कर दी है। नयारा एनर्जी को पहले एस्सार ऑयल के नाम से जाना जाता। रूस की तेल कंपनी रोस्नेफ्ट ने इसकी 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदकर इसका नाम बदला है।
चीन को सबसे ज्यादा तेल निर्यात करता है ईरान
ईरान सबसे अधिक तेल निर्यात चीन को करता है और दूसरे स्थान पर भारत है। भारत चंद ऐसे देशों में है जिसने ईरान पर पूर्व में लगाए गए प्रतिबंधों के समय भी उससे व्यापार जारी रखा। भारत का कहना है कि वह अमरीकी प्रतिबंधों को नहीं मानता, लेकिन अमरीका की वित्तीय प्रणाली से संबंध रखने वाली कंपनियों और बैंकों के प्रतिबंधों को न मानने की दशा में जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान भारत में अपनी तेल बिक्री बनाए रखने के लिए अतिरिक्त छूट दे सकता है। इस अवसर का लाभ उठाते हुए भारत उससे 60 दिन की क्रेडिट अवधि के बदले अधिक छूट मांग सकता है। भारतीय तेल शोधक संयंत्रों ने ईरान द्वारा कच्चे तेल की ढुलाई में अधिक छूट दिये जाने के मद्देनजर वहां से तेल आयात दोगुना करने की योजना बनाई थी।
अमरीकी प्रतिबंध ने बढ़ाईं भारत-ईरान की मुश्किलें
इंडियन ऑयल की योजना भी चालू वित्त वर्ष में 1,80,000 बैरल प्रतिदिन आयात करने की थी। ईरान से तेल आयात बरकरार रखने और भुगतान का नया जरिया तलाशने के लिए भारतीय प्रतिनिधियों का एक दल गत सप्ताह फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के बेस ब्रसेल्स के बैंकरों और अधिकारियों से मिला था। ईरान पर अमरीकी प्रतिबंध सख्त करने की चेतावनी के बाद जहाजरानी कंपनियों, बैंकों और बीमा कंपनियों ने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इंडियन ऑयल ने जब ईरान से तेल आयात के टैंकरों की निविदा जारी की तो बहुत ही कम कंपनियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। इंडियन ऑयल के मुताबिक ईरान की कंपनी नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी और अन्य चंद कंपनियों ने इसमें भारीदारी की। प्रतिबंध की चेतावनी के कारण ईरान से आयातित तेल की ढुलाई की लागत भी बढ़ गयी है।